CWG 2026: बिहार के लाल झंडू कुमार ने देश को दिलाया पहला मेडल, सब्जी बेचने से लेकर पदक जीतने तक ऐसा रहा सफर

खबर सार :-

Commonwealth Games 2026 Jhandu Kumar: झंडू कुमार की कहानी सिर्फ़ ब्रॉन्ज़ मेडल तक ही सीमित नहीं है। यह उस ज़बरदस्त संकल्प की कहानी है जिसने ग़रीबी को मात दी, पोलियो को हराया और आख़िरकार अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय तिरंगे को शान से लहराते हुए देखा। ग्लासगो में जीता गया ब्रॉन्ज़ मेडल किसी गोल्ड मेडल से कम नहीं है।
CWG 2026: बिहार के लाल झंडू कुमार ने देश को दिलाया पहला मेडल, सब्जी बेचने से लेकर पदक जीतने तक ऐसा रहा सफर

खबर विस्तार : -

Commonwealth Games 2026: स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने मेडल टैली में अपना खाता खोल लिया है। पैरा-पावरलिफ्टर झंडू कुमार (Jhandu Kumar) ने देश के लिए पहला मेडल जीता। शुक्रवार को ग्लासगो में उन्होंने पुरुषों के पैरा-पावरलिफ्टिंग इवेंट में 190 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक जीता। झंडू कुमार पिछले आठ सालों में कॉमनवेल्थ-लेवल की प्रतियोगिता में देश के लिए मेडल जीतने वाले बिहार के पहले एथलीट हैं।

कौन है झंडू कुमार

28 वर्षीय झंडू बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (CWG 2026) में भारत को पहला पदक दिलाने वाले बिहार के लाल झंडू कुमार की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। बचपन में उन्हें पोलियो हो गया था और उन्हें गरीबी व आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ा। इन चुनौतियों के बावजूद, झंडू कुमार ने हार नहीं मानी। उन्होंने ग्लासगो में पैरा-पावरलिफ्टिंग इवेंट में 190 किलोग्राम वजन उठाकर और ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपनी काबिलियत साबित की। वह पिछले आठ सालों में कॉमनवेल्थ-लेवल की प्रतियोगिता में देश के लिए मेडल जीतने वाले बिहार के पहले एथलीट हैं। 

मुश्किलों भरा रहा सफर 

महज पांच साल की उम्र में पोलियो की वजह से झंडू कुमार शारीरिक रूप से कमजोर हो गए थे, फिर भी उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। वे सब्जियां बेचकर अपना गुजारा करते थे। लेकिन कोविड-19 महामारी और एक ओवरब्रिज के निर्माण के कारण परिवार की सब्जी की दुकान भी बंद हो गई, जिससे उनकी कमाई का एक मुख्य जरिया खत्म हो गया। 

सब्जी बेची, ई-रिक्शा भी चलाया

ऐसी स्थिति में, झंडू ने परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं और ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया। दिन भर की थकान के बावजूद, झंडू कुमार ने कभी अपनी प्रैक्टिस नहीं छोड़ी। ई-रिक्शा चलाने के बाद शाम को सीधे जिम जाना उनकी रोज़ की दिनचर्या का हिस्सा बन गया था। फिर भी, उनका एक ही लक्ष्य था: एक दिन भारतीय जर्सी पहनना और देश के लिए मेडल जीतना। 

इतना ही नहीं 2023 में, नेशनल पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने अपना ई-रिक्शा तक बेच दिया था। हालांकि, वहां भी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। वे एक भी सफल लिफ़्ट पूरी नहीं कर पाए। कई लोगों के लिए यह सफर का अंत हो सकता था, लेकिन झांडू के लिए यह एक नई शुरुआत साबित हुई। 

कोच राजिंदर सिंह ने बदली किस्मत 

यहां से नेशनल कोच राजिंदर सिंह राहेलू की नजर झंडू कुमार पर पड़ी। इसके बाद ही उन्हें गांधीनगर के नेशनल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में ट्रेनिंग करने का मौका मिला। इसके बाद झंडू ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने खेलो इंडिया पैरा गेम्स में सिल्वर मेडल जीता और नेशनल और इंटरनेशनल दोनों स्तरों पर अपने शानदार प्रदर्शन के लिए सुर्खियां बटोरीं।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में झंडू कुमार ने अपनी पहली कोशिश में 181 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद, 190 किलोग्राम वजन उठाकर उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता। हालांकि उन्होंने 196 किलोग्राम वजन उठाकर नया कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड बनाने की भी कोशिश की।लेकिन सफल नहीं रही, लेकिन उनके चेहरे पर कोई निराशा नहीं थी, क्योंकि उनका सबसे बड़ा सपना पहले ही पूरा हो चुका था।

कांन्स पदक जीतने के बाद भावुक हुए झंडू

झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कांन्स पदक जीतने को अपनी सालों की मेहनत और लगन को समर्पित किया। ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने के कुछ ही समय बाद, भावुक झांडू ने मीडिया को बताया कि उन्हें हमेशा से भरोसा था कि उनकी मेहनत का फल ज़रूर मिलेगा। झंडू ने कहा, मुझे हमेशा विश्वास था कि एक दिन मैं अपने देश के लिए मेडल जीतूंगा।

गौरतलब है कि साधारण पृष्ठभूमि से उठकर मिली झांडू की सफलता दूसरे एथलीटों के लिए प्रेरणा का काम करती है। अपनी उपलब्धि के बारे में बात करते हुए, झांडू ने कहा कि यह मेडल सिर्फ़ उनका नहीं है, बल्कि उन सभी का है जिन्होंने मुश्किल समय में उनका साथ दिया। उन्होंने कहा कि इस सफलता ने उन्हें भविष्य में और भी बड़े सम्मान हासिल करने के लिए प्रेरित किया है।

FAQ...

1- कौन है झंडू कुमार ?

झंडू कुमार भारत के सर्वश्रेष्ठ पैरा पावरलिफ्टरों में से एक है। वह बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले हैं।

2- कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 कहां आयोजित हो रहा है ?

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 स्कॉटलैंड के ग्लासगो में चल रहा है। जो 23 जुलाई से 2 अगस्त तक चलेगा। 

3- कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने अब तक कितने पदक जीते ?

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत अभी तक सिर्फ एक मेडल जीता है। झांडू कुमार ने पैरा-पावरलिफ्टिंग इवेंट में भारत के लिए कांस्य पदक जीता।

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