Major Dhyan Chand: 185 मैच और 570 गोल....हिटलर भी थे हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के मुरीद

खबर सार :-

Major Dhyan Chand: भारत में हर साल 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। यह दिन महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
Major Dhyan Chand: हिटलर भी थे हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के मुरीद

खबर विस्तार : -

Major Dhyan Chand: हॉकी के जादूगर 'पद्म भूषण' मेजर ध्यानचंद की आज 121वीं जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 में हुआ था। हॉकी के मैदान पर उनके असाधारण कौशल और गोल करने की उनकी काबिलियत ने उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई। इसीलिए उनकी जयंती को राष्ट्रीय खेल दिवस (National Sports Day) के रूप में मनाया जाता है। भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस को आधिकारिक तौर पर पहली बार 2012 में यादगार दिनों की सूची में शामिल किया गया था।

मेजर ध्यानचंद को क्यों कहा जाता है 'हॉकी का जादूगर' 

बता दें कि महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त, 1905 को इलाहाबाद उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके पिता सेना में थे और हॉकी खेलते थे। ध्यानचंद सिर्फ़ 16 साल की उम्र में सेना में शामिल हो गए। सेना में रहने के दौरान हॉकी के लिए उनका जुनून बढ़ता गया। उन्होंने लगभग 22 साल तक भारत का प्रतिनिधित्व किया और इंटरनेशनल हॉकी में 500 से ज़्यादा गोल करने का कारनामा किया। 

उन्होंने 185 मैचों में 570 गोल किए। उनके खेल की सबसे खास बात गेंद पर उनका जबरदस्त कंट्रोल था। उनके बारे में कहा जाता था कि गेंद उनकी हॉकी स्टिक से इस तरह चिपकी रहती थी, जैसे स्टिक और गेंद के बीच कोई अदृश्य रिश्ता हो। इसीलिए उन्हें दुनिया भर में 'हॉकी का जादूगर' के नाम से जाना जाने लगा।

इतना ही नहीं कहा जाता है कि विरोधी खिलाड़ियों को भी इस बात पर यकीन ही नहीं कर पाते थे कि गेंद पर ध्यानचंद का शानदार कंट्रोल स्वाभाविक हो सकता है। एक मैच के दौरान उनकी स्टिक की जांच किए जाने का एक मशहूर किस्सा है। जापान में यह अफवाह भी फैली थी कि उनकी स्टिक पर गोंद लगी हुई थी। हालांकि इन कहानियों का कोई ठोस ऐतिहासिक सबूत नहीं है, लेकिन ये निश्चित रूप से यह बताती हैं कि विरोधी टीमों के लिए ध्यानचंद की ड्रिबलिंग और गेंद पर उनकी पकड़ कितनी अविश्वसनीय थी।

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हिटलर भी थे मेजर ध्यानचंद के मुरीद

दरअसल 1936 के बर्लिन ओलंपिक के फाइनल में भारत का मुकाबला मेजबान देश जर्मनी से हुआ। यह मैच सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं थी; उस समय के राजनीतिक माहौल को देखते हुए इसे बहुत अहम माना गया था। ध्यानचंद की कप्तानी में भारतीय टीम ने जर्मनी को 8-1 से करारी शिकस्त दी और गोल्ड मेडल जीता। इस मैच के दौरान ध्यानचंद के खेल से जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर के प्रभावित हुए थे। उन्होंने ध्यानचंद को जर्मनी की ओर से खेलने का प्रस्ताव भी दिया था। हालांकि, ध्यानचंद एक सच्चे देशभक्त थे और हमेशा सिर्फ भारत के लिए ही खेलना चाहते थे।

इतना ही नहीं कहा जाता है कि हिटलर ने ध्यानचंद को जर्मन सेना में ऊंचे ओहदे की पेशकश भी की थी। हालांकि, हिटलर और ध्यानचंद से जुड़ी इस कहानी के कई प्रचलित वर्शन हैं, लेकिन हर बात की पुष्टि ऐतिहासिक रिकॉर्ड से नहीं हो पाई है। फिर भी, यह बात पक्की है कि बर्लिन ओलंपिक में ध्यानचंद का प्रदर्शन भारतीय खेलों के इतिहास के सबसे यादगार अध्यायों में से एक है।

तीन ओलंपिक, तीन स्वर्ण 

मेजर ध्यानचंद उस दौर में भारतीय हॉकी के सबसे बड़े स्टार थे जब वैश्विक स्तर पर इस खेल में भारत का दबदबा था। उन्होंने लगातार तीन ओलंपिक खेलों में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने में अहम भूमिका निभाई।

  1. 1928 एम्स्टर्डम ओलंपिक: गोल्ड मेडल
  2. 1932 लॉस एंजिल्स ओलंपिक: गोल्ड मेडल
  3. 1936 बर्लिन ओलंपिक: गोल्ड मेडल

आज ही दिन 'खेलो इंडिया' पहल की हुई थी शुरुआत

राष्ट्रीय खेल दिवस का महत्व सिर्फ मेजर ध्यानचंद की जयंती मनाने तक ही सीमित नहीं है। 29 अगस्त 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'खेलो इंडिया' पहल की शुरुआत की थी। इस अभियान का मकसद जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान करना, युवाओं को खेलों से जोड़ना और भारत में खेल संस्कृति को मजबूत करना था। 

'खेलो इंडिया' के जरिए अलग-अलग खेलों में उभरती प्रतिभाओं को ट्रेनिंग, प्रतियोगिताएं और खेल के बेहतर मौके देने की कोशिशें की गईं। इस लिहाज से, 29 अगस्त भारतीय खेल इतिहास के दो अहम पहलुओं को जोड़ता है: ध्यानचंद की शानदार विरासत और एथलीटों की अगली पीढ़ी को तैयार करने की कोशिश। साथ ही राष्ट्रीय खेल दिवस का एक प्रमुख उद्देश्य देश के बेहतरीन खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को सम्मानित करना भी है।

29 अगस्त को आयोजित होते है खेल के कई कार्यक्रम 

मेजर ध्यानचंद की जयंती पर हर साल 29 अगस्त को देश भर में खेल और शारीरिक फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दिन स्कूलों, कॉलेजों, खेल संस्थानों और विभिन्न सरकारी संगठनों में खेल प्रतियोगिताएं, फिटनेस गतिविधियां, सेमिनार और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। राष्ट्रीय खेल दिवस का उद्देश्य केवल मेजर ध्यानचंद को याद करना ही नहीं, बल्कि देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना भी है।

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