अखाड़े से अदालत तक हड़कंप! Vinesh Phogat को हाई कोर्ट से तगड़ा झटका, क्या खत्म हो गया रेसलिंग करियर?
खबर सार :-
Vinesh Phogat : दिल्ली हाई कोर्ट ने महिला पहलवान विनेश फोगाट को भारतीय कुश्ती संघ (Wrestling Federation of India) के खिलाफ मामले में बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने विनेश को एशियन गेम्स सेलेक्शन ट्रायल से पहले कुश्ती संघ के कारण बताओ नोटिस का जवाब देने का आदेश दिया है। जानिए क्या है पूरा विवाद।
खबर विस्तार : -
दिल्ली: भारतीय खेल जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। देश की स्टार महिला पहलवान विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) की उम्मीदों पर देश की सबसे बड़ी अदालतों में से एक, दिल्ली उच्च न्यायालय ने फिलहाल पानी फेर दिया है। कुश्ती के दांव-पेच में बड़े-बड़ों को चित करने वाली विनेश इस बार कानूनी दांव-पेच में उलझती नजर आ रही हैं। अदालत ने विनेश फोगाट को किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है, जिससे उनके आगामी मुकाबलों और खेल करियर पर संकट के बादल गहरा गए हैं।
जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए विनेश फोगाट को निर्देश दिया है कि वे भारतीय कुश्ती संघ (Wrestling Federation of India) द्वारा जारी किए गए कारण बताओ नोटिस का तय समय सीमा के भीतर एक विस्तृत और स्पष्ट जवाब दाखिल करें। इसके साथ ही, अदालत ने रेसलिंग फेडरेशन को भी निर्देशित किया है कि वह विनेश के जवाब पर आगामी 6 जुलाई तक अपना अंतिम और ठोस फैसला ले ले। अब इस पूरे विवाद पर अगली कानूनी सुनवाई भी 6 जुलाई को ही मुकर्रर की गई है, जिसने विनेश के समर्थकों और खेल प्रेमियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
ट्रायल में शामिल होने की गुहार खारिज, वकील ने दी ये दलील
दरअसल, यह पूरा मामला आगामी एशियन गेम्स के लिए होने वाले चयन प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए भारतीय कुश्ती संघ (Wrestling Federation of India) के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें एशियन गेम्स सेलेक्शन ट्रायल (Asian Games selection trial) की रेस से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। अदालत की कार्यवाही के दौरान विनेश फोगाट के पक्ष की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव ने अपनी दलीलों में खेल संघ की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए।
वकील राजशेखर राव ने अदालत के सामने भावुक और तार्किक रुख अपनाते हुए कहा कि, "इस पूरे प्रकरण में पर्दे के सामने जो चीजें दिखाई दे रही हैं, हकीकत सिर्फ उतनी ही नहीं है। इसके पीछे की कहानी कुछ और है।" उन्होंने कोर्ट से बेहद भावुक अपील करते हुए मांग की कि विनेश को आगामी 30 मई से शुरू होने वाले आगामी मुख्य सेलेक्शन ट्रायल में भाग लेने की विशेष अनुमति प्रदान की जाए, ताकि देश की एक होनहार खिलाड़ी का भविष्य बर्बाद न हो। हालांकि, अदालत ने इस भावुक अपील पर पूरी तरह से पेशेवर रुख बनाए रखा। जस्टिस कौरव की पीठ ने विनेश के वकील की इस मांग को सिरे से नामंजूर कर दिया। कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि नियम और प्रक्रियाएं सबके लिए बराबर हैं। खिलाड़ी को सबसे पहले कुश्ती संघ के नोटिस का जवाब देना होगा, और तब तक अदालत इस मामले में कोई भी मनमाना हस्तक्षेप नहीं करेगी।
क्यों बंद हुए विनेश के लिए कुश्ती संघ के दरवाजे?
इस पूरे विवाद की जड़ें भारतीय कुश्ती संघ के कड़े नियमों और चयन Criteria से जुड़ी हुई हैं। रेसलिंग फेडरेशन ने इस बार चयन प्रक्रिया के लिए जो मापदंड तय किए हैं, विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) तकनीकी रूप से उसमें फिट नहीं बैठ रही हैं। कुश्ती संघ के आधिकारिक बयान के मुताबिक, आगामी एशियन गेम्स का यह विशेष सेलेक्शन ट्रायल केवल उन चुनिंदा पहलवानों के लिए आयोजित किया जा रहा है जिन्होंने साल 2025 की सीनियर नेशनल चैंपियनशिप, साल 2026 के फेडरेशन कप या फिर अंडर-20 नेशनल चैंपियनशिप में शीर्ष स्थान या जीत हासिल की हो। चूंकि, विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) ने पिछले कुछ समय से चल रहे उतार-चढ़ाव के कारण इन तीनों ही प्रमुख राष्ट्रीय स्पर्धाओं में हिस्सा नहीं लिया था और न ही कोई जीत दर्ज की थी, इसलिए तकनीकी आधार पर वे इस ट्रायल का हिस्सा बनने की पात्रता खो चुकी हैं। विनेश और कुश्ती संघ के बीच इस कड़वाहट का एक बड़ा कारण महासंघ पर विनेश द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप भी हैं। विनेश फोगाट ने हाल ही में सोशल मीडिया पर चुप्पी तोड़ते हुए सनसनीखेज खुलासा किया कि वे पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाली 6 पीड़ित महिला पहलवानों में से एक हैं। उन्होंने महासंघ पर अब भी पूर्व अध्यक्ष के करीबियों का नियंत्रण होने का आरोप लगाया है।
संन्यास, वापसी और छह महीने का वो 'कड़ा' नियम
विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) का खेल करियर पिछले कुछ समय से किसी फिल्मी पटकथा की तरह रहा है। साल 2024 के पेरिस ओलंपिक के दौरान अत्यधिक वजन होने के कारण उन्हें दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से अयोग्य घोषित कर दिया गया था, जिससे पूरा देश स्तब्ध रह गया था। इस गहरे सदमे के बाद विनेश ने भावुक होकर कुश्ती से हमेशा के लिए अपने संन्यास की घोषणा कर दी थी। लेकिन एक सच्चे खिलाड़ी का खेल प्रेम उन्हें ज्यादा दिन दूर नहीं रख सका और उन्होंने दिसंबर 2025 में एक बार फिर अखाड़े में वापसी का ऐलान कर दिया।
इसी वापसी के बाद से उनके और भारतीय कुश्ती संघ (Wrestling Federation of India) के बीच की तल्खी और बढ़ गई। कुश्ती संघ ने विनेश पर घोर अनुशासनहीनता और एंटी डोपिंग नियमों (Anti-doping rules) के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए हैं। फेडरेशन का सबसे बड़ा तकनीकी तर्क यह है कि जब कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय स्तर पर संन्यास लेने के बाद दोबारा खेल में वापसी करना चाहता है, तो उसे खेल महासंघ को कम से कम छह महीने पहले इसकी लिखित सूचना या नोटिस देना अनिवार्य होता है। कुश्ती संघ का दावा है कि विनेश फोगाट ने इस अनिवार्य छह महीने के नियम का पूरी तरह उल्लंघन किया और बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे अखाड़े में उतर गईं।
देश की साख का सवाल और फेडरेशन का कड़ा रुख
इस कानूनी लड़ाई में भारतीय कुश्ती संघ (Wrestling Federation of India) का रुख विनेश को लेकर बेहद सख्त नजर आ रहा है। फेडरेशन ने अदालत के सामने साल 2024 के ओलंपिक के उस कड़वे वाकये का भी जिक्र किया, जब विनेश का वजन निर्धारित सीमा से अधिक पाया गया था। कुश्ती संघ ने सीधे तौर पर कहा कि ओलंपिक जैसे वैश्विक मंच पर वजन से जुड़े नियमों में बरती गई लापरवाही की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरे देश की खेल साख को गहरा धक्का लगा था और देश की फजीहत हुई थी।
अब जबकि 30 मई से सेलेक्शन ट्रायल शुरू होने जा रहे हैं और कोर्ट ने 6 जुलाई तक मामले को टाल दिया है, ऐसे में तकनीकी रूप से विनेश फोगाट का इस आगामी एशियन गेम्स के सफर में शामिल होना लगभग नामुमकिन नजर आ रहा है। खेल विश्लेषकों का मानना है कि यदि 6 जुलाई को कुश्ती संघ का फैसला विनेश के पक्ष में नहीं आता है, तो उनके पेशेवर खेल करियर पर हमेशा के लिए विराम लग सकता है।
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