Sharadiya Navratri 2026: नौवें दिन करें मां सिद्धिदात्री की पूजा, जानें मां का स्वरूप और मंत्र

खबर सार :-

Sharadiya Navratri 2026 day 9: नवरात्रि के नौवें दिन, माँ दुर्गा के नौवें स्वरूप 'माँ सिद्धिदात्री' की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
Sharadiya Navratri 2026: नौवें दिन होती हैं मां सिद्धिदात्री की पूजा

खबर विस्तार : -

Sharadiya Navratri 2026 Day 9 :   नवरात्रि के नौवें दिन मां दुर्गा के नवम् स्वरूप माता सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है। आठवें दिन जहां मां महागौरी की पूजा अर्चना की गयी। वहीं नवरात्र के अंतिम दिन सिद्धिदात्री की पूजा करने से सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है। दुर्गा मईया जगत के कल्याण के लिए नौ रूपों में प्रकट हुई और इन रूपों में अंतिम रूप है देवी सिद्धिदात्री का।

मां सिद्धिदात्री का स्वरूप

देवी प्रसन्न होने पर सम्पूर्ण जगत की रिद्धि सिद्धि अपने भक्तों को प्रदान करती हैं। देवी सिद्धिदात्री का रूप अत्यंत सौम्य है। देवी की चार भुजाएं हैं दायीं भुजा में माता ने चक्र और गदा धारण किया है। उनके बांयी भुजा में शंख और कमल का फूल है। मां सिद्धिदात्री कमल आसन पर विराजमान रहती हैं। मां की सवारी सिंह हैं। देवी ने सिद्धिदात्री का यह रूप भक्तों पर अनुकम्पा बरसाने के लिए धारण किया है। 

देवतागण, ऋषि-मुनि, असुर, नाग, मनुष्य सभी मां के भक्त हैं। देवी जी की भक्ति जो भी हृदय से करता है मां उसी पर अपना स्नेह लुटाती हैं। पुराण के अनुसार भगवान शिव ने इन्हीं की कृपा से सिद्धियों को प्राप्त किया था तथा इन्ही के द्वारा भगवान शिव को अर्धनारीश्वर रूप प्राप्त हुआ। अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ सिद्धियां हैं जिनका मार्कण्डेय पुराण में उल्लेख किया गया है।

ये भी पढ़ेंः- आस्था, रहस्य और साधना का संगम है झारखंड का रजरप्पा धाम, नवरात्रि में उमड़ते हैं श्रद्धालु

देवी सिद्धिदात्री की पूजा-विधि

  • नौवें दिन (नवमी तिथि) को सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद, देवी सिद्धिदात्री का ध्यान करते हुए व्रत रखने और पूजा करने का संकल्प लें।
  • सबसे पहले कलश और उसमें स्थापित देवी-देवताओं का ध्यान करें और उनकी पूजा करें।
  • देवी सिद्धिदात्री को रोली, कुमकुम, अक्षत (साबुत चावल), फूल और चुनरी अर्पित करें। इसके बाद, धूप और दीपक जलाएं और पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करें।
  • देवी को भोग लगाएं, जिसमें हलवा, पूरी, चना, खीर और नारियल शामिल हो सकते हैं। इसके बाद देवी से संबंधित मंत्रों का जाप करें।
  • पूजा के बाद, नौ कन्याओं का सम्मान करें, उन्हें देवी का ही रूप मानें। परंपरा के अनुसार, उन्हें भोजन कराएं और अपनी क्षमता के अनुसार उपहार या दक्षिणा दें, तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

मां सिद्धिदात्री का मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।

मां सिद्धिदात्री की आरती

जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता!!

तू भक्तों की रक्षक
तू दासों की माता!!

तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धी
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि!!

कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम
हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम!!

तेरी पूजा में न कोई विधि है
तू जगदंबे दाती, तू सर्वसिद्धी है!!

रविवार को तेरा सुमरिन करे जो
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो !!

तू सब काम कराती है उसके पूरे
कभी काम उसके रहे न अधूरे!!

तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया
रखे जिसके सर पर मैया अपनी छाया!!

सर्व सिद्धी दाती वह है भाग्यशाली
जो है तेरे दर का ही मां अंबे सवाली!!

हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा
महानंदा मंदिर में है वास तेरा!!

मुझे आसरा तुम्हारा ही माता
भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता!!

ये भी पढ़ेंः- Sharadiya Navratri: नवरात्रि के आठवें दिन होती है 'मां महागौरी' की विशेष पूजा, जानें माता का स्वरूप एवं मंत्र

अन्य प्रमुख खबरें