Aishbagh Ravan Dahan 2026: ऐशबाग रामलीला में इस बार दिखेगा आधुनिक तकनीक से लैस 70 फीट ऊंचा रोबोटिक रावण

खबर सार :-

लखनऊ के ऐतिहासिक ऐशबाग रामलीला मैदान में इस वर्ष 70 फीट ऊंचे रावण के पुतले को रोबोटिक्स तकनीक से तैयार किया जा रहा है, जिसकी गर्दन और हाथ घूम सकेंगे।
लखनऊ के ऐशबाग रामलीला में रोबोटिक्स तकनीक से सजेगा रावण का पुतला

खबर विस्तार : -

लखनऊ: लखनऊ के ऐतिहासिक ऐशबाग रामलीला मैदान में इस बार रावण दहन का नजारा बेहद खास होने वाला है। यहां पारंपरिक शिल्प कला के साथ आधुनिक तकनीक का अनूठा मेल देखने को मिल रहा है, जिसके तहत 70 फीट ऊंचे रावण के पुतले का निर्माण किया जा रहा है। इस पुतले को अधिक आकर्षक और जीवंत स्वरूप देने के लिए दिल्ली से विशेष कारीगरों को आमंत्रित किया गया है। पुतले के निर्माण में जुटी टीम इसे हर बार से कुछ अलग और भव्य बनाने का प्रयास कर रही है।

रोबोटिक्स से सजेगा पुतला

इस बार तैयार हो रहे रावण के पुतले की सबसे बड़ी विशेषता इसकी आधुनिक तकनीक है। रोबोटिक्स तकनीक के इस्तेमाल से इस विशाल पुतले की गर्दन और हाथ संचालित होंगे, जो दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा। श्री रामलीला समिति ऐशबाग के अध्यक्ष हरीशचंद्र अग्रवाल ने बताया कि पुतले को जीवंत रूप देने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है, जिससे आयोजन का अनुभव दर्शकों के लिए और अधिक यादगार बन सके।

साझा संस्कृति की मिसाल

इस आयोजन के पीछे की सबसे खूबसूरत बात इसकी निर्माण प्रक्रिया से जुड़ा संदेश है। रामलीला जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव के लिए रावण का पुतला तैयार करने वाले मोहम्मद इरफान आपसी सौहार्द की एक मजबूत मिसाल पेश कर रहे हैं। उनकी यह सक्रिय भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि कला और संस्कृति किसी एक दायरे में सीमित नहीं होतीं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की पहचान हमेशा से इसकी गंगा-जमुनी तहजीब और साझा संस्कृति रही है, जहां विभिन्न समुदायों के लोग एक-दूसरे के उत्सवों में खुलकर हिस्सा लेते हैं।

एक महीने की मेहनत और लागत

पुतला निर्माता मोहम्मद इरफान ने बताया कि इस प्रकार के विशाल और तकनीकी रूप से उन्नत पुतले को तैयार करने में लगभग एक महीने का समय लगता है। चरणबद्ध तरीके से किए जाने वाले इस निर्माण कार्य में करीब ढाई से तीन लाख रुपये तक की लागत आती है। पुतले के हर एक हिस्से को मजबूती और सुंदरता के साथ गढ़ा जाता है, ताकि सुरक्षा मानकों का भी पूरा ध्यान रखा जा सके।

रामोत्सव में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

ऐशबाग रामलीला समिति परिसर में इन दिनों भव्य रामोत्सव का आयोजन चल रहा है। बुधवार को इस कड़ी में कोलकाता के भास्कर नृत्य कला केंद्र के कलाकारों ने कई मनमोहक प्रसंगों का मंचन किया। कलाकारों ने श्रीराम वन गमन, निषादराज मिलन, केवट संवाद, सुमंत की अयोध्या वापसी, श्रवण कुमार कथा और राजा दशरथ के देहावसान जैसे मार्मिक दृश्यों को जीवंत किया। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावुक कर दिया, विशेषकर निषादराज और केवट संवाद के दृश्यों ने लोगों के मन में गहरी छाप छोड़ी।

भावुक करने वाले दृश्य

मंचन के दौरान कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं। श्रीराम के वनवास से उत्पन्न राजा दशरथ की पीड़ा और श्रवण कुमार के माता-पिता की मृत्यु के दृश्यों ने उपस्थित जनसमूह को झकझोर कर रख दिया। मंचन से पहले सांस्कृतिक संध्या के तहत अनुरूप नृत्य अकादमी के कलाकारों ने शिवाष्टकम, देवी स्तुति और रामाष्टकम पर सुंदर प्रस्तुतियां दीं। इसके बाद कॉमर्स स्फेयर एंड डांस स्फेयर के कलाकारों ने गणेश और शिव वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया।

ऐशबाग रामलीला उत्तर प्रदेश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित रामलीला आयोजनों में से एक है, जो अपनी भव्यता और सामाजिक समरसता के लिए देश भर में जाना जाता है। यहां हर साल विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन देखने के लिए भारी संख्या में लोग जुटते हैं। पारंपरिक मान्यताओं के साथ समय के साथ इसमें आधुनिक तकनीकों का भी समावेश किया जाने लगा है, जो इस सांस्कृतिक धरोहर को एक नई पहचान दे रहा है।

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