Sharadiya Navratri: नवरात्रि के आठवें दिन होती है 'मां महागौरी' की विशेष पूजा, जानें माता का स्वरूप एवं मंत्र

खबर सार :-

Shardiya Navratri Day 8: शारदीय नवरात्रि के आठवां दिन 'मां महागौरी को समर्पित है। इस दिन आप मां महागौरी चालीसा, मां महागौरी की 'आरती' और उनके 'मंत्रों' का पाठ कर सकते हैं।
नवरात्रि के आठवें दिन होती है 'मां महागौरी' की विशेष पूजा

खबर विस्तार : -

Shardiya Navratri 2026  Day 8:  नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के अष्ठम स्वरूप माता महागौरी (Maa Mahagauri) की पूजा का विधान है। सातवें दिन जहां को मां दुर्गा के सप्तम् स्वरूप माता कालरात्रि की आराधना की गयी। वहीं आठवां दिन देवी महागौरी को समर्पित जो आदि शक्ति हैं। इनके तेज से संपूर्ण विश्व प्रकाशमान होता है। इनकी शक्ति अमोघ फलदायिनी है। मां महागौरी की आराधना से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं तथा देवी का भक्त जीवन में पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी बनता है।

देवी महागौरी का स्वरूप

देवी महागौरी की चार भुजाएं हैं। उनकी दायीं भुजा अभय मुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में त्रिशूल शोभता है। बायीं भुजा में डमरू डम-डम बज रहा है और नीचे वाली भुजा से देवी गौरी भक्तों की प्रार्थना सुनकर वरदान देती हैं। जो स्त्री इस देवी की पूजा भक्ति भाव सहित करती हैं उनके सुहाग की रक्षा देवी स्वयं करती हैं। कुंवारी लड़की मां की पूजा करती हैं तो उसे योग्य पति प्राप्त होता है। जो पुरूष देवी गौरी की पूजा करते हैं उनका जीवन सुखमय रहता है। देवी उनके पापों को जला देती हैं और शुद्ध अंतःकरण देती हैं। मां अपने भक्तों को अक्षय आनंद और तेज प्रदान करती हैं। 

ये भी पढ़ेंः- नवरात्रि पर आस्था का केंद्र बना दमोह का महाकाली चौक, नौ दिनों तक रोज होता है शतचंडी अनुष्ठान

नवरात्रि पर कुंवारी कन्या को भोजन कराने का विधान है परंतु अष्टमी के दिन का विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएं अपने सुहाग के लिए देवी मां को चुनरी भेंट करती हैं। देवी गौरी की पूजा का विधान भी पूर्ववत् है अर्थात् जिस प्रकार सप्तमी तिथि तक मां की पूजा की गयी, उसी प्रकार अष्टमी के दिन भी देवी की पंचोपचार सहित पूजा का विधान है। महागौरी रूप में देवी करूणामयी, स्नेहमयी, शांत और मृदुल दिखती हैं। देवी के इस रूप की प्रार्थना करते हुए देव और ऋषिगण कहते हैं “सर्वमंगल मांगल्ये, शिवे सर्वाथ साधिके, शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते।’’

मां महागौरी की पूजा-विधि

  • सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  • पूजा के स्थान को साफ करें और गंगाजल छिड़क कर उसे पवित्र करें।
  • एक लकड़ी की चौकी रखें और उसे लाल कपड़े से ढक दें।
  • माता की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें, कुमकुम या रोली लगाएं और फूल अर्पित करें।
  • देवी दुर्गा को लाल चुनरी चढ़ाएं।
  • मां महागौरी को भोग लगाएं, जिसमें मिठाइयां और पांच तरह के फल शामिल हों।
  • इसके अलावा, देवी को हलवा-पूरी और खीर का भोग लगाएं।
  • निर्धारित विधियों के अनुसार मां महागौरी की पूजा करें, आरती करें और पवित्र मंत्रों का जाप करें।
  • हाथ जोड़कर प्रार्थना करें, किसी भी गलती के लिए क्षमा मांगें और पूजा संपन्न करें।

मां महागौरी का मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

मां महागौरी का ध्यान मंत्र

वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम।
सिंहारूढा चतुर्भुजा महागौरी यशस्विनीम।।
पूर्णन्दु निभाम् गौरी सोमचक्रस्थिताम् अष्टमम् महागौरी त्रिनेत्राम।
वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम।।
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम।।
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् त्रैलोक्य मोहनम।
कमनीयां लावण्यां मृणालां चन्दन गन्धलिप्ताम।।

महागौरी की आरती

जय महागौरी जगत की माया ।
जय उमा भवानी जय महामाया ॥

हरिद्वार कनखल के पासा ।
महागौरी तेरा वहा निवास ॥

चंदेर्काली और ममता अम्बे
जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे ॥

भीमा देवी विमला माता
कोशकी देवी जग विखियाता ॥

हिमाचल के घर गोरी रूप तेरा
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा ॥

सती 'सत' हवं कुंड मै था जलाया
उसी धुएं ने रूप काली बनाया ॥

बना धर्म सिंह जो सवारी मै आया
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया ॥

तभी मां ने महागौरी नाम पाया
शरण आने वाले का संकट मिटाया ॥

शनिवार को तेरी पूजा जो करता
मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता ॥

'चमन' बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो
महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो ॥

ये भी पढ़ेंः- Shardiya Navratri 2026 Day 7: नवरात्रि के सातवें दिन करें मां कालरात्रि की आराधना, जानें माता का प्रिय भोग और मंत्र

अन्य प्रमुख खबरें