कोेई घर में बना रहा बप्पा का मंदिर, कोई तलाश रहा सुरक्षित पंडाल

खबर सार :-

गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर यानी सोमवार को मनाने के लिए तैयारियां अंतिम चरण पर हैं। इस पर्व को लेकर घरों से गणेश उत्सव समितियों के पंडालों तक उत्साह में किसी प्रकार की कमी नहीं हैं।
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खबर विस्तार : -

लखनऊ, गणेश चतुर्थी की आहट होते ही इसकी तैयारियों में लोग जुटे हुए हैं। कहीं मूर्तिकार प्रतिमाओं को अंतिम आकार देने में जुटे हैं तो कहीं लोग अपनी पसंद के बप्पा की प्रतिमा तलाशते दिख रहे हैं। बप्पा को स्थापित करने से पहले की रंग-रौगन का काम भी चल रहा है।

हालांकि, अब समय नहीं बचा है, लेकिन उसका पूरी तरह से इस्तेमाल किया जा रहा है। इस बार गणेश चतुर्थी 14 सितंबर यानी सोमवार को मनाई जाएगी। गणेश उत्सव समितियों के पंडालों तक तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं। आयोजकों के उत्साह से ऐसा लग रहा है कि बस जल्द श्रीगणेश को लाया जाए और आसमान छू रहे जयकारों के बीच उनसे मन की कामना कर ली जाए। 

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जयपुर और बंगाल की कला के कायल 

गणेश उत्सव मनाने के लिए हर जगह उत्साह दिख रहा है। शहर-शहर तैयारियां चल रही हैं। लखनऊ के बाजारों की रंगत देखने वाली है। प्रमुख बाजारों से सड़कों के किनारे तक भगवान गणेश की आकर्षक प्रतिमाएं श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं। हमेशा की तरह ही इस बार भी शहर में जगह-जगह भगवान गणेश की छोटी से लेकर बड़ी प्रतिमाएं सजाई गई हैं। कलाकारों ने अलग-अलग आकार, स्वरूप और शृंगार में प्रतिमाएं तैयार की हैं। कुछ मूर्तियां जयपुर से भी लाई गई हैं।

जयपुर में पारंपरिक पगड़ी और मुकुट से सजे बप्पा के साथ आकर्षक पोशाक और बहुरंगी शृंगार वाली प्रतिमाएं काफी पसंद की जाती हैं। इसका कारण है कि कीमती और रंगीन पत्थर से बनी होने के कारण आकर्षक होती हैं। लखनऊ में आशीर्वाद मुद्रा और राजसी स्वरूप में तैयार गणेश प्रतिमाओं को पसंद किया जाता है। इनको ही स्थापित कर उनकी पूजा की जाती है। बंगाल की बारीक कलाकारी और आकर्षक रंगों में तैयार मूर्तियां यहां हर साल आसानी से मिल जाती हैं। 

 भगवान गणेश की मूर्ति में कंजूसी नहीं करते

दरअसल लखनऊ नवाबों का शहर है। इसलिए भगवान गणेश की मूर्ति में कंजूसी नहीं करते हैं। यह प्रतिमाएं घरों पर रखने के साथ ही गणेश उत्सव पंडालों में भी रखी जाती हैं। सरकारी व्यवस्था के अनुरूप उनका विसर्जन करने और शोभायात्रा के दौरान डायवर्जन आदि के लिए बने नियमों का पालन करना जरूरी होता है। शहर की विभिन्न गणेश उत्सव समितियां अलग-अलग दिन पंडालों में से बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन करती हैं। शहर में आकर्षक प्रतिमाओं का चयन किया जा रहा है।

जैसे पूरे लखनऊ में गणेश स्थापना होती है, वैसे ही मूर्तियों का व्यापार भी शहर भर में किया जाता है। कई बाजार ऐसी भी हैं, जहां त्योहारों और पर्वाें के अनुकूल सामग्री बेची जाती है। मवैया चौराहा इन दिनों जाम झेल रहा है। इसका कारण भी यही है कि यहां की दुकानों में पारंपरिक समयानुसार वस्तुएं बेची जाती हैं। अभी गणेश पर्व होने के कारण यहां मूर्तियां खरीदने वालों की भीड़ रहती है।

कई बाजार देखने के बाद गणेश मूर्ति मिल पाती

इनके वाहन सड़क पर खड़े रहते हैं। ज्यादा दिक्कत शाम के समय रहती है। श्रद्धालु अपनी सुविधा पसंद की मूर्तियां खरीदने में समय भी ज्यादा देते रहते हैं। कई श्रद्धालु परिवार के साथ पहुंचते हैं। उनको कई बाजार देखने के बाद गणेश मूर्ति मिल पाती है। कुछ ज्यादा जागरूक लोग मूर्तिकारों के पास या दुकानदारों से मनपसंद अग्रिम बुकिंग करावा लेते हैं।

गणेश जी का श्रृृंगार भी तमाम तरह का होता है। इसलिए खरीदने से पहले ही तय कर लेते हैं कि वह किस चीज की बनी है, क्योंकि ज्यादातर गणेश मूर्ति को पर्यावरण के अनुकूल पानी में गलने वाली ही खरीदना पसंद करते हैं। इनका श्रंगार अलग यानी पानी का इस्तेमाल करने से यह खराब हो सकती हैं। बहरहाल, उत्सव में कमी नहीं है। बस दो दिन बाद पंडालों में मधुर भक्तिपूर्ण गीत भी गूंजने लगेंगे।

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