मऊ में अजान की गूंज के बीच भरत-मिलाप की निभाई गई सदियों पुरानी परंपरा, सांप्रदायिक सद्भाव का गवाह बना शहर

खबर सार :-

मऊ में बुधवार को ऐतिहासिक शाही कटरा मस्जिद परिसर में भरत-मिलाप की सदियों पुरानी परंपरा शांतिपूर्ण निभाई गई। अजान की गूंज के बीच जय श्री राम के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
मऊ में सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल, अजान की गूंज के बीच हुआ भरत-मिलाप

खबर विस्तार : -

मऊ: बुधवार सुबह पूर्वांचल क्षेत्र के बुनकर शहर मऊ में आस्था, परंपरा और सांप्रदायिक सद्भाव का एक अनूठा नजारा देखने को मिला। ऐतिहासिक 'शाही कटरा मस्जिद' परिसर में शांतिपूर्ण माहौल के बीच 'राम-भरत मिलाप' (भगवान राम और उनके भाई भरत का मिलन) संपन्न हुआ, एक ऐसी परंपरा जो सदियों से चली आ रही है।

जहां एक ओर मस्जिद से अजान की गूंज सुनाई दे रही थी, वहीं दूसरी ओर आसपास का इलाका भक्तों के 'जय श्री राम' और 'हर हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठा। अलग-अलग धर्मों के बीच आपसी सम्मान और सद्भाव की यह परंपरा एक बार फिर मऊ की सांस्कृतिक पहचान को उजागर करती है।

शाही कटरा में सदियों पुरानी परंपरा

मऊ के ऐतिहासिक शाही कटरा में आयोजित होने वाला 'भरत मिलाप' केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है; यह शहर की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। परंपरा के अनुसार, भगवान राम का 'शाही विमान' (रथ/पालकी) मस्जिद के मुख्य द्वार को तीन बार स्पर्श करता है। इस रस्म के बाद 'भरत मिलाप' की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। हर साल इस पुरानी परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय निवासी इकट्ठा होते हैं। 

सांप्रदायिक सद्भाव का नजारा

सुबह होते ही शाही कटरा का इलाका भक्तों की मौजूदगी से जीवंत हो उठा। अजान और विभिन्न धार्मिक जयघोषों के बीच यह पारंपरिक आयोजन संपन्न हुआ। इस रस्म ने सबका ध्यान खींचा, जिसमें भगवान राम का 'शाही विमान' मस्जिद के मुख्य द्वार को तीन बार छूता है। इसके बाद भगवान राम और भरत का भावपूर्ण मिलन हुआ। पूरे आयोजन के दौरान, इस सदियों पुरानी परंपरा को निभाते हुए शांति और व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। मऊ में इस ऐतिहासिक परंपरा को स्थानीय स्तर पर 'गंगा-जमुनी तहजीब' (मिली-जुली संस्कृति) और आपसी सद्भाव के एक बेहतरीन उदाहरण के रूप में देखा जाता है। 

जिलाधिकारी बोले- प्रशासन सतर्क था

कार्यक्रम के शांतिपूर्ण समापन के बाद, जिलाधिकारी आनंद वर्धन ने मीडिया को बताया कि प्रशासनिक टीम शुरू से ही सतर्क थी और संबंधित अधिकारियों तथा सुरक्षा कर्मियों को जरूरी निर्देश दिए गए थे। उन्होंने बताया कि मस्जिद के मुख्य प्रवेश द्वार को तीन बार छूने की पारंपरिक रस्म के दौरान भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। साथ ही, जरूरत के हिसाब से व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे, जिसमें रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती भी शामिल थी। जिलाधिकारी ने बताया कि लोगों की भारी भीड़ को देखते हुए, भीड़ प्रबंधन (क्राउड मैनेजमेंट) पर विशेष ध्यान दिया गया। आयोजकों ने भी प्रशासन का पूरा सहयोग किया, जिससे पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुख्ता सुरक्षा इंतजाम और बेहतर तालमेल ही इस कार्यक्रम के सफल आयोजन की मुख्य वजह रहे।

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सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए

पुलिस अधीक्षक (एसपी) सर्वेश कुमार मिश्रा ने मीडिया को बताया कि शाही कटरा मस्जिद परिसर के अंदर और आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पूरे इलाके को अलग-अलग सेक्टरों में बांटा गया था और उसी के अनुसार पुलिस बल तैनात किया गया था। पर्याप्त संख्या में पुलिस अधिकारियों के अलावा, प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC) के जवानों को भी तैनात किया गया था, साथ ही जिले के बाहर से भी सुरक्षा बल बुलाए गए थे। एसपी के अनुसार, कार्यक्रम से पहले ही आयोजकों और स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों के साथ बातचीत करके जरूरी तालमेल बिठा लिया गया था। पुलिस प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि यह पारंपरिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो और भीड़ के बीच कोई अप्रिय घटना न घटे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मस्जिद के मुख्य प्रवेश द्वार को तीन बार छूने की रस्म एक पुरानी परंपरा है, जिसे स्थापित रीति-रिवाजों के अनुसार ही पूरा किया गया।

भारी भीड़ के बावजूद बनी रही व्यवस्था 

'भरत मिलाप' देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पिछली रात से ही शाही कटरा पहुंचने लगे थे। भीड़ की अधिकता और कार्यक्रम की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए, प्रशासन पूरी रात हाई अलर्ट पर रहा। सुरक्षा अभियान अधिकारियों की सीधी देखरेख में चलाए गए और आयोजकों के सहयोग से यह कार्यक्रम बिना किसी बड़ी बाधा के संपन्न हुआ। सुबह राम और भरत के भावुक मिलन के साथ यह धार्मिक आयोजन पूरा हुआ।

भाईचारे और परंपरा की विरासत 

यह आयोजन मऊ की उन परंपराओं का हिस्सा है, जो धार्मिक आस्था और सामाजिक सद्भाव दोनों को दर्शाती हैं। इस कार्यक्रम में प्रशासन की सतर्कता, आयोजकों का सहयोग और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी ने अहम भूमिका निभाई।

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