नई दिल्ली: बिहार के दरभंगा में कांग्रेस और राजद की 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई कथित अभद्र टिप्पणी ने देशभर में राजनीतिक घमासान को जन्म दिया है। इस पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने भी अपनी नाराजगी जताई है और इस प्रकरण की कड़ी निंदा की है। उन्होंने बिना प्रधानमंत्री का नाम लिए इस घटना को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की और राजनीतिक माहौल में गिरावट पर भी चिंता जाहिर की।
मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से कहा कि देश में खासकर राजनैतिक स्वार्थ के कारण राजनीति का गिरता हुआ स्तर अति-दुखद और चिंतनीय है। उन्होंने यह भी कहा कि इस समय सभी राजनीतिक दलों को पार्टी के संविधान और सिद्धांतों के आधार पर काम करना चाहिए, ताकि देश और करोड़ों गरीबों के हित में कार्य किया जा सके। मायावती ने चिंता व्यक्त की कि पिछले कुछ वर्षों से यह सही तरीके से देखने को नहीं मिला, जबकि देश आंतरिक और बाहरी दोनों तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है।
बसपा सुप्रीमो ने राजनीतिक आक्षेपों को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि देश के उच्च सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं में कार्यरत लोगों के खिलाफ की जाने वाली अभद्र, अशोभनीय, अमर्यादित और असंसदीय टिप्पणियां देश की छवि को धूमिल करती हैं। चुनाव के समय यह प्रक्रिया और भी विषैली हो जाती है, जिससे समाज में नकारात्मकता और हिंसा बढ़ती है। बिहार में हाल ही में जो कुछ हुआ, वह देश के लिए चिंताजनक है और इसके असर को पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मायावती ने आगे कहा कि बहुजन समाज पार्टी शुरू से ही 'सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय' के सिद्धांत पर काम करती है, जो बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा स्थापित किया गया था। पार्टी का उद्देश्य हमेशा से समाज में सभी वर्गों के हित में काम करना रहा है, और हम किसी भी प्रकार की दूषित और जहरीली राजनीति के खिलाफ हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे घिनौनी और स्वार्थी राजनीति से दूर रहें और देश के माहौल को खराब न करें।
बसपा सुप्रीमो ने अपने बयान में संविधान का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत का संविधान, जो हर भारतीय नागरिक के हित, सुरक्षा और आत्म-सम्मान को सर्वोपरि मानता है, हमें यही सिखाता है कि हर संवैधानिक संस्था को अपनी निर्धारित सीमा के भीतर रहकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने संविधान के आदर्शों पर चलने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि देश में सामूहिक कल्याण की प्रक्रिया को सुचारु रूप से आगे बढ़ाया जा सके। मायावती ने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान किया जाना चाहिए और राजनीतिक नेताओं को अपने भाषणों और कार्यों के जरिए समाज में सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
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