सुप्रीम कोर्ट करूर भगदड़ मामले में डीएमके की याचिका पर सुनवाई को तैयार
खबर सार :-
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को करूर भगदड़ मामले में डीएमके की ओर से दायर अर्जी पर मंगलवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई। इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया था।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को करूर भगदड़ मामले में डीएमके की ओर से दायर अर्जी पर मंगलवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई। इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया था। डीएमके के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी आरएस भारती की ओर से दायर अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की गई। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई मंगलवार को करने पर सहमत हो गया। अर्जी में भारती ने तमिलनाडु के मंत्री आधव अर्जुन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और टीवीके मंत्रियों को करूर भगदड़ से जुड़े सार्वजनिक बयान देने से रोकने के निर्देश देने की मांग की है, जब तक कि कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच पूरी न हो जाए। यह अर्जी 27 सितंबर, 2025 को हुई करूर भगदड़ की घटना से जुड़ी लंबित कार्यवाही में दायर की गई है। इस घटना में टीवीके की रैली के दौरान 41 लोगों की मौत हो गई थी और 142 अन्य घायल हो गए थे।
पिछली डीएमके सरकार को जिम्मेदार ठहराया
डीएमके का आरोप है कि मंत्री आधव अर्जुन, जो इस मामले में आरोपी भी हैं, उनके सार्वजनिक बयानों और पीड़ितों के परिवारों को सरकारी लाभ देने के प्रस्ताव से कोर्ट की निगरानी में चल रही सीबीआई जांच प्रभावित हो सकती है। 2 जुलाई को आधव अर्जुन के भाषण का हवाला देते हुए अर्जी में आरोप लगाया गया कि मंत्री ने सार्वजनिक रूप से कहा कि हिसाब बराबर करना है और करूर त्रासदी के लिए पिछली डीएमके सरकार को जिम्मेदार ठहराया। याचिका के अनुसार, मौजूदा कैबिनेट मंत्री के ऐसे बयान जांच के दौरान पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं और इससे इस न्यायालय की निगरानी में चल रही प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। अर्जी में आगे आरोप लगाया गया कि इस भाषण का मकसद सीबीआई जांच में बाधा डालना और जनता के बीच यह धारणा बनाना था कि डीएमके और उसका नेतृत्व राजनीतिक लाभ के लिए इस घटना के लिए जिम्मेदार थे।
सुप्रीम कोर्ट ने भगदड़ की जांच सीबीआई को सौंप दी
इसमें उन रिपोर्टों का भी जिक्र किया गया जिनके अनुसार मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के करूर जाने की संभावना थी, ताकि भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों को सरकारी लाभ दिए जा सकें। पीड़ित परिवारों के लिए कल्याणकारी उपायों पर कोई आपत्ति न जताते हुए याचिका में कहा गया कि ये परिवार कोर्ट की निगरानी में चल रही सीबीआई जांच में अहम गवाह हैं। ऐसे में, मामले से जुड़े लोगों का उनसे कोई भी सीधा संपर्क जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता और स्वतंत्रता को लेकर आशंकाएं पैदा कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भगदड़ की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। यह कदम तब उठाया गया जब कोर्ट ने मामले को संभालने के तरीके पर चिंता जताई और मद्रास हाई कोर्ट में चल रही कार्यवाही में कुछ गड़बड़ होने की बात कही। जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली एक कमेटी कर रही थी।
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