पश्चिम बंगाल एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई: जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े दूसरे सहयोगी को किया गिरफ्तार
खबर सार :-
पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध हामीम मंडल के दूसरे सहयोगी आदित्य सिंह को हावड़ा से गिरफ्तार किया। जांच में हनी-ट्रैप, ब्लैकमेलिंग और पाकिस्तान स्थित नेटवर्क से जुड़े कई अहम खुलासे हुए हैं।
खबर विस्तार : -
कोलकाताः पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध हामीम मंडल के नेटवर्क पर कार्रवाई तेज करते हुए उसके दूसरे सहयोगी आदित्य सिंह उर्फ राज को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी को सोमवार सुबह हावड़ा स्थित उसके आवास से हिरासत में लिया गया। यह गिरफ्तारी पिछले सप्ताह गिरफ्तार किए गए हामीम मंडल और उसकी सहयोगी अर्पिता सरकार से हुई पूछताछ के आधार पर की गई। जांच एजेंसियों का मानना है कि आदित्य सिंह नेटवर्क का सक्रिय सदस्य था और उसने कई संवेदनशील जानकारियां जुटाने तथा उन्हें आगे पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उसकी गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है।
पूछताछ में सामने आया आदित्य सिंह का नाम
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हामीम मंडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अर्पिता सरकार से पूछताछ के दौरान आदित्य सिंह का नाम सामने आया। इसके बाद एसटीएफ की एक टीम रविवार देर रात उसके घर पहुंची और पूरी रात पूछताछ की। पूछताछ में मिले तथ्यों के आधार पर सोमवार सुबह उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। जांच अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके।
भाजपा विधायक के परिवार की जानकारी जुटाने का आरोप
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आदित्य सिंह ने भाजपा विधायक उमेश राय और उनके परिवार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हामीम मंडल तक पहुंचाई थीं। जांच एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान स्थित आतंकवादी-आपराधिक समूह ‘शहजाद भट्टी नेटवर्क’ (एसबीएन) कथित रूप से हनी-ट्रैप, ब्लैकमेलिंग और जरूरत पड़ने पर अपहरण कर फिरौती वसूलने जैसी गतिविधियों के लिए इन जानकारियों का इस्तेमाल करना चाहता था। सूत्रों का यह भी दावा है कि हाल ही में विधानसभा चुनावों के बाद उमेश राय को मिली धमकी भरी कॉल के पीछे भी आदित्य सिंह की भूमिका होने के संकेत मिले हैं। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की विस्तृत जांच अभी जारी है।
हामीम मंडल और अर्पिता सरकार पहले ही गिरफ्तार
एसटीएफ ने पिछले सप्ताह सबसे पहले पूर्वी बर्धमान जिले के बर्धमान शहर से हामीम मंडल को गिरफ्तार किया था। इसके कुछ घंटे बाद झारखंड के साहिबगंज से उसकी कथित सहयोगी अर्पिता सरकार को भी हिरासत में लिया गया। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने के बाद 14 दिनों की एसटीएफ हिरासत में भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां दोनों से लगातार पूछताछ कर रही हैं और कई डिजिटल तथा वित्तीय पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से जुड़े दस्तावेज बरामद
जांच के दौरान एसटीएफ ने हामीम मंडल के कब्जे से राज्य सरकार के वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा से जुड़े कुछ अहम दस्तावेज बरामद करने का दावा किया है। इनमें मुख्यमंत्री के कार्यक्रम और उनकी आवाजाही से संबंधित दस्तावेज भी शामिल बताए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन दस्तावेजों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन्हें किस उद्देश्य से एकत्र किया गया था और क्या इनके जरिए किसी बड़ी साजिश की तैयारी की जा रही थी।
अर्पिता सरकार की भूमिका भी जांच के दायरे में
राज्य पुलिस के सूत्रों का कहना है कि शुरुआत में अर्पिता सरकार, हामीम मंडल के जरिए पाकिस्तान स्थित नेटवर्क से जुड़ी थी। हालांकि, बाद में कथित हैंडलरों ने मंडल को दरकिनार कर सीधे अर्पिता से संपर्क करना शुरू कर दिया और उसे अलग-अलग निर्देश देने लगे। जांच में यह भी सामने आया है कि अर्पिता ने कथित तौर पर पश्चिम बंगाल के कई प्रभावशाली लोगों से सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क स्थापित किया। एजेंसियों का आरोप है कि उसका उद्देश्य व्यक्तिगत संबंध बनाकर गोपनीय सूचनाएं हासिल करना था। इसी रणनीति के तहत वह सोशल मीडिया पर लगातार रील्स और अन्य आकर्षक सामग्री साझा करती थी।
मोबाइल फोन से मिल रहे अहम सुराग
एसटीएफ ने अर्पिता सरकार के दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इन मोबाइल फोन में मौजूद एन्क्रिप्टेड और कोडेड संदेशों को डिकोड करने के लिए साइबर विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। जांचकर्ताओं का मानना है कि इन डिजिटल साक्ष्यों से पाकिस्तान स्थित कथित हैंडलरों और स्थानीय नेटवर्क के बीच संपर्क के कई अहम सबूत मिल सकते हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि किन-किन लोगों से नियमित संपर्क किया गया था।
कई सोशल मीडिया हैंडल जांच के घेरे में
पूछताछ के दौरान जांच एजेंसियों को ‘राना’, ‘उजैर’, ‘आबिद जाट333’ और ‘हमाद’ नाम के कई सोशल मीडिया हैंडल की जानकारी मिली है। शुरुआती जांच के अनुसार, इन हैंडल्स का संचालन कथित रूप से पाकिस्तान स्थित व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा था। एसटीएफ के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि इन खातों के संचालन के लिए ब्रिटेन और मैक्सिको के सिम कार्ड का इस्तेमाल किया गया था। इससे जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नेटवर्क का संचालन किस स्तर पर और किन देशों के माध्यम से किया जा रहा था।
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