विकसित भारत की रफ्तार को मिलेगी नई उड़ान: राजनाथ सिंह बोले- क्षेत्रीय उद्योग, रक्षा निर्माण और नवाचार ही बनेंगे भारत की सबसे बड़ी ताकत
खबर सार :-
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का संदेश स्पष्ट है कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब क्षेत्रीय उद्योग, स्टार्टअप, एमएसएमई और अत्याधुनिक तकनीक राष्ट्रीय विकास का आधार बनेंगे। रक्षा उत्पादन, सेमीकंडक्टर, एआई और नवाचार में बढ़ती भागीदारी भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ वैश्विक औद्योगिक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगी।
खबर विस्तार : -
Vibrant Gujarat Regional Conference: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में क्षेत्रीय उद्योगों, स्थानीय नवाचारों और तकनीकी क्षमताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत केवल आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य नहीं, बल्कि ऐसा राष्ट्र बनाने का संकल्प है जो आर्थिक रूप से मजबूत, तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप से सशक्त हो। इसके लिए आवश्यक है कि राज्यों और क्षेत्रों की विशेष औद्योगिक क्षमता को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए तथा स्थानीय नवाचारों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप विकसित किया जाए।
वडोदरा में मंगलवार को आयोजित वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने उद्योगपतियों, उद्यमियों, स्टार्टअप प्रतिनिधियों, युवा इनोवेटर्स और शिक्षाविदों से कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक माहौल में भारत की मजबूती उसकी आत्मनिर्भरता, तकनीकी उत्कृष्टता और सामूहिक संकल्प पर निर्भर करेगी। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह तथा गुजरात सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. मनीषा भी मौजूद रहीं।
महान राष्ट्र की नींव के तीन मजबूत स्तंभ-आर्थिक शक्ति, तकनीकी क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा
राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी महान राष्ट्र की नींव तीन मजबूत स्तंभों-आर्थिक शक्ति, तकनीकी क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा-पर टिकी होती है। यदि अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और तकनीक में आत्मनिर्भरता आएगी तो देश की सुरक्षा भी मजबूत होगी। वहीं सुरक्षित वातावरण उद्योगों, निवेश और नवाचार को बढ़ावा देने का सबसे बड़ा आधार बनता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रक्षा क्षेत्र का विकास केवल हथियारों और सैन्य उपकरणों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण औद्योगिक इकोसिस्टम को गति देता है। डिफेंस कॉरिडोर, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर लॉजिस्टिक्स, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) तथा रोजगार सृजन के माध्यम से रक्षा क्षेत्र देश के औद्योगिक विकास का प्रमुख इंजन बनता जा रहा है।
दस वर्षों में भारत के रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव
रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले दस वर्षों में भारत के रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव आया है। जो देश कभी रक्षा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर था, वही आज रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्वदेशी प्लेटफॉर्म, निजी कंपनियों की सक्रिय भागीदारी और स्टार्टअप्स के नवाचारों ने देश में मजबूत रक्षा इकोसिस्टम तैयार किया है। उन्होंने बताया कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत एयरोस्पेस और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मेक इन इंडिया, रक्षा खरीद प्रक्रिया में सुधार, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड, आईडेक्स, सृजन पोर्टल और अन्य सरकारी योजनाओं के माध्यम से एमएसएमई तथा स्टार्टअप्स को नई संभावनाएं मिल रही हैं।
आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से अलग-थलग होना नहीं
राजनाथ सिंह ने आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में देश का रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसी तरह रक्षा निर्यात भी एक हजार करोड़ रुपये से कम के स्तर से बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने इसे भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और नीति सुधारों का परिणाम बताया। रक्षा मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से अलग-थलग होना नहीं है। इसका उद्देश्य भारत को अपनी क्षमताओं के आधार पर इतना मजबूत बनाना है कि वह वैश्विक साझेदारों के साथ समान स्तर पर सहयोग कर सके। सरकार तकनीकी हस्तांतरण, संयुक्त उपक्रमों और विदेशी कंपनियों के साथ सहयोग को भी प्रोत्साहित कर रही है।
रक्षा उत्पादन और उच्च तकनीक विनिर्माण का प्रमुख केंद्र
गुजरात की औद्योगिक क्षमता की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य रक्षा उत्पादन और उच्च तकनीक विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनने की पूरी क्षमता रखता है। वडोदरा में स्थापित टाटा-एयरबस सी-295 विमान निर्माण परियोजना तथा गुजरात में तैयार हो रही के-9 वज्र स्वचालित तोप प्रणाली इसका उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि साणंद और धोलेरा में विकसित हो रहा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई दिशा देगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्रों में गुजरात की भूमिका आने वाले वर्षों में और अधिक महत्वपूर्ण होगी।
रक्षा क्षेत्र में निवेश और नवाचार सर्वोच्च प्राथमिकता
राजनाथ सिंह ने कहा कि राज्य का मजबूत रसायन, पेट्रोकेमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, बंदरगाह और जहाज निर्माण उद्योग रक्षा विनिर्माण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। उन्होंने निजी उद्योगों, एमएसएमई और स्टार्टअप्स के योगदान की सराहना करते हुए रक्षा क्षेत्र में निवेश और नवाचार को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि गुजरात विकसित भारत 2047 और विकसित गुजरात 2047 के लक्ष्य को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
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