'Operation Sindoor' पर सरकार की बेतुकी सफाई; संसद में झूठ बोलने के आरोप पर घिरी मोदी सरकार
खबर सार :-
ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) में जवानों की शहादत छिपाने के आरोप पर केंद्र सरकार ने अजीबोगरीब सफाई दी है। विपक्ष ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस बयान को शहीदों का अपमान बताया है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) में शहीद हुए छह जवानों को लेकर देश का सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है। संसद में दिए गए एक पुराने बयान पर चौतरफा घिरी केंद्र सरकार अब इस पूरे मामले पर ऐसी अजीबोगरीब और बेतुकी सफाइयां पेश कर रही है, जिसने रक्षा विशेषज्ञों से लेकर आम जनता तक को हैरत में डाल दिया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के तीखे हमलों के बाद रक्षा मंत्रालय ने एक स्पष्टीकरण जारी किया है, जिसमें यह अजीब दावा किया गया है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने जब संसद में किसी भी सैनिक की मृत्यु न होने की बात कही थी, तो उनका मतलब केवल 'पायलटों' से था। सरकार की इस दलील को विपक्ष ने हास्यास्पद और शहीदों के सर्वोच्च बलिदान का अपमान करार दिया है।
क्या था रक्षा मंत्री का वह बयान, जिस पर मचा है बवाल?
विवाद की जड़ 28 जुलाई, 2025 को संसद के पटल पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा दिया गया वह आधिकारिक बयान है, जिसमें उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता का गुणगान किया था। उस दौरान रक्षा मंत्री ने गर्व से सदन को आश्वस्त किया था कि इस पूरे ऑपरेशन में भारत के किसी भी सैनिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और न ही किसी की जान गई है।
लेकिन इस बयान के ठीक 13 महीने बाद, जब राजधानी दिल्ली के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर 'ऑपरेशन सिंदूर' में वीरगति को प्राप्त हुए छह जांबाज सैनिकों के नाम अंकित किए गए, तो सच देश के सामने आ गया। यह पहली बार था जब सरकार ने इस ऑपरेशन में हुई शहादत को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया। इसी विरोधाभास ने सरकार की नीयत और कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकार की अजीब दलील: 'सैनिक' का मतलब सिर्फ 'पायलट' था!
चारों तरफ से घिरने के बाद रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर चल रही आलोचनाओं का जवाब देने के लिए जो तर्क खोजा है, वह बेहद हैरान करने वाला है। सरकार ने अपनी सफाई में कहा है कि जब रक्षा मंत्री संसद में बोल रहे थे, तब देश-विरोधी ताकतों और सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैलाई जा रही थी कि भारत के कई लड़ाकू विमानों के पायलट इस ऑपरेशन में मारे गए हैं।
सरकार का कहना है कि रक्षा मंत्री का 'किसी भी सैनिक की मृत्यु नहीं हुई' वाला बयान दरअसल उस समय फैल रहे 'विशिष्ट झूठ' का मुकाबला करने के लिए था। यानी सरकार के मुताबिक, जब राजनाथ सिंह ने 'सैनिक' शब्द का इस्तेमाल किया, तो उनका इरादा केवल पायलटों की सुरक्षा की पुष्टि करना था। इस बेतुके तर्क को लेकर अब सरकार का भारी मजाक उड़ रहा है, क्योंकि थल सेना और वायुसेना के अन्य अंगों में तैनात जवान भी देश के सैनिक ही कहलाते हैं। विपक्ष का कहना है कि क्या पायलटों के अलावा बाकी छह जवानों का बलिदान सरकार की नजर में कोई मायने नहीं रखता था?
कांग्रेस ने साधा निशाना: "जानबूझकर बोला गया झूठ?"
इस बेतुकी सफाई के सामने आते ही कांग्रेस ने सरकार को पूरी तरह आड़े हाथों ले लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने रक्षा मंत्री के इस रवैए पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि सरकार की यह दलील न सिर्फ हास्यास्पद है, बल्कि देश के वीर जवानों का अपमान है। उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल दो ही बातें सच हो सकती हैं- या तो देश के रक्षा मंत्री इतने अक्षम हैं कि उन्हें 13 महीने तक अपने ही छह जवानों की शहादत की खबर नहीं थी, या फिर उन्हें सब कुछ पता था और उन्होंने जानबूझकर संसद और देश की जनता को गुमराह करना चुना। पवन खेड़ा ने कहा कि दोनों ही स्थितियां रक्षा मंत्री की योग्यता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
वहीं कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी सरकार की इस लचर सफाई को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सवाल किया कि देश की संसद में खड़े होकर दिए गए बयान की एक-एक शब्द की महत्ता होती है। क्या देश का रक्षा मंत्री इतना गैर-जिम्मेदार हो सकता है कि वह छह जवानों की शहादत को सिर्फ इसलिए छिपा जाए क्योंकि उस समय चर्चा पायलटों की हो रही थी? उन्होंने इसे सरकार की प्रशासनिक विफलता और सच को दबाने की क्रूर कोशिश करार दिया।
सेना के सम्मान से खिलवाड़ का आरोप
राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि इस तरह की संवेदनशील सैन्य कार्रवाइयों पर सरकार की तरफ से आने वाले विरोधाभासी बयान देश की सुरक्षा एजेंसियों की विश्वसनीयता को प्रभावित करते हैं। विपक्ष का सीधा आरोप है कि सरकार 'ऑपरेशन सिंदूर' की कामयाबी का पूरा राजनीतिक माइलेज तो लेना चाहती थी, लेकिन उसमें हुए नुकसान और शहादत को छिपाकर अपनी पीठ थपथपाने में जुटी थी। अब जब राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर नाम दर्ज होने से सच खुद-ब-खुद सामने आ गया है, तो सरकार 'चुनिंदा संदर्भों' और 'पायलटों की अफवाह' जैसी बचकानी दलीलें देकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रही है।
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