ISRO की बड़ी कामयाबी: सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का 175 टन थ्रस्ट पर सफल टेस्ट, अंतरिक्ष मिशनों की राह आसान
खबर सार :-
इसरो का मानना है कि उन्नत क्रायोजेनिक ऊपरी चरण के साथ इस नए सेमी-क्रायोजेनिक चरण के एकीकरण से LVM3 की क्षमता में बड़ा सुधार होगा। इससे भविष्य में भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण, गहरे अंतरिक्ष मिशनों और भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम को भी मजबूती मिलेगी।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इसरो ने अपने सेमी-क्रायोजेनिक इंजन पावर हेड टेस्ट आर्टिकल (PHTA) का 175 टन थ्रस्ट स्तर पर सफल हॉट टेस्ट पूरा कर लिया है। यह परीक्षण भारत के अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यानों के विकास की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
ISRO ने बताया कैसा रहा परीक्षण
यह परीक्षण हाल ही में तमिलनाडु के महेंद्रगिरी स्थित इसरो प्रणोदन परिसर (IPRC) में किया गया। इस परीक्षण को सेमी-क्रायोजेनिक इंजन विकास कार्यक्रम की श्रृंखला का हिस्सा बताया जा रहा है। यह आठवां सफल हॉट टेस्ट था, जिसमें पावर हेड टेस्ट आर्टिकल का उपयोग किया गया। इस प्रणाली में इंजन के सभी प्रमुख घटक शामिल होते हैं, केवल थ्रस्ट चैंबर को छोड़कर।
इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य प्री-बर्नर इग्निशन के बाद इंजन के प्रदर्शन का विश्लेषण करना और उच्च थ्रस्ट स्तर पर स्थिर संचालन की क्षमता को परखना था। पहली बार इस इंजन को 175 टन थ्रस्ट पर संचालित किया गया, जो इसकी कुल रेटेड क्षमता का लगभग 88 प्रतिशत है। इससे पहले इसरो ने क्रमशः 94 टन (47 प्रतिशत) और 120 टन (60 प्रतिशत) थ्रस्ट स्तर पर भी सफल परीक्षण किए थे।
नवीनतम परीक्षण के दौरान इंजन के मुख्य टर्बोपंपों ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और डिजाइन के अनुरूप 400 से 500 बार तक आउटलेट दबाव प्रदान किया। इसरो के अनुसार, परीक्षण के दौरान सभी तकनीकी पैरामीटर निर्धारित सीमा के भीतर रहे और पूरी प्रक्रिया पूर्वानुमान के अनुरूप सफल रही।
रॉकेट के भार क्षमता में होगी वृद्धि
इस सफल परीक्षण ने इसरो को 200 टन के पूर्ण रेटेड थ्रस्ट स्तर पर इंजन परीक्षण की दिशा में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि भारत के स्वदेशी सेमी-क्रायोजेनिक इंजन कार्यक्रम को पूर्णता की ओर एक बड़ा कदम है।
सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का उपयोग 2,000 किलोन्यूटन श्रेणी के एलई2000 इंजन में किया जाएगा, जो सेमी-क्रायोजेनिक प्रणोदन चरण (SC120) का हिस्सा होगा। यह नया प्रणोदन चरण भारत के सबसे भारी प्रक्षेपण यान LVM3 (लॉन्च व्हीकल मार्क-3) के मौजूदा L110 लिक्विड कोर स्टेज को प्रतिस्थापित करने के लिए विकसित किया जा रहा है।
इस अपग्रेड से रॉकेट की भार वहन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। साथ ही, इसकी समग्र दक्षता और परिचालन प्रदर्शन में भी सुधार होगा। यह तकनीक पारंपरिक प्रणोदन प्रणालियों की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल मानी जाती है, क्योंकि इसमें तरल ऑक्सीजन (LOX) और शुद्ध केरोसिन (जिसे इसरोसीन कहा जाता है) जैसे गैर-विषैले ईंधनों का उपयोग किया जाता है।
यह सफलता न केवल भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में इसरो और अधिक जटिल और महत्वाकांक्षी मिशनों को अंजाम देने में सक्षम होगा।
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