नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने देश में श्रम सुधारों की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) को पूरी तरह से लागू कर दिया है। सरकार ने इन संहिताओं के तहत बनाए गए सभी नियमों को आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित कर दिया है, जिसके बाद अब नया श्रम कानून ढांचा पूरे देश में प्रभावी हो गया है। यह सुधार लंबे समय से लंबित था और पहली बार लागू किए जाने के लगभग पांच साल बाद इसे पूर्ण रूप से क्रियान्वित किया गया है।
चारों श्रम संहिताओं में वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता 2020 शामिल हैं। ये सभी 21 नवंबर 2025 से लागू हो चुकी थीं, लेकिन इनके नियम अधिसूचित न होने के कारण कई प्रावधान पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पा रहे थे। अब नियमों के प्रकाशन के साथ ही देश में एकीकृत और आधुनिक श्रम व्यवस्था लागू हो गई है।
सरकार का कहना है कि इन श्रम संहिताओं को 29 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर एक सरल, पारदर्शी और प्रभावी ढांचा बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इससे न केवल श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि उद्योगों के लिए भी नियमों का अनुपालन आसान होगा।
श्रम मंत्रालय के अनुसार, पहले कुछ प्रावधान इसलिए लागू नहीं हो पाए थे क्योंकि उनसे संबंधित विस्तृत नियमों को अधिसूचित नहीं किया गया था। अब सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं और नई व्यवस्था को पूरी तरह लागू कर दिया गया है।
इससे पहले मई में श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने 40 वर्ष और उससे अधिक उम्र के कर्मचारियों के लिए देशव्यापी वार्षिक स्वास्थ्य जांच अभियान शुरू किया था, जिसके तहत श्रमिकों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जा रही है। नए प्रावधानों के तहत अब 40 वर्ष से ऊपर के सभी कर्मचारियों का हर वर्ष मुफ्त स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।
सरकार ने दावा किया है कि नए श्रम सुधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस गारंटी को दर्शाते हैं, जिसमें श्रमिकों के लिए सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां, सामाजिक सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
नए कानूनों में पुरुष और महिला कर्मचारियों के लिए समान वेतन का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया है। महिलाओं को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा भी प्रदान की गई है।
इसके अलावा, नौकरी गंवाने वाले कर्मचारियों को पुनः कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय री-स्किलिंग फंड बनाने का भी प्रावधान किया गया है। इससे श्रमिकों के लिए नए रोजगार अवसरों का मार्ग प्रशस्त होगा।
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