जनगणना कार्य में शिक्षकों की तैनाती पर कलकत्ता हाई कोर्ट सख्त, फैसला सुरक्षित

खबर सार :-

कलकत्ता हाई कोर्ट ने जनगणना कार्य में शिक्षकों की तैनाती पर नाराजगी जताई और फैसला सुरक्षित रखा। जानिए कैसे शिक्षकों की ड्यूटी से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
कलकत्ता हाई कोर्ट की सख्ती: शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी पर फैसला सुरक्षित

खबर विस्तार : -

कोलकाता : सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने का मुद्दा एक बार फिर तूल पकड़ गया है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति कृष्ण राव की पीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत की यह टिप्पणी कि "शिक्षकों का मुख्य काम पढ़ाना है, उन्हें या तो जनगणना में लगाइए या फिर पढ़ाने दीजिए," शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की प्राथमिकता को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।

शिक्षकों की कमी और बाधित होती शिक्षा

न्यायमूर्ति राव ने मामले की सुनवाई के दौरान अधिकारियों से स्पष्ट पूछा कि जब शिक्षकों पर छात्रों को पढ़ाने की प्राथमिक जिम्मेदारी है, तो उन्हें जनगणना कार्य में क्यों उलझाया जा रहा है। शिक्षक संगठनों का आरोप है कि बड़ी संख्या में शिक्षकों की तैनाती से स्कूलों में शिक्षण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ‘प्राइमरी टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन’ के राज्य सचिव भास्कर घोष ने तर्क दिया कि सुबह 10:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक कक्षाओं में पढ़ाने के बाद शिक्षकों के लिए जनगणना का अतिरिक्त बोझ उठाना न केवल मानसिक रूप से थका देने वाला है, बल्कि व्यावहारिक रूप से भी कठिन है। बरसात के मौसम में स्कूलों के बाद अलग-अलग इलाकों में जाकर सर्वे करना शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

सरकारी अधिसूचना पर उठ रहे सवाल

विवाद के बीच, बुधवार को राज्य सरकार ने हाई कोर्ट को जानकारी दी कि 3 अगस्त को जारी वह विवादित अधिसूचना वापस ली जा रही है, जिसमें स्कूल के समय के बाद जनगणना कार्य कराने का निर्देश दिया गया था। सरकार ने नई अधिसूचना के तहत इसे एक आधिकारिक ‘ड्यूटी’ के रूप में परिभाषित करने का प्रयास किया है। हालांकि, शिक्षक संगठनों का कहना है कि ड्यूटी का नाम देने मात्र से काम का बोझ कम नहीं हो जाता। वहीं, दूसरी ओर भाजपा प्राथमिक शिक्षक प्रकोष्ठ के संयोजक असित मंडल का मानना है कि जनगणना देशहित का काम है, जिसमें सभी को सहयोग करना चाहिए, भले ही यह शिक्षकों के लिए अतिरिक्त भार क्यों न हो।

डीएलएड प्रशिक्षुओं को राहत की उम्मीद

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि जो शिक्षक वर्तमान में डीएलएड (D.El.Ed) प्रशिक्षण ले रहे हैं, उन्हें जनगणना के कार्य से पूरी तरह मुक्त रखा जाना चाहिए। अदालत का मानना है कि प्रशिक्षण काल के दौरान शिक्षकों को जनगणना कार्य में झोंकना उनकी पढ़ाई और योग्यता निखारने की प्रक्रिया को बाधित करेगा। कलकत्ता हाई कोर्ट पूर्व में भी सरकार को सुझाव दे चुका है कि जनगणना के लिए थोक में शिक्षकों को भेजने के बजाय सीमित संख्या में तैनाती की जाए, ताकि बच्चों की शिक्षा की निरंतरता बनी रहे। अब सभी की निगाहें न्यायमूर्ति राव के सुरक्षित रखे गए अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो राज्य में शिक्षकों की कार्यप्रणाली और शिक्षा विभाग की नीति के लिए नजीर बन सकता है।

यह भी पढ़ेंः-  पश्चिम बंगाल में भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी, जोड़ाबागान में मकान ढहने से वृद्धा की मौत

अन्य प्रमुख खबरें