मुंबईः रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई ने भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण आंकड़े पेश किए हैं, जिसके अनुसार, विदेशों में काम कर रहे भारतीयों ने अपने घर पैसा भेजने का नया रिकॉर्ड बनाया है। आंकड़ों में वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीयों के विदेश से धन भेजने के मामले में 14 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है, जिसकी वजह से विदेशों से आने वाले धन का आंकड़ा रिकॉर्ड 135.46 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 में प्राइवेट ट्रांसफर के अंतर्गत वर्गीकृत इनफ्लो भारत के ग्रॉस करंट अकाउंट फ्लो एक ट्रिलियन डॉलर के 10 प्रतिशत से अधिक था। विदेशों में कार्यरत भारतीयों द्वारा प्रेषित धन, जिसमें पर्सनल ट्रांसफर रिसिप्ट प्रतिनिधित्व करता है, वह आंकड़ा वित्तीय वर्ष 2024-25 की जनवरी-मार्च तिमाही में बढ़कर 33.9 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि में 31.3 बिलियन डॉलर दर्ज किया गया था। विदेश में काम करने वाले भारतीयों ने 2024 में रिकॉर्ड 129.4 बिलियन डॉलर अपने घर भेजे थे, जिसमें अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 36 बिलियन डॉलर भेजा गया था। यह अब तक का सबसे अधिक इनफ्लो बताया जा रहा है।
दुनिया के सभी प्रमुख देशों में भारतीय नागरिक नौकरी के सिलसिले में हैं। इसलिए उनकी तरफ से लगातार अपने घरों को पैसे भेजे जाते हैं। इस संबंध में विश्व बैंक के अर्थशास्त्रियों ने आंकड़ा इकट्ठा किया है, जिसके अनुसार, भारत 2024 में रेमिटेंस के लिए प्राप्तकर्ता देशों की सूची में 129.4 बिलियन डॉलर के साथ सबसे ऊपर है। जबकि मेक्सिको 68 बिलियन डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है। चीन 48 बिलियन डॉलर के साथ तीसरे स्थान पर है। इसके अलावा 40 बिलियन डॉलर के साथ फिलीपींस चौथे और 33 बिलियन डॉलर के साथ पाकिस्तान का पांचवां स्थान है।
विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 2024 कैलेंडर वर्ष में रेमिटेंस की वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। जबकि, 2023 में यह वृद्धि दर 1.2 प्रतिशत दर्ज की गई थी। विदेशों में काम करने वाले भारतीयों की संख्या देखें, तो वर्ष 1990 में 6.6 मिलियन थी, जो 2024 में बढ़कर 18.5 मिलियन हो गई है, जबकि इसी अवधि के दौरान वैश्विक प्रवासियों में उनकी हिस्सेदारी 4.3 प्रतिशत से बढ़कर 6 प्रतिशत से अधिक हो गई है। खाड़ी देशों में भारतीय प्रवासियों की संख्या दुनिया भर में कुल भारतीय प्रवासियों का लगभग आधा है।
कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के उच्च आय वाले देशों में नौकरी बाजारों की रिकवरी, रेमिटेंस का मुख्य चालक रही है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए विशेष रूप से सच है, जहां विदेशी मूल के श्रमिकों का रोजगार लगातार बढ़ रहा है। यह आंकड़ा फरवरी 2020 में देखे गए महामारी-पूर्व स्तर से 11 प्रतिशत अधिक है। इस बीच, अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों और भारत में पैसा भेजने वाले एनआरआई को बड़ी राहत देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ के अपडेटेड ड्राफ्ट ने रेमिटेंस पर कर की दर को घटाकर एक प्रतिशत कर दिया है, जो कि शुरूआत में प्रस्तावित दर 5 प्रतिशत से काफी कम है।
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