ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और एफपीआई की बिकवाली से दबाव, आरबीआई की सख्ती पर भी बाजार की नजर

खबर सार :-

कमजोर वैश्विक संकेत, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और एफपीआई की बिकवाली से भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ा। सेंसेक्स 492 अंक टूटा, जबकि निफ्टी भी 0.67% फिसला। निवेशकों की नजर अब आरबीआई नीति और वैश्विक रुख पर रहेगी।
कमजोर ग्लोबल संकेतों का असर, सेंसेक्स 492 अंक टूटा; निफ्टी भी फिसला

खबर विस्तार : -

Indian stock market: कमजोर वैश्विक संकेतों और लगातार बढ़ती बॉन्ड यील्ड के बीच भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को दूसरे कारोबारी सत्र में भी दबाव देखने को मिला। प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी 50 शुरुआत में लगभग सपाट रहे, लेकिन कुछ ही देर बाद दोनों सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की नजर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति के प्रभाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली पर बनी हुई है।

कारोबार की शुरुआत में निफ्टी 50 22,599.05 के स्तर पर खुला, जो पिछले बंद भाव से करीब 4 अंक यानी 0.02 प्रतिशत नीचे था। वहीं बीएसई सेंसेक्स 72,668 के स्तर पर खुला और शुरुआती कारोबार में 29.30 अंकों की मामूली बढ़त दर्ज की है। हालांकि, शुरुआती मजबूती ज्यादा देर नहीं टिक सकी। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 492 अंक यानी 0.67 प्रतिशत टूटकर 72,175.95 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह निफ्टी 50 ने 22,445.70 का इंट्रा-डे लो छुआ, जो 153.35 अंक यानी 0.67 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है।

सेक्टोरल मोर्चे पर बाजार को राहत

सेक्टोरल मोर्चे पर कुछ चुनिंदा क्षेत्रों ने बाजार को राहत दी। निफ्टी आईटी, निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सूचकांकों में रहे और इनमें 0.59 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज हुई। मेटल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और केमिकल्स सेक्टर में भी हल्की मजबूती देखने को मिली। इसके उलट निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (एक्स-बैंक) और निफ्टी एफएमसीजी दबाव में रहे और इनमें 0.38 प्रतिशत तक की गिरावट आई। ऑटो शेयरों में भी कमजोरी का रुख देखने को मिला।

ये भी पढ़ें.....महंगाई के डर से RBI का बड़ा दांव, रेपो रेट 5.50% हुआ; कर्ज और EMI पर बढ़ेगा बोझ

इक्विटी बाजार के वैल्यूएशन पर दबाव

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, आरबीआई के 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' रुख और रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद इक्विटी बाजार के वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ सकता है। ऊंची ब्याज दरों के चलते फिक्स्ड इनकम निवेश अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक हो सकते हैं। ऐसे माहौल में फार्मास्यूटिकल्स जैसे अपेक्षाकृत कम ब्याज-दर संवेदनशील क्षेत्रों में निवेशकों की रुचि बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ऊंचे वैल्यूएशन के बावजूद ग्रोथ स्टॉक्स में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है, जबकि वैल्यू स्टॉक्स का प्रदर्शन फिलहाल अपेक्षाकृत कमजोर रहा है।

एफपीआई में बिकवाली का जोर

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के 5.3 प्रतिशत से ऊपर बने रहने से बड़े शेयरों पर दबाव कायम रह सकता है। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से 6,121 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 4,596 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ सहारा दिया। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, बाजार फिलहाल कंसोलिडेशन के दौर में प्रवेश कर सकता है। निफ्टी के लिए 22,439 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि ऊपर की ओर 23,100 का लक्ष्य व्यापक दृष्टिकोण में बरकरार है। वैश्विक स्तर पर भी निवेशकों का रुख सतर्क है। ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती और भू-राजनीतिक तनावों ने बाजार धारणा को प्रभावित किया है। एशियाई बाजारों में भी गुरुवार को मिला-जुला रुख देखने को मिला।

ये भी पढ़ें.....ग्लोबल संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स-निफ्टी चढ़े; प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में जोरदार खरीदारी

FAQ (पूछे जाने वाले सवाल)....

1. सेंसेक्स में कितनी गिरावट दर्ज की गई?

सेंसेक्स 492 अंक यानी 0.67 प्रतिशत टूटकर 72,175.95 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया।

2. निफ्टी में गिरावट की प्रमुख वजह क्या रही?

कमजोर वैश्विक संकेत, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने निफ्टी पर दबाव बनाया।

3. निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट स्तर कौन-सा है?

तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 22,439 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 23,100 का स्तर ऊपर की ओर अहम लक्ष्य है।

अन्य प्रमुख खबरें