महंगाई के डर से RBI का बड़ा दांव, रेपो रेट 5.50% हुआ; कर्ज और EMI पर बढ़ेगा बोझ

खबर सार :-

आरबीआई ने महंगाई और वैश्विक जोखिमों के बीच रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% किया। महंगे तेल, कमजोर मानसून और खाद्य कीमतों से चिंता बढ़ी है, लेकिन FY27 के लिए 7.1% GDP ग्रोथ अनुमान से अर्थव्यवस्था पर भरोसा कायम है।
महंगाई का वार: RBI ने बढ़ाया रेपो रेट, कर्ज-EMI पर बढ़ेगा बोझ

खबर विस्तार : -

RBI MPC Repo Rate: महंगाई के बढ़ते दबाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर दी है। बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक के बाद केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब आरबीआई ने रेपो दर में बढ़ोतरी की है।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय एमपीसी ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है, जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। केंद्रीय बैंक ने महंगाई के बढ़ते जोखिम और आपूर्ति पक्ष की चुनौतियों को देखते हुए नीतिगत दरों को फिर से संतुलित करना जरूरी माना है।

महंगे होंगे लोन, EMI पर बढ़ सकता है बोझ

रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर बैंकों की फंडिंग लागत पर पड़ सकता है। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना है। नतीजतन नए कर्ज लेने वालों के साथ-साथ फ्लोटिंग रेट वाले मौजूदा ग्राहकों की ईएमआई भी बढ़ सकती है। आरबीआई ने रेपो रेट के अलावा अन्य प्रमुख दरों में भी बदलाव किया है। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर को 5.25 प्रतिशत किया गया है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) दर और बैंक रेट को बढ़ाकर 5.75 प्रतिशत कर दिया गया है।

महंगाई का नया अनुमान 5.2%, आगे और दबाव की आशंका

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सीपीआई आधारित महंगाई का अनुमान 5.2 प्रतिशत रखा है। गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, महंगाई का परिदृश्य पिछले साल की तुलना में अब उतना अनुकूल नहीं है। खाद्य और ऊर्जा कीमतों में तेजी के साथ आपूर्ति पक्ष के जोखिम भी बढ़े हैं। आरबीआई ने दूसरी तिमाही में महंगाई 4.9 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही के लिए महंगाई का अनुमान 5.6 प्रतिशत रखा गया है, जबकि चालू वित्त वर्ष के लिए कोर महंगाई का अनुमान 4.4 प्रतिशत है। अगस्त में सीपीआई महंगाई 4.5 प्रतिशत से बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई। खाद्य और ईंधन कीमतों में तेजी इसका प्रमुख कारण रही। आरबीआई के मुताबिक चीनी और प्याज जैसी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते खाद्य महंगाई का दबाव अब कुछ चुनिंदा वस्तुओं तक सीमित नहीं रह गया है। कोर महंगाई भी बढ़ी है, जिससे मूल्य वृद्धि का दबाव अर्थव्यवस्था के दूसरे हिस्सों में फैलने के संकेत मिले हैं।

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मानसून, अल नीनो और तेल ने बढ़ाई चिंता

आरबीआई ने आने वाले महीनों में महंगाई के लिए कई जोखिम गिनाए हैं। कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून, अल नीनो की स्थिति, ऊंची ऊर्जा कीमतें और अन्य कमोडिटी की कीमतों में मजबूती महंगाई को और बढ़ा सकती है। केंद्रीय बैंक के अनुसार अगस्त में सीपीआई बास्केट की करीब 37 प्रतिशत वस्तुओं की महंगाई 4 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई, जो बढ़ते व्यापक दबाव का संकेत है। गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति के दोबारा बढ़ने की आशंका है। ऐसे में कई प्रमुख केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति को सख्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। पश्चिम एशिया का तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अतिरिक्त चुनौती बनी हुई है।

GDP पर RBI का भरोसा कायम, 7.1% वृद्धि का अनुमान

महंगाई पर सख्ती के बावजूद आरबीआई ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास क्षमता पर भरोसा जताया है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.1 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि दर्ज की। आरबीआई ने दूसरी तिमाही में 7.2 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.8 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए भी 7.1 प्रतिशत ग्रोथ का अनुमान रखा गया है। गवर्नर ने कहा कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत बनी हुई हैं। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में कारोबारी गतिविधियां विस्तार के क्षेत्र में हैं। घरेलू मांग और निवेश भी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं।

बढ़ता व्यापार घाटा और FDI से जुड़े संकेत

भारत का व्यापार घाटा जुलाई और अगस्त में बढ़कर 58.7 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 55.1 अरब डॉलर था। आरबीआई के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक सामान और कच्चे तेल के आयात ने घाटे को बढ़ाने में भूमिका निभाई। वैश्विक व्यापार वृद्धि में नरमी, महंगी ऊर्जा और व्यापार नीति से जुड़ी अनिश्चितता चालू खाते के लिए जोखिम बने हुए हैं। हालांकि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मोर्चे पर राहत मिली है। वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में शुद्ध एफडीआई बढ़कर 13.8 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 9.6 अरब डॉलर था। कुल मिलाकर आरबीआई का ताजा फैसला महंगाई के खिलाफ केंद्रीय बैंक की सख्त रणनीति को दर्शाता है। अब बाजार और आम लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि रेपो रेट बढ़ोतरी का असर कर्ज की लागत, ईएमआई, मांग और आने वाले महीनों की महंगाई पर कितना पड़ता है।

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FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य सवाल)...

1.RBI ने रेपो रेट कितने बेसिस पॉइंट बढ़ाया है?

RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है।

2. रेपो रेट बढ़ने से आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

बैंकों की कर्ज लागत बढ़ने से होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। इससे फ्लोटिंग रेट वाले लोन की EMI भी महंगी हो सकती है।

3.RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP और महंगाई का क्या अनुमान लगाया है?

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 में वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत और CPI आधारित महंगाई 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

 

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