नई दिल्लीः केंद्र सरकार की आत्मनिर्भर भारत योजना और किसानों की आय बढ़ाने की कोशिशें रंग ला रही हैं। सरकार की ओर से खाद और बीज पर किसानों को दी जा रही सब्सिडी, समर्थन मूल्य निर्धारण और तकीनीकी खेती को बढ़ावा देने का असर खाद्यान्न उत्पादन पर भी दिख रहा है। आंकड़ों पर गौर करें, तो पिछले छह वर्षों में खुदरा महंगाई दर मार्च महीने में सबसे निचले स्तर 3.34 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इसके साथ ही अदरक, टमाटर, फूलगोभी, जीरा और लहसुन जैसे कई खाद्य पदार्थों की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक घरों में रोजाना इस्तेमाल होने वाली अदरक, लहसुन और टमाटर की कीमतों में काफी कमी आई है। सालाना आधार पर खाद्य पदार्थों की कीमतें देखें तो अदरक की कीमत में 38.11 प्रतिशत की गिरावट आई है। टमाटर की कीमत में 34.96 प्रतिशत, फूलगोभी की कीमत में 25.99 प्रतिशत, खाने वाले जीरा की कीमत में 25.86 प्रतिशत और लहसुन की कीमत में 25.22 प्रतिशत की गिरावट आई है। दूसरी तरफ मौसमी फलों में अंगूर की कीमत में 25.55 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार मार्च 2025 में जिन उत्पादों की कीमतों में वृद्धि हुई है, उनमें 56.81 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ नायिरल तेल की महंगाई दर शीर्ष पर है। नारियल के तेल की कीमतों में 42.05 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
आभूषणों की बात करें, तो सोना की कीमत में 34.09 प्रतिशत और चांदी की कीमत में 31.57 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। मार्च 2025 की बात करें, तो हेल्थ सेगमेंट में महंगाई दर 4.26 प्रतिशत थी, जो कि फरवरी में 4.12 प्रतिशत थी। इसी प्रकार शहरी क्षेत्रों में हाउसिंग महंगाई दर बढ़कर 3.03 प्रतिशत हो गई है, जो कि फरवरी में 2.91 प्रतिशत तक थी।
परिवहन और संचार कैटेगरी में महंगाई दर पहले की अपेक्षा काफी बढ़ गई है। परिवहन और संचार वर्ग में देखें तो फरवरी में महंगाई दर 2.93 प्रतिशत थी, जो कि मार्च 2025 में बढ़कर 3.30 प्रतिशत हो गई है। फ्यूल और लाइट कैटेगरी में महंगाई दर फरवरी में 1.33 प्रतिशत से बढ़कर मार्च में 1.48 प्रतिशत हो गई, जिसमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महंगाई का असर दिख रहा है। यही नहीं शिक्षा से जुड़ी वस्तुओं के महंगाई दर में भी इजाफा हुआ है। मार्च में महंगाई दर 3.98 प्रतिशत हो गई है, जबकि फरवरी में यह 3.83 प्रतिशत थी।
हालांकि, आंकड़ों पर गौर करें तो खुदरा महंगाई दर वित्त वर्ष 2024-25 में कम होकर 4.6 प्रतिशत हो गई है। यह वित्त वर्ष 2018-19 के बाद महंगाई दर में होने वाली बढ़ोत्तरी का सबसे कम स्तर का आंकड़ा है।खाद्य महंगाई मार्च 2025 में कम होकर 2.69 प्रतिशत हो गई है और यह नवंबर 2021 के बाद खाद्य महंगाई का सबसे निचला स्तर है। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्र में खाद्य महंगाई दर 2.82 प्रतिशत थी, जबकि शहरी क्षेत्र में खाद्य महंगाई दर 2.48 प्रतिशत रिकॉर्ड की गई थी।
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