Crude Oil Price surge : वैश्विक ऊर्जा बाजार में शुक्रवार को फिर से हलचल देखने को मिली, जब कच्चे तेल की कीमतों में 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, विशेष रूप से Hormuz Strait में संभावित बाधा ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
हालांकि United States और Iran के बीच दो सप्ताह के सीजफायर की घोषणा की गई थी, लेकिन हालात अभी भी स्थिर नहीं हैं। Saudi Arabia के ऊर्जा ढांचे पर हालिया हमलों और Israel द्वारा Lebanon में जारी सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्रीय तनाव को और गहरा कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.13 प्रतिशत बढ़कर 97.01 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं, डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड 1.39 प्रतिशत की तेजी के साथ 99.24 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता देखा गया। यह तेजी ऐसे समय आई है जब कुछ ही दिन पहले तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई थी। बुधवार को कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे यह 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया था। फरवरी के अंत से यह स्तर बना हुआ था।
भारत में भी इसका असर साफ दिखाई दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 20 अप्रैल डिलीवरी वाले क्रूड ऑयल फ्यूचर्स में 2.43 प्रतिशत की तेजी आई। यह 217 रुपए बढ़कर 9,150 रुपए प्रति बैरल के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जारी रहता है, तो भारतीय बाजार में भी ऊर्जा कीमतों का दबाव बना रहेगा, जिससे महंगाई पर असर पड़ सकता है।
Hormuz Strait दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस क्षेत्र में शिपिंग गतिविधियां सामान्य स्तर के 10 प्रतिशत से भी कम रह गई हैं। कई शिपिंग कंपनियां तब तक जहाज भेजने से बच रही हैं जब तक सीजफायर की शर्तों पर स्पष्टता नहीं आ जाती। इससे सप्लाई चेन बाधित हो रही है।
इस बीच, Donald Trump ने चेतावनी दी है कि यदि सीजफायर का उल्लंघन होता है, तो बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसकी संभावना फिलहाल कम है। उन्होंने दोहराया कि Iran को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और Hormuz Strait को हर हाल में खुला रखा जाएगा।
Asian Development Bank (ADB) ने कहा है कि निकट भविष्य में तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। हालांकि, यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो धीरे-धीरे बाजार स्थिर हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं और किसी भी नई घटना का सीधा असर कीमतों पर पड़ रहा है।
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