साइबर जंग की नई तैयारी: China-Russia समेत दुश्मनों से मुकाबले को US करेगा Cyber Agency का पुनर्गठन
खबर सार :-
बढ़ते साइबर खतरों के बीच अमेरिका का सीआईएसए के पुनर्गठन का फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों की भर्ती, आधुनिक तकनीक, निजी क्षेत्र के सहयोग और एआई आधारित सुरक्षा रणनीति के जरिए अमेरिका भविष्य के डिजिटल खतरों से निपटने की व्यापक तैयारी कर रहा है, जिसका वैश्विक साइबर सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।
खबर विस्तार : -
US Cybersecurity: बढ़ते साइबर हमलों और वैश्विक डिजिटल खतरों के बीच अमेरिका अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत करने की तैयारी में जुट गया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने स्पष्ट किया है कि सरकार साइबर सुरक्षा एवं इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा एजेंसी (सीआईएसए) का व्यापक पुनर्गठन करेगी, ताकि चीन, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों से उत्पन्न हो रहे जटिल साइबर खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।
सरकारी नेटवर्क और निजी कंपनियों पर साइबर हमलों की कोशिश
अमेरिकी गृह सुरक्षा सचिव मार्कवेन मुलिन ने हाउस एप्रोप्रिएशन सब-कमेटी के समक्ष गवाही देते हुए कहा कि वर्तमान समय में साइबर सुरक्षा केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी कंपनियों, वित्तीय संस्थानों, ऊर्जा नेटवर्क, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा भी इससे जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के विरोधी देश लगातार सरकारी नेटवर्क और निजी कंपनियों पर साइबर हमलों की कोशिश कर रहे हैं।

साइबर सुरक्षा एवं इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा एजेंसी का महत्व
मुलिन ने कहा कि साइबर सुरक्षा एवं इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा एजेंसी देश की डिजिटल सुरक्षा का सबसे अहम स्तंभ है। यह एजेंसी सरकारी नेटवर्क, महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर और निजी क्षेत्र को विदेशी साइबर हमलों से बचाने में केंद्रीय भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि एजेंसी को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप फिर से मजबूत बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है। गृह सुरक्षा सचिव ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों में सीआईएसए अपनी मूल दिशा से भटक गई थी और उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि एजेंसी की प्रतिष्ठा भी कमजोर हुई क्योंकि वह अपनी पूरी क्षमता और अधिकारों का प्रभावी उपयोग नहीं कर पा रही थी। अब प्रशासन इसे नई सोच, आधुनिक तकनीक और कुशल नेतृत्व के साथ फिर से खड़ा करना चाहता है।
अनुभवी अधिकारियों और साइबर विशेषज्ञों की नियुक्ति
गृह सुरक्षा सचिव ने बताया कि सरकार एजेंसी में अनुभवी अधिकारियों और साइबर विशेषज्ञों की नियुक्ति करेगी। इसके साथ ही नया नेतृत्व भी तैयार किया जा रहा है, जो तेजी से बदलती डिजिटल चुनौतियों के अनुरूप एजेंसी का संचालन करेगा। मुलिन ने कहा कि उनका लक्ष्य केवल औसत स्तर की साइबर सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना नहीं, बल्कि अमेरिका को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में विश्व का अग्रणी देश बनाना है। सुनवाई के दौरान उन्होंने बताया कि डीएचएस के आकलन के अनुसार सीआईएसए वर्तमान में अपनी वास्तविक आवश्यकता के लगभग आधे कर्मचारियों के साथ काम कर रही है। हालांकि सभी पुराने कर्मचारियों की वापसी जरूरी नहीं है, लेकिन लगभग 600 नए विशेषज्ञों और अनुभवी कर्मचारियों की नियुक्ति की आवश्यकता महसूस की गई है। इससे एजेंसी की तकनीकी क्षमता और प्रतिक्रिया प्रणाली दोनों को मजबूती मिलेगी।
एजेंसी का पुनर्गठन एक लंबी प्रक्रियाः लगभग 12 महीने का समय
मुलिन ने कहा कि एजेंसी का पुनर्गठन एक लंबी प्रक्रिया होगी। उन्होंने अनुमान जताया कि नए निदेशक की नियुक्ति के बाद सीआईएसए को पूरी तरह पुनर्गठित करने में लगभग 12 महीने का समय लग सकता है। इस दौरान संगठनात्मक ढांचे, तकनीकी संसाधनों और कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि साइबर सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। निजी क्षेत्र और सरकार के बीच मजबूत साझेदारी समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मेटा, गूगल या अन्य तकनीकी कंपनियां अकेले वैश्विक साइबर हमलों का मुकाबला नहीं कर सकतीं। इसके लिए सरकार, निजी उद्योग और सुरक्षा एजेंसियों को साझा रणनीति के तहत मिलकर काम करना होगा।

गृह सुरक्षा विभागः आंतरिक नियमों और प्रक्रियाओं की भी समीक्षा
गृह सुरक्षा विभाग अपने आंतरिक नियमों और प्रक्रियाओं की भी समीक्षा कर रहा है ताकि साइबर ऑपरेशन में बाधा बनने वाली अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समाप्त किया जा सके। इससे साइबर हमलों के दौरान त्वरित निर्णय लेने और जवाबी कार्रवाई करने में आसानी होगी। मुलिन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तेजी से विकसित हो रही साइबर तकनीकों ने नई कानूनी और परिचालन संबंधी चुनौतियां पैदा कर दी हैं। ऐसे में भविष्य में कांग्रेस से अतिरिक्त कानूनी दिशा-निर्देश और आवश्यक अधिकार भी मांगे जा सकते हैं, ताकि नई तकनीकों से जुड़े जोखिमों का प्रभावी समाधान किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर सुरक्षा अब राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। बिजली ग्रिड, बैंकिंग नेटवर्क, अस्पताल, संचार व्यवस्था और सरकारी संस्थानों पर लगातार उन्नत साइबर हमलों का खतरा बढ़ रहा है। यही कारण है कि अमेरिका अपनी डिजिटल सुरक्षा रणनीति को लगातार मजबूत कर रहा है। अमेरिका ने भारत सहित अपने सहयोगी देशों के साथ भी साइबर सुरक्षा सहयोग को लगातार विस्तार दिया है। महत्वपूर्ण तकनीकों की सुरक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती और सरकार प्रायोजित साइबर हमलों का मुकाबला करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भविष्य की रणनीति का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
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