बोलीविया में आर्थिक संकट गहराया! उग्र विरोध-प्रदर्शनों से बिगड़े हालात, राष्ट्रपति ने लगाया आपातकाल

खबर सार :-
दक्षिण अमेरिकी देश बोलीविया में महंगाई, ईंधन संकट जैसी समस्याओं के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी है। देश इस समय गंभीर आर्थिक संकटों से जूझ रहा है।
बोलीविया में आर्थिक संकट गहराया! उग्र विरोध-प्रदर्शनों से बिगड़े हालात, राष्ट्रपति ने लगाया आपातकाल
खबर विस्तार : -

ला पाज: दक्षिण अमेरिकी देश बोलीविया में कई हफ्तों से चल रहे सरकार-विरोधी प्रदर्शनों और सड़कों पर नाकेबंदी के बीच राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज ने शनिवार को आपातकाल की घोषणा की, जो अगले आदेश तक लागू रहेगा।

तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलु और अन्य मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट के अनुसार, मजदूर संघों, किसान संगठनों और पूर्व राष्ट्रपति इवो मोरालेस के समर्थकों के नेतृत्व में हो रहे इन प्रदर्शनों में राष्ट्रपति पाज के इस्तीफे की मांग की जा रही है।

भोजन, ईंधन और दवाओं की कमी

प्रदर्शनकारी बढ़ती महंगाई, आर्थिक दबाव, ईंधन संकट और जीवन-यापन की बढ़ती लागत के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। लगातार नाकेबंदी के कारण देश के कई हिस्सों में भोजन, ईंधन और दवाओं की कमी हो गई है। लगभग 50 दिनों से आर्थिक गतिविधियां बाधित हैं, जिससे व्यापार, परिवहन और आपूर्ति श्रृंखला पर काफी असर पड़ा है।

आपातकाल पर क्या बोले राष्ट्रपति 

राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति पाज ने कहा कि उन्होंने देशभर की सड़कों पर यातायात को सामान्य करने के लिए "विशेष स्थिति" (state of exception) लागू करने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा, सेना और पुलिस को व्यवस्था बहाल करने और देशभर में यातायात व जरूरी सेवाओं को सामान्य करने में मदद मिलेगी। पाज ने बताया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के साथ कई दौर की बातचीत की और जायज मांगों पर सहमति बनाने की कोशिश की, लेकिन आपातकाल की घोषणा का फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि हालात में कोई सुधार नहीं हुआ।

ईंधन सब्सिडी में कटौती के बाद उग्र हुआ प्रदर्शन्

सात महीने पहले पदभार संभालने वाले मध्यमार्गी नेता पाज अभी देश के हालिया इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक संकटों में से एक से जूझ रहे हैं। विदेशी मुद्रा की कमी, प्राकृतिक गैस के निर्यात में गिरावट, महंगाई का 40 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचना और ईंधन संकट ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। यह संकट मई में और गहरा गया जब सरकार ने राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए लंबे समय से चली आ रही ईंधन सब्सिडी में कटौती की। इसके बाद प्रदर्शन और तेज हो गए; राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग के अलावा, यूनियनें वेतन बढ़ाने, ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति और डॉलर की कमी का समाधान करने की भी मांग कर रही हैं।

 

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