Trump peace Prize: गाज़ा युद्धविराम और बंधकों की रिहाई के बाद इज़रायल में अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का असाधारण स्वागत किया गया। सोमवार को ट्रंप के इज़रायली संसद (नेसेट) पहुंचते ही सांसदों ने ढाई मिनट तक खड़े होकर तालियों से उनका अभिनंदन किया। इस क्षण ने स्पष्ट कर दिया कि इज़रायल सरकार और जनता, विशेष रूप से हमास की कैद से रिहा हुए नागरिकों के परिजन, ट्रंप को शांति और मानवता के प्रतीक के रूप में देख रहे हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह दौरा केवल एक औपचारिक राजनयिक यात्रा नहीं था, बल्कि उनके पुराने सहयोग और मध्य-पूर्व नीति की पुनः पुष्टि थी। नेसेट में ट्रंप के संबोधन से पहले संसद अध्यक्ष अमीर ओहाना ने उनका जोरदार परिचय दिया। उन्होंने ट्रंप के नेतृत्व में काम करने वाली अमेरिकी टीम के सदस्यों का नाम लिया, जिनमें जेयर्ड कुशनर, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और राजदूत माइक हकाबी शामिल थे। सभी अधिकारियों को भी खड़े होकर सम्मानित किया गया।
इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इजरायल का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार दिया है। यह पुरस्कार देते वक्त नेतन्याहू इस बात को लेकर आश्वस्त दिखे कि अमेरिकी राष्ट्रपति को शांति का नोबेल पुरस्कार जरूर मिलेगा। इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप को एक 'गोल्डन पीस पीजन' (स्वर्ण शांति कबूतर) भेंट किया, जो शांति स्थापना में उनके योगदान का प्रतीक है। यह पुरस्कार इज़रायली-फिलिस्तीनी संघर्ष के समाधान में अमेरिकी प्रयासों की मान्यता के रूप में देखा जा रहा है। नेतन्याहू ने ट्रंप को इजरायल के सर्वोच्च सम्मान से नवाजते हुए कहा कि शांति का नोबेल पुरस्कार ट्रंप को जरूर मिलेगा, भले ही इसमें समय लग जाए। बता दें, इस वर्ष नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया है। हालांकि, मारिया ने यह पुरस्कार डोनाल्ड ट्रंप को समर्पित किया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि अमेरिका और इज़रायल के संबंध सिर्फ रणनीतिक साझेदारी नहीं, बल्कि गहरे सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि शांति की स्थापना में संवाद, समझ और नेतृत्व की सबसे अहम भूमिका होती है, और वह इस दिशा में लगातार प्रयासरत रहेंगे। इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ट्रंप के साथ मिलकर शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा, हमने देखा है कि जब अमेरिका और इज़रायल एकजुट होते हैं, तब शांति की राह आसान होती है। ट्रंप का यह दौरा इस एकता का प्रतीक है। इस कार्यक्रम का खास पहलू यह था कि जिस दिन यह आयोजन हुआ, उसी दिन गाज़ा से कई बंधकों की रिहाई की पुष्टि हुई।
इज़रायली मीडिया और विश्लेषकों ने इस बात पर जोर दिया कि ट्रंप की पूर्व मध्य-पूर्व नीति और नेतन्याहू के साथ उनकी साझेदारी ने ही इस तरह की रिहाई की नींव रखी थी। इज़रायली सांसदों द्वारा बार-बार 'बीबी' (नेतन्याहू) और ट्रंप के नाम की जयकारा लगाना इस बात का संकेत था कि जनता इन दोनों नेताओं को ही मौजूदा हालात में उम्मीद की किरण के रूप में देखती है।
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