उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों पर अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समाधान चाहते हैं दक्षिण कोरिया और यूक्रेन
खबर सार :-
दक्षिण कोरिया और यूक्रेन ने इस बात पर सहमति जताई है कि यूक्रेन में पकड़़े गए उत्तर कोरिया के युद्धबंदियों के मामले का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के साथ मिलकर किया जाएगा। यह सहमति दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून और उनके यूक्रेनी समकक्ष आंद्री सिबिहा के बीच सोल में हुई बैठक के दौरान बनी। 2025 की शुरुआत में यूक्रेनी सेना ने रूस के कुर्स्क क्षेत्र में तैनात दो उत्तर कोरियाई सैनिकों को पकड़ लिया था।
खबर विस्तार : -
सोल : दक्षिण कोरिया और यूक्रेन ने मंगलवार को इस बात पर सहमति जताई कि यूक्रेन में पकड़े गए उत्तर कोरिया के युद्धबंदियों (पीओडब्ल्यू) के मामले का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के अनुसार मिलकर किया जाएगा। सोल विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह सहमति दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून और उनके यूक्रेनी समकक्ष आंद्री सिबिहा के बीच सोल में हुई बैठक के दौरान बनी।
यूक्रेनी सेना ने पकड़े थे रूस के कुर्स्क क्षेत्र में तैनात दो उत्तर कोरियाई सैनिक
योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की शुरुआत में यूक्रेनी सेना ने रूस के कुर्स्क क्षेत्र में तैनात दो उत्तर कोरियाई सैनिकों को पकड़ लिया था। उन्हें रूस की ओर से लड़ाई में मदद के लिए भेजा गया था। खबरों के मुताबिक, इन दोनों सैनिकों ने दक्षिण कोरिया जाने की इच्छा जताई है। विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, "दोनों विदेश मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि यूक्रेन में मौजूद उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों के मामले का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के मुताबिक किया जाएगा। साथ ही संबंधित लोगों की अपनी इच्छा का भी सम्मान किया जाएगा।
दोनों देशों के बीच चल रही सकारात्मक बातचीत
बयान में कहा गया, "दोनों पक्षों ने यूक्रेन में चल रहे युद्ध और कोरियाई प्रायद्वीप समेत क्षेत्र की प्रमुख घटनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की।" दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पार्क इल ने कहा कि इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच सकारात्मक बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि सोल इस मामले में आगे बढ़ने के लिए अपने कूटनीतिक प्रयास जारी रखेगा। दक्षिण कोरिया का कहना है कि उसके संविधान के अनुसार उत्तर कोरिया के नागरिक भी दक्षिण कोरिया के नागरिक माने जाते हैं। इसलिए अगर कोई उत्तर कोरियाई युद्धबंदी दक्षिण कोरिया आना चाहता है, तो उसे स्वीकार किया जाएगा।
उत्तर कोरियाई युद्धबंदी को उसकी इच्छा के खिलाफ वापस नहीं भेजेगा यूक्रेन
वहीं, यूक्रेन का कहना है कि वह किसी भी उत्तर कोरियाई युद्धबंदी को उसकी इच्छा के खिलाफ वापस नहीं भेजेगा, हालांकि इस मामले पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है, क्योंकि कीव दूसरे देशों के युद्धबंदियों से जुड़े व्यापक पहलुओं पर भी विचार कर रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सिबिहा ने लिखा कि उन्होंने और चो ने उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की और अब उन्हें पता है कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुसार आगे कैसे बढ़ना है। सिबिहा ने कहा कि रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग सिर्फ यूक्रेन ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है।
दक्षिण कोरिया और यूक्रेन के बीच और करीबी सहयोग की जरूरत
दक्षिण कोरिया के दौरे के दौरान सिबिहा ने दोनों कोरिया के बीच स्थित भारी सुरक्षा वाले असैन्यीकृत क्षेत्र (डीएमजेड) का भी दौरा किया। वहां उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया और रूस से पैदा हो रहे खतरों का सामना करने के लिए दक्षिण कोरिया और यूक्रेन के बीच और करीबी सहयोग की जरूरत है। उन्होंने कहा, "इस सीमा के उस पार एक ऐसा तानाशाही शासन है, जो रूस की मदद कर रहा है ताकि वह यूक्रेन के शांतिपूर्ण शहरों को तबाह कर सके। प्योंगयांग और मॉस्को की खतरनाक गतिविधियों की वजह से यह ऐतिहासिक सीमा अब सीधे यूक्रेन के मोर्चे से जुड़ गई है।
रूस पर कोरियाई प्रायद्वीप में अस्थिरता फैलाने का आरोप
उन्होंने कहा, "यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में उत्तर कोरिया को शामिल करके और प्योंगयांग की सरकार को मजबूत बनाकर, रूस कोरियाई प्रायद्वीप में अस्थिरता फैला रहा है।" उन्होंने कहा कि यूक्रेन दक्षिण कोरिया के साथ दोनों देशों के लिए फायदेमंद सुरक्षा साझेदारी करने के लिए तैयार है। डीपीआरके उत्तर कोरिया का आधिकारिक नाम 'डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया' का संक्षिप्त रूप है।
यह 2015 के बाद पहली बार था, जब यूक्रेन के किसी विदेश मंत्री ने दक्षिण कोरिया का दौरा किया। हालांकि, दोनों विदेश मंत्री इस साल मार्च में फ्रांस में आयोजित जी7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भी मिले थे। मंगलवार की बैठक में चो और सिबिहा ने युद्ध के बाद यूक्रेन के पुनर्निर्माण में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ व्यापार, निवेश और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के तरीकों पर भी चर्चा की।
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