Social Media Influence US: अमेरिका में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता अब गंभीर राजनीतिक बहस का विषय बन चुकी है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेट-दोनों दलों के सांसदों ने एकजुट होकर यह चेतावनी दी है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का असर अब मौजूदा कानूनों से कहीं आगे निकल गया है, खासकर बच्चों की सुरक्षा, सार्वजनिक विमर्श और लोकतांत्रिक ढांचे पर।
सेक्शन-230 के 30 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित सीनेट सुनवाई में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। सांसदों ने इस बात पर जोर दिया कि जिस डिजिटल इकोसिस्टम को कभी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने वाला माना जाता था, वह अब कई मामलों में जनहित के खिलाफ काम करता नजर आ रहा है।
नाइट फर्स्ट अमेंडमेंट इंस्टीट्यूट की पॉलिसी डायरेक्टर नादीन फारिद जॉनसन ने सुनवाई के दौरान कहा कि आज डिजिटल सार्वजनिक क्षेत्र न तो आम नागरिकों के लिए और न ही लोकतंत्र के लिए प्रभावी ढंग से काम कर रहा है। उनके इस बयान ने पूरी बहस की दिशा तय कर दी, जिसमें सोशल मीडिया कंपनियों की बढ़ती ताकत और उसके सामाजिक प्रभावों पर गंभीर चर्चा हुई।
सुनवाई का सबसे भावनात्मक पहलू बच्चों से जुड़ा रहा। परिवारों की ओर से पेश हुए वकील मैथ्यू बर्गमैन ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जानबूझकर ऐसे डिजाइन अपनाते हैं, जो बच्चों को आकर्षित और निर्भर बनाने के लिए तैयार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन कंपनियों के लिए मुनाफा बच्चों की सुरक्षा से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
बर्गमैन ने उदाहरण देते हुए बताया कि कई मामलों में नाबालिगों को आत्म-हानि, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों और शोषणकारी कंटेंट के संपर्क में लाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से नहीं जुड़ा है, बल्कि कंपनियों के उन फैसलों से जुड़ा है जिनमें लाभ को प्राथमिकता दी जाती है। सीनेटरों ने भी इस चिंता को दोहराया और कहा कि एल्गोरिदमिक टार्गेटिंग, इन्फिनिट स्क्रॉल और लगातार आने वाले पुश नोटिफिकेशन जैसी सुविधाएं युवाओं को प्लेटफॉर्म पर अधिक समय तक बनाए रखने के लिए बनाई गई हैं। इनका सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार पर पड़ रहा है। इसके अलावा, गलत जानकारी और बढ़ते ध्रुवीकरण को भी एक बड़े खतरे के रूप में देखा गया। सांसदों ने कहा कि सोशल मीडिया ने राजनीतिक विमर्श की प्रकृति को बदल दिया है, जहां तथ्य और अफवाह के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है।
सीनेटर टेड क्रूज़ ने प्लेटफॉर्म्स पर आरोप लगाया कि वे अभिव्यक्ति के निर्णायक बन बैठे हैं और अपनी विचारधारा के विपरीत सामग्री को दबाने का काम करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार सरकारी दबाव के चलते प्लेटफॉर्म्स की निष्पक्षता प्रभावित होती है। वहीं, सीनेटर ब्रायन शैट्ज़ ने स्वीकार किया कि दोनों राजनीतिक दलों ने कभी न कभी प्लेटफॉर्म्स पर अनौपचारिक दबाव डालने की कोशिश की है, जिसे “जॉबोनिंग” कहा जाता है। यह स्थिति डिजिटल स्पेस में निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञ डैफनी केलर ने चेतावनी दी कि कुछ बड़ी कंपनियों के हाथों में संचार का केंद्रीकरण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को जोखिम में डाल सकता है। उन्होंने कहा कि आज अधिकांश ऑनलाइन अभिव्यक्ति इन निजी कंपनियों पर निर्भर है, जो इसे बेहद संवेदनशील बना देता है।
विशेषज्ञ डैफनी केलर ने स्पष्ट किया कि गलत जानकारी पर नियंत्रण के प्रयास आसान नहीं हैं। कई बार आपत्तिजनक या हानिकारक सामग्री भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आती है, जिससे सरकार के लिए सीधे हस्तक्षेप करना कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इस सुनवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर अमेरिका में एक व्यापक सहमति बन रही है कि मौजूदा नियम पर्याप्त नहीं हैं और नए संतुलित कानूनों की आवश्यकता है, जो नवाचार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षा के बीच संतुलन बना सकें।
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