Sushila Karki: नेपाल में राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। केपी ओली का शासन उखाड़ फेंका गया है। भ्रष्टाचार और कुशासन के खिलाफ जेन-जेड आंदोलन (Nepal Gen-Z Protest) के बाद, राजधानी काठमांडू के आसपास सिर्फ राख ही दिखाई दे रही है, हर तरफ तबाही के निशान दिखाई दे रहे हैं। नेपाल में जेन-जेड आंदोलन के बाद, प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और कई मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद सवाल उठ रहे थे कि नेपाल का प्रतिनिधित्व कौन करेगा। जबकि छह महीने बाद चुनाव होने हैं। लेकिन उससे पहले किसी को आगे आकर देश का नेतृत्व करना होगा।
हालांकि, सुशीला कार्की समेत कई नामों पर चर्चा हो रही है और कार्की इस दौड़ में सबसे आगे हैं और जेन-जेड की पहली पसंद बनी हुई हैं। बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाने की तैयारी चल रही है। आज सुबह 9 बजे इस पर बातचीत चल रही है। कल दिन भर चली चर्चा किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने पर लगभग सहमति बन गई है, लेकिन मौजूदा संसद को भंग करने या न करने पर चर्चा अभी रुकी हुई है।
उधर नेपाल के राष्ट्रपति कार्यालय 'शीतल निवास' ने अपने कर्मचारियों को नए अंतरिम प्रधानमंत्री के स्वागत की तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को भी इसी तरह के निर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें उन्हें राजनीतिक सहमति बनने के बाद आधिकारिक बदलाव के लिए तैयार रहने को कहा गया है। जैसे ही देश की प्रमुख पार्टियां और राष्ट्रपति अंतरिम सरकार का नेतृत्व सुशीला कार्की को सौंपने पर औपचारिक सहमति बनाते हैं, मंत्रालय को संबंधित व्यवस्थाएं शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
बता दें कि सुशीला कार्की एक प्रतिष्ठित न्यायविद और नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश हैं। उनकी छवि एक निष्पक्ष व्यक्ति की है जो इस अस्थिर दौर में विश्वसनीयता और स्थिरता बहाल करने में सक्षम हो सकती हैं। कई दिनों की राजनीतिक उथल-पुथल के बाद, जनता के एक बड़े वर्ग ने देश का अंतरिम नेतृत्व सुशीला कार्की को सौंपने की मांग की है। इससे पहले, नेपाल विद्युत प्राधिकरण (NEA) के पूर्व प्रमुख कुलमन घीसिंग को भी संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा था। घीसिंग की व्यापक सुधारों के माध्यम से बिजली की कमी को समाप्त करने के लिए प्रशंसा की जाती है।
गौरतलब है कि यह राजनीतिक बदलाव देश में चल रहे व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के बीच हो रहा है। नेपाल में हालिया अशांति और जनरल-जी आंदोलन सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का परिणाम है। युवाओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया और सरकार के खिलाफ हमला बोला। काठमांडू में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में अब तक 51 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 1,000 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं।
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