लखनऊ, 26 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा दो अप्रैल को अमेरिका ने भारत से आयातित उत्पादों पर की थी। तमाम विरोधों के बाद 09 जुलाई तक के लिए यह फैसला टाल दिया गया था। लेकिन इसी मसले पर 10 फीसदी का मूल सीमा शुल्क पर कोई बदलाव नहीं किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अमेरिका के फैसले के समक्ष घरेलू उत्पादों पर लगाए गए 26 प्रतिशत जवाबी शुल्क से छूट की मांग कर सकता है। भारतीय निर्यातकों को अब तक सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।
साथ ही ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि ट्रंप के टैरिफ का कानूनी आधार कमजोर है। भारत सरकार अब अमेरिकी अदालत द्वारा ट्रंप के आयात शुल्क आदेश को अवैध ठहराने के फैसले और उसके प्रभावों की समीक्षा पर जोर दे रही है। भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत तो चल ही रही है, ऐसे में यह फैसला कोई विशेष परिवर्तन नहीं लाने जा रहा है। भारत और अमेरिका, टैरिफ अपने तरीके से ले रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से भारत को व्यापार वार्ता में ज्यादा लाभ के संकेत हैं। पिछले दिनों भी भारत में कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा था। मुक्त व्यापार समझौते के लिए भी दोनों देश विचार कर सकते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप के आयात शुल्क बढ़ाने के आदेश को अदालत ने खारिज कर दिया था। भारत सरकार इसे गंभीरता से ले रही है। अर्थव्यवस्था के मामले में सरकार किसी गलत नतीजे की ओर नहीं जाना चाहती है, क्योंकि हाल में ही चतुर्थ अर्थव्यवस्था के रूप में देश उभरा है।
सरकार अमेरिकी अदालत के फैसले के प्रभाव का विश्लेषण कर सकती है। बहरहाल, अभी तक माना जा रहा है कि अदालत का फैसला अंतरराष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्र में भी भारत के लिए खास हो सकता है। हालांकि, ट्रंप ने देश की अदालत के फैसले पर ऐतराज जताया है। 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत आयात पर सीमा शुल्क लागू करने का अधिकार नहीं दिया गया है। लेकिन ट्रंप प्रशासन, टैरिफ आदेश को इसी अधिनियम के तहत उचित बता रहा था।
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