मां की स्मृति में समरसता का महासंगमः तहनाल बना एकता का तीर्थस्थल

खबर सार :-
शाहपुरा तहसील के मूल निवासी तथा ज्योतिष और वास्तु के राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात विशेषज्ञ हेमराज लढ़ा ने अपनी दिवंगत माता सोहनदेवी की स्मृति में एक कार्यक्रम का आयोजन किया है, जिसने पूरे समुदाय को एक ही मंच पर एकजुट कर दिया है।

मां की स्मृति में समरसता का महासंगमः तहनाल बना एकता का तीर्थस्थल
खबर विस्तार : -

शाहपुरा: तहनाल गांव इन दिनों आस्था, भावनाओं और सामाजिक समरसता का अद्भुत केंद्र बना हुआ है। शाहपुरा तहसील के इस छोटे से गांव में शनिवार का दिन एक ऐतिहासिक अवसर में बदल गया, जहां हर गली, चौपाल और घर में एक ही चर्चा सुनाई दे रही थी, “मां के नाम पर इतना भव्य आयोजन, सच में अद्भुत!” यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और परंपराओं के पुनर्जीवन का भी संदेश दे गया।

सामाजिक एकता का दिया संदेश

इस आयोजन के केंद्र में हैं देशभर में ख्यातनाम ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ हेमराज लढ़ा, जिन्होंने अपनी माताजी स्वर्गीय सोहनदेवी की स्मृति में इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। तस्वीरों और दृश्य से स्पष्ट था कि पूरा गांव एकजुट होकर एक जाजम पर बैठा है, जहां जाति, वर्ग और भेदभाव की सभी सीमाएं समाप्त हो गई हैं।

सुबह से ही गांव में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। दूर-दूर से आए रिश्तेदार, समाजबंधु और ग्रामीण एक ही उद्देश्य से यहां पहुंचे माताजी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना और सामाजिक एकता के इस संदेश को आत्मसात करना। महिलाओं ने पारंपरिक परिधान पहनकर आयोजन में भाग लिया और जैसे ही उन्होंने माताजी की प्रतिमा के दर्शन किए, कई लोगों की आंखें भावुक होकर नम हो गईं।

मूल्यों को पुनर्जीवित करने का प्रयास

हेमराज लढ़ा ने अपनी माताजी की प्रतिमा विशेष रूप से वियतनाम से पत्थर मंगवाकर बनवाई, जिसे उनके निवास पर स्थापित किया गया। प्रतिमा के दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं और हर व्यक्ति श्रद्धा से सिर झुकाकर आशीर्वाद लेता नजर आया। इस दौरान आयोजित श्री चारभुजानाथ महाराज की प्रसादी में सैकड़ों लोग एक साथ पंगत में बैठे। यह दृश्य सामाजिक समरसता की जीवंत मिसाल बन गया, जहां हर व्यक्ति बिना किसी भेदभाव के एक साथ भोजन करता दिखाई दिया।

हेमराज लढ़ा ने बताया कि आधुनिक दौर में सामाजिक परंपराएं धीरे-धीरे समाप्त हो रही हैं, ऐसे में यह आयोजन उन मूल्यों को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का माध्यम भी है।

 परिवार की यह एकजुटता का संदेश

तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में तहनाल ग्राम पंचायत क्षेत्र के सभी वर्गों के परिवारों के साथ-साथ माहेश्वरी समाज के लगभग 125 गांवों के लोगों को आमंत्रित किया गया है। पहले ही दिन भारी भीड़ ने इसे ऐतिहासिक बना दिया। उल्लेखनीय है कि सोहनदेवी ने 106 वर्ष की आयु प्राप्त की थी और जीवनभर सामाजिक एकता का संदेश दिया, जिसे आज यह आयोजन जीवंत कर रहा है।

कार्यक्रम में युवा वर्ग जहां व्यवस्थाओं को संभाल रहा है, वहीं बुजुर्ग अपने अनुभवों से इस पहल की सराहना कर रहे हैं। अहमदाबाद में निवासरत हेमराज लढ़ा अपने पुत्रों विकास, अभिषेक और रोहित के साथ आयोजन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। परिवार की यह एकजुटता भी लोगों के लिए प्रेरणादायक बन गई है।

इस आयोजन की एक और विशेषता यह है कि हेमराज लढ़ा के घर में पिछले 36 वर्षों से माताजी की अखंड ज्योत जल रही है, जो उनकी अटूट श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। आज वही भक्ति पूरे क्षेत्र में सामाजिक समरसता और एकता का प्रकाश फैला रही है, जिससे तहनाल गांव एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है।

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