मां को खुश रखने के लिए ब्रिगेडियर बना युवक, गिरफ्तारी के बाद सामने आई ये सच्चाई

खबर सार :-
मां को खुश करने के लिए एक युवक ने फर्जी ब्रिगेडियर बनने की कोशिश की। इस घटना के बाद पूरे शहर में इस मामले की चर्चा हो रही है। लोग इस बात से हैरान हैं कि मां को दुख और सदमे से बचाने के उद्देश्य से शुरू हुआ झूठ आखिरकार बेटे की गिरफ्तारी तक पहुंच गया। कई लोग इसे युवाओं पर बढ़ते सामाजिक और पारिवारिक दबाव से जोड़कर भी देख रहे हैं।
मां को खुश रखने के लिए ब्रिगेडियर बना युवक, गिरफ्तारी के बाद सामने आई ये सच्चाई
खबर विस्तार : -

शाहजहांपुरः शहीद संग्रहालय से फर्जी ब्रिगेडियर के रूप में गिरफ्तार किए गए 20 वर्षीय आर्यन वर्मा की कहानी केवल कानून के उल्लंघन का मामला नहीं है, बल्कि एक ऐसे युवा की भावनात्मक दास्तान है, जिसने अपनी असफलता को छिपाने के लिए ऐसा झूठ गढ़ा जो अंततः उसके लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया।

हृदय रोग से पीड़ित है मां

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आर्यन का सपना सशस्त्र सेना चिकित्सा महाविद्यालय (AFMC) में डॉक्टर बनने का था। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उसने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) भी दी थी, लेकिन उसे सफलता नहीं मिल सकी। आर्यन ने पुलिस को बताया कि उसकी मां हृदय रोग से पीड़ित हैं और वह उन्हें अपनी असफलता का दुख नहीं देना चाहता था। इसी कारण उसने परिवार को यह विश्वास दिलाया कि उसका चयन AFMC में डॉक्टर के रूप में हो गया है।

लगातार झूठ बोलता रहा युवक

एक झूठ को सच साबित करने की कोशिश में आर्यन लगातार आगे बढ़ता गया। उसने नोएडा और गुरुग्राम से सेना की वर्दी तथा उससे जुड़े अन्य सामान जुटाए। इतना ही नहीं, उसने अपने पिता की टाटा हैरियर कार पर सेना से संबंधित प्रतीक चिह्न भी लगवा लिए। इसके बाद वह खुद को सेना का ब्रिगेडियर बताकर सार्वजनिक स्थानों पर आने-जाने लगा।

शुक्रवार को उसकी यह कहानी उस समय उजागर हो गई जब वह शाहजहांपुर स्थित शहीद संग्रहालय पहुंचा। वहां मौजूद पूर्व सैनिकों को उसकी गतिविधियां और व्यवहार संदिग्ध लगे। जब उससे सैन्य सेवा और पद से संबंधित जानकारी पूछी गई तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। संदेह बढ़ने पर पूर्व सैनिकों ने सेना और स्थानीय पुलिस को सूचना दी।

पूछताछ में सामने आई सच्चाई

सूचना मिलने के बाद सदर बाजार पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। जांच के दौरान उसकी पहचान और दावों की सच्चाई सामने आ गई। पूछताछ में आर्यन ने स्वीकार किया कि वह सेना का अधिकारी नहीं है और उसने परिवार को अपनी असफलता छिपाने के लिए यह झूठ बोला था।

फिलहाल पुलिस मामले में विधिक कार्रवाई कर रही है और यह जांच की जा रही है कि युवक ने सेना की वर्दी और प्रतीक चिह्नों का उपयोग किन परिस्थितियों में किया तथा क्या उसने किसी अन्य उद्देश्य से भी खुद को सैन्य अधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया था। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि बेटे की गिरफ्तारी और सच्चाई सामने आने के बाद उसकी हृदय रोग से पीड़ित मां पर क्या बीत रही होगी।

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