Sanjeev Ahirouli Encounter: 12 साल जेल में बिताए, बाहर आते ही STF से मुठभेड़ में ढेर हुआ 1 लाख का इनामी शार्प शूटर संजीव अहिरौली
खबर सार :-
लखनऊ एसटीएफ की मुठभेड़ में एक शार्प शूटर संजय उर्फ संजीव अहिरौली मारा गया। बताया जा रहा है कि उस पर एक लाख रुपये का इनाम रखा गया था।
खबर विस्तार : -
Sanjeev Ahirouli Encounter: उत्तर-प्रदेश की लखनऊ पुलिस ने एक लाख के इनामी कुख्यात अपराधी संजय उर्फ संजीव को मुठभेड़ में मार गिराया गया। वह बिल्डर संदीप सिंह हत्याकांड का मुख्य आरोपी था। जांच में सामने आया कि वह माफिया दिलीप वर्मा और खान मुबारक का करीबी था। इन्ही के संपर्क में आने के बाद वह शार्प शूटर बन गया था।
Sanjeev Ahirouli Encounter: एसटीएफ मुठभेड़ में मारा गया शार्प शूटर संजीव अहिरौली
लखनऊ एसटीएफ से मुठभेड़ में मारा गया बिल्डर संदीप सिंह हत्याकांड का मुख्य आरोपी संजीव अहिरौली मारा गया है। वह अहिरौली के चककोडार गांव का रहने वाला था। उसने साल 1996 में अपराध की दुनिया में कदम रखा था। उस पर साल 2002 में अहिरौली थाना क्षेत्र में चोरी व हत्या का एक मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद साल 2010 में उसपर अकबरपुर कोतवाली में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके एक साल बाद साल 2011 में महरुआ में हत्या, लूट और गैंग्सटर एक्ट का मुकदमा दर्ज हुआ था। साल 2011 में ही उसने अंबेडकरनगर, गोंडा, बस्ती और अयोध्या में ताबड़तोड़ हत्या व लूट जैसी छह घटनाओं को अंजाम देने के बाद लोगों के मन में खुद के प्रति डर का माहौल पैदा कर दी थी।
Sanjeev Ahirouli Encounter: 12 साल तक जेल में बंद था संजीव अहिरौली
संजीव किराए पर लूट व हत्या की घटनाओं को अंजाम देता था और काफी समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। हालांकि उसे पकड़ा भी गया था, जिसमें वो 12 साल तक जेल में बंद रहा। इसके बाद जब जेल से बाहर आया तो लखनऊ में प्रापर्टी डीलिंग का काम करने लगा। शनिवार सुबह अहिरौली पुलिस उसके घर पहुंची और मुठभेंड़ में मार गिराया। इसकी सूचना मिलने के बाद उसके बड़े बेटे बंटी व गांव के कुछ लोग शव को लेने लखनऊ पहुंचे। अप्रैल 2026 में वह अपनी बहन रुपा की शादी में घर आया था। उसके पांच बच्चे हैं, जिसमें से तीन बेटे व दो बेटियां हैं। बहन की शादी के बाद वह अपने बेटे की शादी की तैयारी में था। उसकी पत्नी का कुछ साल पहले ही देहांत हो चुका है।
Sanjeev Ahirouli Encounter: बेटा बाहर क्या काम करता था, हमें इसकी जानकारी नहीं थी- संजीव के पिता हरीराम
संजीव के पिता हरीराम ने बताया कि उन्हे इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनका बेटा बाहर क्या काम करता था। उन्होंने कहा कि पुलिस अक्सर पूछताछ करने आती थी, जिस कारण परिवार काफी परेशान हो चुका था। इसके कुछ समय बाद उन्हें पता चला कि उनका बेटा करीब 12 साल तक जेल में बंद रहा। दो साल पहले ही वह जमानत पर बाहर आया था। परिवार वाले इस उम्मीद में थे कि जेल से बाहर आने के बाद वह अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करेगा। हालांकि उसने कोशिश की और प्रॉपर्टी डीलर का काम शुरु कर दिया। पिता का कहना है कि वह ज्यादातर समय गांव में रहता था और अपने काम पर ध्यान देता था।
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