Meerut Sports Industry का कायाकल्प: ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बनने की राह पर उत्तर प्रदेश

खबर सार :-
Meerut Sports Industry का कायाकल्प: मेरठ की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री अब वैश्विक मंच पर छाने को तैयार है। योगी सरकार की नीतियों और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर उत्तर प्रदेश खेल उपकरणों का ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बनने की ओर अग्रसर है।

Meerut Sports Industry का कायाकल्प: ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बनने की राह पर उत्तर प्रदेश
खबर विस्तार : -

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की दूरगामी औद्योगिक नीतियों और क्लस्टर आधारित विकास मॉडल ने मेरठ को दुनिया के नक्शे पर एक नई पहचान दी है। कभी केवल पारंपरिक क्रिकेट बैट के लिए मशहूर मेरठ, अब आधुनिक खेल उपकरणों के निर्माण का एक सशक्त वैश्विक केंद्र बनकर उभर रहा है। नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट ने भी इस बात की पुष्टि की है कि आधुनिक तकनीक और सही सरकारी सहयोग से भारत का यह पारंपरिक क्लस्टर वैश्विक बाजार में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने की क्षमता रखता है।

नीतिगत सुधारों से मिली खेल उद्योग को नई उड़ान

भारत के खेल उपकरण क्षेत्र को वैश्विक पटल पर मजबूती से स्थापित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने एक साहसिक रोडमैप तैयार किया है। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्तमान में विश्व स्तर पर खेल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी मात्र 0.5% है, जिसे आगामी 2036 तक बढ़ाकर 11% (लगभग $8.1 बिलियन) करने का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने की पूरी धुरी मेरठ के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है। आज मेरठ में खेल निर्माण का एक विस्तृत और सशक्त जाल फैला हुआ है, जिसमें 250 से अधिक निर्यात इकाइयां, 1,000 से ज्यादा घरेलू इकाइयां और करीब 4,000 सूक्ष्म उद्यम सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इसके अलावा, लगभग 20,000 छोटे घरेलू उत्पादन केंद्रों के माध्यम से क्रिकेट के सामान से लेकर फुटबॉल, बॉक्सिंग ग्लव्स और आधुनिक जिम उपकरणों का निर्माण पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किया जा रहा है, जो उत्तर प्रदेश को वैश्विक बाजार में एक नई पहचान दिलाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

 बजट 2026 और बुनियादी ढांचे का विकास

केंद्र सरकार ने अपने बजट 2026 में स्पोर्ट्स गुड्स सेक्टर के लिए 500 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है। योगी सरकार इस फंड का उपयोग मेरठ के पारंपरिक क्लस्टरों के आधुनिकीकरण के लिए कर रही है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को रियायती दरों पर वित्तीय सहायता और तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता में वैश्विक स्तर का सुधार आया है। बेहतर सड़क नेटवर्क और एक्सप्रेस-वे के निर्माण ने मेरठ से बंदरगाहों तक की दूरी को वैचारिक रूप से कम कर दिया है, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी आई है।

नोएडा और जेवर एयरपोर्ट: एक्सपोर्ट के लिए 'गेम चेंजर'

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का औद्योगिक परिदृश्य अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर है, जहाँ राज्य सरकार के विजन के अनुसार पूरे क्षेत्र को एक 'इंटीग्रेटेड हब' के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस पूरी योजना में जेवर में निर्माणाधीन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और ग्रेटर नोएडा का अत्याधुनिक लॉजिस्टिक्स हब मेरठ की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़े 'गेम चेंजर' साबित होने वाले हैं। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने इस विकास कार्यों पर प्रकाश डालते हुए स्पष्ट किया कि नोएडा की शानदार कनेक्टिविटी और जेवर एयरपोर्ट के पूरी तरह क्रियाशील होने से खेल उपकरणों के निर्यात में लगने वाला ट्रांजिट समय घटकर लगभग आधा रह जाएगा। इससे न केवल निर्यात की कुल लागत में बड़ी कमी आएगी, बल्कि मेरठ में निर्मित उच्च स्तरीय उत्पाद बिना किसी बाधा के सीधे वैश्विक सप्लाई चेन का अभिन्न हिस्सा बन सकेंगे, जिससे स्थानीय उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच एक मजबूत बढ़त हासिल होगी।

 चुनौतियाँ और समाधान की दिशा में कदम

हालांकि, इस सेक्टर को कच्चे माल की बढ़ती लागत और ऊंचे आयात शुल्क (10-20%) जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार 'सिंगल विंडो सिस्टम' और निवेश मित्र पोर्टल के माध्यम से इन बाधाओं को दूर कर रही है। आगामी कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 और ओलंपिक 2036 (संभावित) को देखते हुए, खेल उपकरणों की मांग में जबरदस्त उछाल आने की उम्मीद है। इसके लिए योगी सरकार ब्रांडिंग और स्किल डेवलपमेंट पर विशेष जोर दे रही है ताकि 'मेक इन यूपी' के उत्पाद दुनिया भर के एथलीटों की पहली पसंद बन सकें।

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