हरिशेवा धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब: नवचंडी अनुष्ठान और रामनवमी के महायज्ञ से गुंजायमान हुआ भीलवाड़ा

खबर सार :-
भीलवाड़ा के हरिशेवा धाम में महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन के सानिध्य में चैत्र नवरात्रि और रामनवमी का भव्य आयोजन हुआ। नवचंडी पाठ, कन्या पूजन और महायज्ञ से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

हरिशेवा धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब: नवचंडी अनुष्ठान और रामनवमी के महायज्ञ से गुंजायमान हुआ भीलवाड़ा
खबर विस्तार : -

भीलवाड़ा: राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित श्री हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में इन दिनों भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित विशेष धार्मिक अनुष्ठानों ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया है। महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन के पावन सानिध्य में आयोजित इन कार्यक्रमों में न केवल स्थानीय श्रद्धालु बल्कि दूर-दराज से आए भक्त भी शक्ति की उपासना में लीन नजर आ रहे हैं।

 नवचंडी दुर्गा पाठ से वातावरण में घुली दिव्यता

आश्रम में आयोजित नौ दिवसीय नवचंडी दुर्गा पाठ ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया है। वैदिक विद्वानों-पंडित सत्यनारायण शर्मा, मनमोहन शर्मा और वासुदेव शर्मा के निर्देशन में दुर्गा सप्तशती के सस्वर पाठ से मंदिर परिसर गूंज उठा। प्रतिदिन प्रातःकाल में विधि-विधान के साथ मंडल पूजन, गणपति आवाहन और मां भगवती का अभिषेक किया गया। शास्त्रीय परंपराओं के अनुसार संपन्न हो रहे इन अनुष्ठानों का मुख्य उद्देश्य विश्व कल्याण और मानवीय चेतना में सकारात्मकता का संचार करना है। भक्तों का मानना है कि इन मंत्रों की ध्वनि मात्र से मन को असीम शांति प्राप्त हो रही है।

 महाष्टमी पर आहुतियों से शुद्ध हुआ परिवेश

दुर्गा अष्टमी के विशेष अवसर पर आश्रम में भव्य हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। विशेष औषधीय सामग्रियों के साथ दी गई आहुतियों ने वातावरण को शुद्ध और पवित्र बना दिया। यज्ञ की पूर्णाहुति के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और सुख-समृद्धि की कामना की। सनातन परंपरा में यज्ञ का विशेष महत्व बताते हुए विद्वानों ने कहा कि यह न केवल आध्यात्मिक शुद्धि करता है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा का समूल नाश भी करता है।

 रामनवमी: कन्या पूजन और मर्यादा पुरुषोत्तम का जन्मोत्सव

शुक्रवार को रामनवमी के पावन पर्व पर हरिशेवा धाम का दृश्य अत्यंत मनोहारी और अलौकिक रहा, जहाँ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव को असीम हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस पावन बेला पर भक्ति और सेवा की अनुपम मिसाल पेश करते हुए 'कन्या पूजन' का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस अनुष्ठान के दौरान नन्हीं कन्याओं को साक्षात देवी का रूप मानकर उनके चरण पखारे गए और पूर्ण श्रद्धा भाव से उनका तिलक-वंदन कर चुनरी ओढ़ाई गई। सात्विक भोज और उपहार भेंट कर कन्याओं का सम्मान करने के पश्चात, आश्रम परिसर में एक विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जहाँ हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ महाप्रसाद ग्रहण किया। आस्था के इस संगम ने न केवल मंदिर के वातावरण को भक्तिमय बना दिया, बल्कि सेवा और समर्पण के आदर्श को भी जीवंत कर दिया।

 स्वामी हंसराम उदासीन का 'मौन व्रत' हुआ पूर्ण

इस भव्य महोत्सव का सबसे आध्यात्मिक और प्रेरणादायी पक्ष महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन का 'मौन संकल्प' रहा। स्वामी जी ने संपूर्ण चैत्र नवरात्रि की अवधि के दौरान मौन धारण कर गहन आत्म-साधना की थी, जिसका समापन रामनवमी के पावन अवसर पर हुआ। मौन व्रत पूर्ण करने के पश्चात उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए स्वामी जी ने समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटने का मर्मस्पर्शी संदेश दिया। उन्होंने वर्तमान दौर में पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी अपनी मूल परंपराओं से विमुख हो रही है, जबकि सर्वांगीण उन्नति के लिए अपनी विरासत से जुड़ाव अनिवार्य है। स्वामी जी ने जोर देकर कहा कि हमें अपने सभी धार्मिक पर्वों को उनकी प्राचीन गरिमा और शास्त्रीय विधियों के अनुरूप ही मनाना चाहिए, क्योंकि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन ही हमारे लिए लोक-कल्याण और आदर्श आचरण का सबसे बड़ा मार्गदर्शक है।

 भक्ति और सेवा का संगम

आयोजन के दौरान संत मायाराम, राजाराम, गोविन्द राम, केशव राम और ब्रह्मचारी मिहिर सहित कई संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। मंदिर में गूंजते भजनों और 'जय श्रीराम' के उद्घोष ने ऐसा माहौल बना दिया मानो भीलवाड़ा की यह पावन धरा स्वयं अयोध्या का रूप ले चुकी हो। इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि हरिशेवा धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और सेवा का जीवंत केंद्र है।

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