राजकीय महाविद्यालय हिन्दुमलकोट में मनाया गया सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, विद्यार्थियों ने दिखाई उत्साहपूर्ण भागीदारी
खबर सार :-
सरकारी कॉलेज, हिंदूमलकोट में "सोमनाथ स्वाभिमान पर्व" के तत्वावधान में भारतीय संस्कृति, इतिहास और राष्ट्रीय स्वाभिमान पर केंद्रित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
खबर विस्तार : -
श्रीगंगानगरः राजकीय महाविद्यालय हिन्दुमलकोट में “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” के अंतर्गत भारतीय संस्कृति, इतिहास और राष्ट्रीय स्वाभिमान विषय पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय गौरव के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था। पूरे आयोजन के दौरान महाविद्यालय परिसर में सांस्कृतिक चेतना और देशभक्ति का वातावरण देखने को मिला।
विद्यार्थियों के लिए आयोजित हुई प्रतियोगिता
कार्यक्रम में इतिहास विभाग की सहायक आचार्य ममता गाबा ने “सोमनाथ मंदिर का इतिहास एवं भारतीय संस्कृति” विषय पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारतीय सभ्यता, आत्मगौरव और सांस्कृतिक शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि अनेक बार आक्रमणों और विनाश के बावजूद मंदिर का पुनर्निर्माण भारत की अटूट सांस्कृतिक चेतना और दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय इतिहास को समझने और उससे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता के माध्यम से छात्रों के ज्ञान और जागरूकता को परखा गया। इसके अलावा भारतीय संस्कृति और इतिहास से संबंधित पोस्टर एवं निबंध प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने का प्रयास
इस अवसर पर छात्रा पूजा और स्नेहा तथा छात्र रोहित और रॉबिन ने भारतीय संस्कृति, इतिहास और राष्ट्रीय गौरव से जुड़े विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। विद्यार्थियों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
अंग्रेजी विभाग की सह आचार्य डॉ. ज्योति सरीन ने कहा कि भारतीय इतिहास केवल घटनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक पहचान और नैतिक मूल्यों की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
भूगोल विभाग के सहायक आचार्य डॉ. हनुमान प्रसाद आर्य ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति को समझने और उसे आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी देश की सांस्कृतिक धरोहर को संजोकर ही भविष्य को मजबूत बना सकती है।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही। आयोजन को विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया गया।
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