अयोध्या: भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या को उसके प्राचीन और पौराणिक स्वरूप में वापस लाने की दिशा में नगर निगम ने एक बड़ी पहल शुरू की है। अब रामनगरी की सड़कों और मोहल्लों में केवल आधुनिक सजावट ही नहीं, बल्कि उन वृक्षों की छाया भी मिलेगी जिनका वर्णन रामायण काल में मिलता है। महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी और नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के सख्त निर्देश दिए हैं।
योजना के अनुसार, अयोध्या नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत खाली पड़ी सरकारी जमीनों को चिन्हित किया जा रहा है। महापौर ने स्पष्ट किया है कि चाहे जगह 500 वर्ग मीटर से छोटी हो या बड़ी, हर उपलब्ध स्थान पर 'रामायणकालीन उपवन' विकसित किए जाएंगे। विशेष रूप से जैन मंदिरों के आसपास की भूमि को इस हरियाली अभियान से जोड़ने पर जोर दिया गया है। नगर आयुक्त ने बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए 'हीट एक्शन प्लान' के तहत शहर के नौ सबसे संवेदनशील वार्डों में सघन वृक्षारोपण करने को कहा है। बैठक में जानकारी दी गई कि शहर में पहले ही 'मियावाकी पद्धति' (जापानी तकनीक) से दो घने उपवन तैयार किए जा चुके हैं, जो कम जगह में अधिक ऑक्सीजन और हरियाली प्रदान कर रहे हैं।
अयोध्या के युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए मुख्यमंत्री नगरोदय योजना एक बड़ी सौगात लेकर आ रही है। नगर निगम प्रशासन ने वशिष्ट कुंड, चित्रगुप्त, मलिकपुर और श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे शिक्षा प्रधान वार्डों में 'डिजिटल लाइब्रेरी' स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए उपयुक्त स्थानों का चयन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
प्राचीन तालाबों के अस्तित्व को बचाने के लिए निगम अब 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना रहा है। नगर निगम निधि से शहर के पांच छोटे तालाबों को न केवल अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा, बल्कि उनकी घेराबंदी (बैरिकेडिंग) कर उनमें जल की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी। यह कदम शहर के गिरते भूजल स्तर को सुधारने में मील का पत्थर साबित होगा।
बैठक में विकास कार्यों की सुस्त रफ्तार पर नगर आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने साफ कहा कि जिन ठेकेदारों ने बिना किसी ठोस कारण के काम को छह महीने से ज्यादा लटकाया है, उन्हें तुरंत नोटिस जारी किया जाए। इसके साथ ही, स्मार्ट सिटी योजना के तहत तैयार हो चुके चार स्कूलों को नया शैक्षिक सत्र शुरू होते ही जनता को समर्पित कर दिया जाएगा।
बैठक में मुख्यमंत्री नगर सृजन योजना और सीएम ग्रिड योजना की भी बारीकी से समीक्षा की गई। बताया गया कि सीवरेज और जल निकासी की बाधाओं को दूर करने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास जारी हैं। इस उच्च स्तरीय बैठक में अपर नगर आयुक्त डॉ. नागेंद्र नाथ, मुख्य अभियंता पुनीत कुमार ओझा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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