ऊर्जा क्रांति की ओर रामनगरी: अयोध्या में 1 किलोवाट माइक्रो इन्वर्टर सिस्टम लॉन्च, अब घर-घर पहुंचेगी सस्ती बिजली

खबर सार :-
अयोध्या अब आध्यात्मिक वैभव के साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही है। 1 किलोवाट माइक्रो इन्वर्टर सिस्टम लॉन्च। जानें सब्सिडी, लागत और कैसे अयोध्या बनेगी देश की अग्रणी सोलर सिटी।

ऊर्जा क्रांति की ओर रामनगरी: अयोध्या में 1 किलोवाट माइक्रो इन्वर्टर सिस्टम लॉन्च, अब घर-घर पहुंचेगी सस्ती बिजली
खबर विस्तार : -

अयोध्या : मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या आज एक नए युग की दहलीज पर खड़ी है। जहाँ एक ओर भव्य मंदिर और आध्यात्मिक विकास ने अयोध्या को विश्व पटल पर स्थापित किया है, वहीं दूसरी ओर 'सोलर सिटी' के रूप में इसकी उभरती पहचान इसे आधुनिकता और स्थिरता का केंद्र बना रही है। इसी क्रम में गुरुवार को अयोध्या के त्रिमूर्ति होटल में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई, जब कृष्णा सोलर इंडस्ट्री ने अपने उन्नत 1 किलोवाट माइक्रो इन्वर्टर सोलर सिस्टम का आधिकारिक शुभारंभ किया। यह कदम अयोध्या को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि अयोध्या के महापौर गिरीश पति त्रिपाठी और विशिष्ट अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस दौरान शहर के कई गणमान्य नागरिक और सौर ऊर्जा विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे, जिन्होंने तकनीक और पर्यावरण के इस संगम की सराहना की।

1 किलोवाट माइक्रो इन्वर्टर सिस्टम की तकनीकी विशेषताएं और लाभ

अक्सर पारंपरिक सोलर सिस्टम को लेकर उपभोक्ताओं के मन में बिजली के उतार-चढ़ाव, कम रोशनी में कार्यक्षमता और रखरखाव को लेकर कई तरह के संशय बने रहते हैं। इन्हीं चिंताओं को दूर करते हुए कंपनी के विशेषज्ञों ने कार्यक्रम के दौरान इस नए 1 किलोवाट माइक्रो इन्वर्टर सिस्टम की बारीकियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसकी उच्च दक्षता (High Efficiency) है। यह नवीनतम माइक्रो इन्वर्टर तकनीक पर आधारित है, जो पारंपरिक स्ट्रिंग इन्वर्टर के विपरीत सीधे पैनल-स्तर पर बिजली का प्रबंधन करता है। इसका सीधा लाभ यह है कि यदि आसमान में बादल हों या किसी एक पैनल पर छाया पड़ रही हो, तब भी सिस्टम का कुल बिजली उत्पादन प्रभावित नहीं होता और यह अधिकतम ऊर्जा सुनिश्चित करता है। तकनीकी मजबूती के साथ-साथ यह सिस्टम शहरी क्षेत्रों की व्यावहारिक समस्याओं का भी समाधान करता है। आज के समय में घनी आबादी वाले इलाकों में जगह की कमी एक बड़ी चुनौती है, लेकिन इस सिस्टम को स्थापित करने के लिए छत पर मात्र 80 से 100 वर्ग फीट के छोटे से स्थान की आवश्यकता होती है, जो इसे मध्यम वर्गीय परिवारों और छोटे मकानों के लिए एक आदर्श विकल्प बनाता है। प्रदर्शन के मामले में भी यह बेहद प्रभावी है; यह सिस्टम प्रतिदिन औसतन 25 यूनिट तक बिजली पैदा करने में सक्षम है। यदि इसे सही ढंग से उपयोग किया जाए, तो एक सामान्य परिवार का मासिक बिजली बिल लगभग शून्य या नगण्य हो सकता है, जिससे न केवल आर्थिक बचत होगी बल्कि ऊर्जा संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

लागत और सब्सिडी का गणित: आम आदमी के लिए सुलभ हुई सौर ऊर्जा

सौर ऊर्जा को अपनाने की राह में सबसे बड़ी व्यावहारिक बाधा हमेशा से इसकी शुरुआती स्थापना लागत (Initial Cost) मानी जाती रही है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एक साथ बड़ी राशि निवेश करना अक्सर कठिन होता है, लेकिन सरकार ने इस चुनौती का एक बेहद किफायती और प्रभावी समाधान पेश किया है। कंपनी ने आमजन की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए एक ऐसा खाका तैयार किया है जिससे सौर ऊर्जा अब केवल संपन्न परिवारों तक सीमित नहीं रहेगी। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, इस पूरे 1 किलोवाट माइक्रो इन्वर्टर सिस्टम को घर की छत पर लगवाने का कुल खर्च लगभग 70,000 से 75,000 रुपये के बीच आता है, जो इसकी गुणवत्ता और भविष्य की बचत को देखते हुए एक उचित निवेश है। इस योजना का सबसे आकर्षक और राहत देने वाला पहलू उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दी जा रही वित्तीय सहायता है। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी सौर ऊर्जा नीतियों के तहत, इस सिस्टम को अपनाने वाले उपभोक्ताओं को 45,000 रुपये की भारी सब्सिडी सीधे प्रदान की जाएगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि उपभोक्ता की जेब पर पड़ने वाला वास्तविक भार आधे से भी कम रह जाएगा। इसके अलावा, सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और समावेशी विकास को प्राथमिकता देते हुए कंपनी ने एक और सराहनीय कदम उठाया है।  समाज के अति गरीब श्रेणी के उपभोक्ताओं को इस कुल लागत पर अतिरिक्त 20 प्रतिशत की विशेष छूट दी जाएगी। इस क्रांतिकारी पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक भी आधुनिक तकनीक पहुंचे और वह बिजली के भारी-भरकम बिलों के बोझ से मुक्त होकर आत्मनिर्भर बन सके।

अयोध्या बनेगी मॉडल सोलर सिटी: महापौर

समारोह को संबोधित करते हुए महापौर गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा, "प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का सपना है कि अयोध्या को देश की पहली मॉडल सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जाए। आज अयोध्या न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा का नेतृत्व भी कर रही है। निजी क्षेत्र की ऐसी भागीदारी से हम बहुत जल्द हर घर की छत पर सौर ऊर्जा के पैनल देखेंगे।" उन्होंने आगे कहा कि सौर ऊर्जा को अपनाना केवल पैसे बचाना नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को एक प्रदूषण मुक्त वातावरण देने का हमारा संकल्प है। भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव सिंह ने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में भारत वैश्विक स्तर पर अग्रणी बन रहा है। उन्होंने कहा कि 45 हजार रुपये की सब्सिडी देना इस बात का प्रमाण है कि सरकार चाहती है कि हर नागरिक 'ऊर्जा दाता' बने। कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित अतिथियों और नागरिकों ने सामूहिक रूप से अयोध्या को 'हरित और आत्मनिर्भर' बनाने का संकल्प लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से निजी और सरकारी प्रयासों का समन्वय रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब अयोध्या अपनी पूरी बिजली स्वयं उत्पन्न करेगी और देश के अन्य शहरों के लिए एक उदाहरण पेश करेगी। माइक्रो इन्वर्टर जैसी उन्नत तकनीक का आना यह दर्शाता है कि अब सौर ऊर्जा केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामान्य घरों की रसोई और रोशनी का आधार बनने के लिए तैयार है।

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