रंगों और उत्साह से सराबोर हुआ परमहंस महाविद्यालय, रंगोत्सव बना आकर्षण का केंद्र

खबर सार :-
परमहंस महाविद्यालय में भव्य रंगोत्सव कार्यक्रम का आयोजन हुआ। यह रंगोत्सव न केवल महिलाओं के सामूहिक उत्साह और प्रतिभा का प्रदर्शन था, बल्कि समाज में एकजुटता, सांस्कृतिक समरसता और आपसी भाईचारे का संदेश देने वाला आयोजन भी साबित हुआ।

रंगों और उत्साह से सराबोर हुआ परमहंस महाविद्यालय, रंगोत्सव बना आकर्षण का केंद्र
खबर विस्तार : -

अयोध्याः रामनगरी अयोध्या के परमहंस महाविद्यालय के प्रांगण में रामाय ट्रस्ट और श्री परमहंस शिक्षण प्रशिक्षण महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में भव्य रंगोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस रंग-बिरंगे उत्सव में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम का आयोजन रामाय ट्रस्ट और महाविद्यालय की प्रबंधिका वंदना उपाध्याय की ओर से किया गया। यह आयोजन सामाजिक सौहार्द, सांस्कृतिक समरसता और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी का प्रतीक रहा।

महिलाओं का हुआ स्वागत

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुई। महिलाओं ने अपने पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर लोकगीत और नृत्य प्रस्तुत किया, जिससे प्रांगण उत्सवमय हो गया। उपस्थित सैकड़ों महिलाओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दी और रंगों की खुशियों में डूबकर कार्यक्रम का आनंद लिया। लोक संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को जीवंत बना दिया और सभी ने इस अवसर का भरपूर आनंद उठाया।

इस अवसर पर प्रबंधिका वंदना उपाध्याय ने उपस्थित महिलाओं का स्वागत करते हुए कहा कि समाज में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने महिलाओं को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा दी। उनका कहना था कि ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम महिलाओं को अपने हुनर दिखाने और समाज में संवाद स्थापित करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि रंगोत्सव जैसे आयोजनों से महिलाओं को अपने सामाजिक और पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाए रखने की क्षमता मिलती है।

 एकता और भाईचारे का संदेश

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, प्रथम महापौर ऋषिकेश उपाध्याय ने कहा कि होली के बाद आयोजित होने वाला रंगोत्सव सामाजिक एकता और भाईचारे को बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में त्योहार केवल आनंद के लिए नहीं होते, बल्कि ये आपसी मेल-जोल और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का जरिया भी हैं। रंगोत्सव पुरानी मनमुटावों को भूलकर नए सिरे से रिश्तों को जोड़ने की प्रेरणा देता है।

कार्यक्रम के दौरान रंग पंचमी की परंपरा, लोक संगीत, नृत्य और पारंपरिक व्यंजनों का भी आनंद लिया गया। महिलाओं ने अपने पारंपरिक पोशाकों और सजावट से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। पूरे आयोजन में उत्साह, उमंग और सहयोग का माहौल बना रहा। यह कार्यक्रम यह सिद्ध करता है कि सांस्कृतिक आयोजनों से न केवल परंपराएं जीवित रहती हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और मेल-जोल का वातावरण भी बनता है।

बड़ी संख्या में पहुंची महिलाएं

इस भव्य कार्यक्रम में आरटीओ रितु सिंह, अशोका द्विवेदी, रीना द्विवेदी, मनोरमा दुबे, डॉ. नीलम सिंह, प्रभा वर्मा, उषा मिश्रा, डा. मंजूषा पाण्डेय, सरस्वती पाठक, कविता सिंह, मीना पाण्डेय, उर्मिला मिश्रा, प्रज्ञा मिश्रा, सारिका गर्ग, स्मिता सहाय, वंदना सिंह, प्रतिभा द्विवेदी, पूर्णिमा तिवारी, मीनू अग्रवाल, श्वेता टंडन, मयूरी तिवारी, डा. वंदना सिंह, कंचन जायसवाल, स्मता तिवारी सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया और इसे यादगार बना दिया।

इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में सकारात्मक प्रभाव डालते हैं और लोगों को मिलजुल कर खुशियों को साझा करने का अवसर प्रदान करते हैं।

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