कोलकाता: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ गृह मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर कथित आपत्तिजनक एवं भड़काऊ टिप्पणी करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला सिलीगुड़ी साइबर अपराध पुलिस थाने में एक अधिवक्ता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, शिकायत अधिवक्ता रिंकी सेन चटर्जी ने दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ममता बनर्जी ने 2 जून को कोलकाता के रानी रासमणि रोड पर आयोजित एक विरोध सभा के दौरान ऐसे बयान दिए, जिनमें केंद्रीय गृह मंत्रालय और गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका को लेकर संकेतात्मक आरोप लगाए गए। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन टिप्पणियों से सार्वजनिक भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है और संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गलत संदेश जा सकता है।
शिकायत के अनुसार, विवादित बयान बांग्लादेशी नागरिक उस्मान हादी की हत्या से जुड़े मामले के संदर्भ में दिया गया था। आरोप है कि उस्मान हादी की दिसंबर 2024 में बांग्लादेश में हत्या कर दी गई थी। बाद में इस मामले से जुड़े कथित आरोपी जनवरी में मेघालय सीमा के रास्ते भारत में प्रवेश कर पश्चिम बंगाल पहुंचे थे। पश्चिम बंगाल पुलिस की विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने उन्हें गिरफ्तार किया था।
अधिवक्ता रिंकी सेन चटर्जी का आरोप है कि ममता बनर्जी ने अपने सार्वजनिक संबोधन में इस मामले को लेकर ऐसे संकेत दिए, जिनसे गृह मंत्रालय की भूमिका पर संदेह उत्पन्न हो सकता है। शिकायत में कहा गया है कि यदि इस विषय में कोई गंभीर जानकारी या आरोप थे, तो मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए उन्हें सीधे केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के समक्ष उठाया जा सकता था। इसके बजाय सार्वजनिक मंच से दिए गए बयान दो देशों के बीच संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।
शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि इस तरह के बयान भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक संबंधों पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। साथ ही उन्होंने आशंका जताई कि इन टिप्पणियों के कारण बांग्लादेश में रहने वाले हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है। शिकायत में कहा गया है कि संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मामलों में सार्वजनिक रूप से दिए गए बयान सामाजिक और राजनीतिक तनाव को बढ़ाने का कारण बन सकते हैं।
ममता बनर्जी ने 2 जून को आयोजित सभा में कहा था कि पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने बांग्लादेश से आए एक आरोपी को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद पड़ोसी देश में विरोध प्रदर्शन हुए। उन्होंने अपने भाषण में यह भी उल्लेख किया था कि कुछ लोग मेघालय के रास्ते पश्चिम बंगाल में प्रवेश करते हैं और बाद में कानून-व्यवस्था एजेंसियों द्वारा गिरफ्तार कर लिए जाते हैं। उनके बयान में कथित तौर पर इस पूरे घटनाक्रम के पीछे किसी बड़े षड्यंत्र की संभावना का भी संकेत दिया गया था।
फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और संबंधित बयानों तथा उपलब्ध साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान भाषण के वीडियो, सार्वजनिक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया जाएगा। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
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