कोलकाता: दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ हुई कथित धक्का-मुक्की और हमले की घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है। टीएमसी प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जिम्मेदार ठहराते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं ने भी घटना की निंदा की है।
घटना के बाद ममता बनर्जी कोलकाता स्थित अपोलो अस्पताल पहुंचीं, जहां अभिषेक बनर्जी का उपचार चल रहा है। अस्पताल से लौटने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया मंच पर एक संक्षिप्त लेकिन तीखा संदेश साझा करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “शासक अब हत्यारे बन गए हैं। भाजपा, तुम्हें शर्म आनी चाहिए।” इसके साथ ही उन्होंने टीएमसी की ओर से जारी एक पोस्ट और घटना से जुड़ा वीडियो भी साझा किया।
टीएमसी द्वारा जारी बयान में दावा किया गया कि अभिषेक बनर्जी चुनाव बाद हिंसा के कथित पीड़ित संजू कर्मकार के परिवार से मिलने गए थे। पार्टी का आरोप है कि भाजपा समर्थित उपद्रवियों ने उन्हें रोकने और डराने का प्रयास किया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पीड़ित परिवार का साथ नहीं छोड़ा और उनके समर्थन में डटे रहे।
इस घटना को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि सोनारपुर में चुनाव बाद हिंसा से प्रभावित परिवारों से मिलने जा रहे एक प्रमुख विपक्षी नेता पर हमला बेहद गंभीर और चिंताजनक है। खड़गे ने आरोप लगाया कि पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था का अभाव लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और यह राजनीतिक प्रतिशोध की भावना को दर्शाता है।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि सभी विपक्षी नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। खड़गे ने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन किसी भी परिस्थिति में हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इस घटना की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक प्रमुख विपक्षी नेता पर इस प्रकार का हमला लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि पर्याप्त पुलिस सुरक्षा का अभाव कई सवाल खड़े करता है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
इस घटना ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक सरगर्मियों को और तेज कर दिया है। एक ओर टीएमसी इसे विपक्षी नेताओं को डराने की साजिश बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल भी लोकतांत्रिक अधिकारों और नेताओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में प्रमुख चर्चा का विषय बना रह सकता है।
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