NASA Molecular Cloud Discovery : अंतरिक्ष की 'बर्फीली' गुत्थी, नासा के SPHEREx मिशन ने खींची मॉलिक्यूलर क्लाउड की अद्भुत तस्वीर, खुलेंगे जीवन के राज!

खबर सार :-
NASA Molecular Cloud Discovery : नासा के SPHEREx मिशन ने अंतरिक्ष के मॉलिक्यूलर क्लाउड में छिपे विशाल बर्फीले भंडारों की खोज की है। जानिए कैसे साइग्नस एक्स क्षेत्र में जमी यह बर्फ तारों के जन्म और पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति की कहानी बयां कर रही है।

NASA Molecular Cloud Discovery : अंतरिक्ष की 'बर्फीली' गुत्थी, नासा के SPHEREx मिशन ने खींची मॉलिक्यूलर क्लाउड की अद्भुत तस्वीर, खुलेंगे जीवन के राज!
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नई दिल्ली: ब्रह्मांड के अनंत विस्तार में छिपे रहस्य अक्सर मानवीय कल्पना को चुनौती देते हैं। हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अंतरिक्ष की एक ऐसी विस्मयकारी तस्वीर साझा की है, जिसने वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष प्रेमियों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। नासा ने सवाल उठाया है— "क्या हर बादल की अपनी एक बर्फीली परत होती है?" यह सवाल हमारे वायुमंडल के बादलों के बारे में नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में तैर रहे उन विशाल 'मॉलिक्यूलर क्लाउड्स' (आणविक बादलों) के बारे में है, जिन्हें तारों का जन्मस्थान कहा जाता है।

NASA Molecular Cloud Discovery : तारों की नर्सरी में जमी है बर्फ की चादर

मिल्की वे यानी हमारी आकाशगंगा में फैले ये मॉलिक्यूलर क्लाउड महज गैस और धूल के गुबार नहीं हैं। ये ब्रह्मांड के वे 'कोल्ड स्टोरेज' हैं जहाँ तापमान शून्य से सैकड़ों डिग्री नीचे रहता है। नासा के SPHEREx मिशन ने इन बादलों के भीतर छिपी बर्फ का एक विस्तृत और जटिल नक्शा तैयार किया है। शोध में पाया गया है कि इन बादलों में मौजूद धूल के सूक्ष्म कणों पर पानी, कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड की परतें जमी हुई हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्रह्मांड का अधिकांश जल इन्हीं बर्फीले भंडारों में निर्मित होता है। यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यही बर्फ आगे चलकर ग्रहों के निर्माण और जीवन की उत्पत्ति के लिए रासायनिक आधार प्रदान करती है।

NASA Molecular Cloud Discovery : साइग्नस एक्स, जहाँ जन्म ले रहे हैं नए सूरज

नासा द्वारा जारी की गई ताज़ा तस्वीर 'साइग्नस एक्स' (Cygnus X) क्षेत्र की है। यह इलाका हमारी गैलेक्सी का सबसे अशांत और सक्रिय तारा-निर्माण क्षेत्र माना जाता है। तस्वीर में गहरे नीले रंग की चमक दरअसल 'वॉटर आइस' (पानी की बर्फ) को दर्शाती है। नारंगी और नीले रंग के महीन तंतुओं जैसी संरचनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि यहाँ गुरुत्वाकर्षण के चलते पदार्थ सिमट रहा है, जो भविष्य में नए तारों को जन्म देगा।

NASA Molecular Cloud Discovery : जीवन की केमिस्ट्री का गहरा कनेक्शन

इंटरस्टेलर (अंतरतारकीय) बर्फ का रासायनिक विश्लेषण केवल खगोल विज्ञान तक सीमित नहीं है। यह सीधे तौर पर पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत से जुड़ा है। खगोलविदों के अनुसार, जब ये घने बादल सिकुड़कर तारों और उनके चारों ओर घूमने वाले ग्रहों का निर्माण करते हैं, तो यही बर्फ पानी और कार्बनिक अणुओं के रूप में उन ग्रहों तक पहुँचती है। नासा का यह मिशन हमें यह समझने में मदद कर रहा है कि क्या पृथ्वी के महासागरों में मौजूद पानी का स्रोत भी इन्हीं बर्फीले बादलों के अवशेष हैं। ब्रह्मांड की इस रासायनिक गुत्थी को सुलझाकर हम अपनी स्वयं की उत्पत्ति के और करीब पहुँच पाएंगे।