Suryakumar Yadav T20 World Cup 2026 : भारतीय टी20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) के लिए साल 2026 का टी20 वर्ल्ड कप केवल एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि एक अधूरा सपना पूरा होने जैसा था। अहमदाबाद के उसी नरेंद्र मोदी स्टेडियम में, जहाँ 2023 के वनडे वर्ल्ड कप में भारत का दिल टूटा था, सूर्या की कप्तानी वाली 'यंग इंडिया' ने इतिहास रच दिया। हाल ही में सूर्यकुमार यादव ने अपनी कप्तानी, व्यक्तिगत जीवन और अपनी पत्नी देविशा के उस 'कठोर' संवाद का जिक्र किया जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी।
सूर्यकुमार यादव ने साफ किया कि टीम इंडिया का लक्ष्य न केवल वर्ल्ड कप जीतना था, बल्कि इसे अहमदाबाद के मैदान पर ही जीतना था। सूर्या ने कहा, "हम भारत में वर्ल्ड कप जीतना चाहते थे और उससे भी ज्यादा जरूरी था कि हम उसी स्टेडियम (अहमदाबाद) में जीतें। 2023 की हार के बाद यह हमारे लिए बहुत मायने रखता था।" हालांकि 2024 की विश्व विजेता टीम में रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गज थे, लेकिन 2026 की इस टीम को सूर्या ने अपनी ऊर्जा से सींचा। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि 2024 की टीम अनुभवी थी, जबकि 2026 की टीम जुनून और उत्साह से भरी थी।
अपनी कप्तानी के आंकड़ों पर बात करते हुए सूर्या ने एक बेहद दिलचस्प तुलना की। 52 मैचों में 42 जीत के साथ उनका सफलता प्रतिशत 80.76% है। इस पर मुस्कुराते हुए सूर्या बोले "जो प्रतिशत मैं स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई के जरिए हासिल करना चाहता था, वह आज मुझे यहाँ क्रिकेट में मिल रहा है। वहां मैं कभी 50-60% से आगे नहीं बढ़ पाया, लेकिन यहाँ आंकड़े सुखद हैं।" सूर्या ने बताया कि उनके पिता बीएआरसी (BARC) में इंजीनियर थे और परिवार चाहता था कि वह खूब पढ़ें, लेकिन जब उन्हें समझ आया कि यह लड़का 'कंट्रोल' से बाहर है और सिर्फ खेल में खुश है, तो उन्होंने पूरा साथ दिया।
सूर्या ने अपने करियर के टर्निंग पॉइंट का श्रेय अपनी पत्नी देविशा शेट्टी को दिया। उन्होंने बताया कि 2016 में शादी के बाद सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन 2018 में देविशा ने उनसे एक कड़ा सवाल पूछा था। देविशा ने पूछा था, "तुम्हारे साथ खेलने वाले कई खिलाड़ी आज टीम इंडिया के लिए खेल रहे हैं, तुम्हारा क्या प्लान है? तुम एक कदम आगे कैसे बढ़ोगे?" सूर्या कहते हैं कि वह कोई बहस नहीं बल्कि एक गंभीर चर्चा थी। उसके बाद सूर्या ने अपनी डाइट, दोस्तों के सर्कल और लाइफस्टाइल में बड़े बदलाव किए। इसी का नतीजा था कि 2018 के बाद आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन निखरता गया और अंततः 2021 में उन्होंने नीली जर्सी पहनी।
मैदान पर 360-डिग्री शॉट लगाने वाले सूर्या घर पर बिल्कुल जमीन से जुड़े रहते हैं। उन्होंने साझा किया कि देविशा ने उन्हें सिखाया है कि क्रिकेट को घर के बाहर ही छोड़कर आएं। विनम्रता का पाठ: सूर्या ने बताया, "मेरी पत्नी हमेशा ईमानदार रहती है, कभी-कभी वह बहुत कठोर (Brutal) भी होती है। उसने मुझे सिखाया कि चाहे कितनी भी बड़ी उपलब्धि हो, जमीन पर रहना जरूरी है। घर पर मैं सूर्यकुमार यादव नहीं होता। खाना खाने के बाद मुझे अपनी प्लेट खुद सिंक में रखनी पड़ती है।" सूर्यकुमार यादव की यह कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 30 साल की उम्र के करीब इंटरनेशनल डेब्यू करने वाले सूर्या ने साबित कर दिया कि अगर जुनून सच्चा हो और साथ देने वाला सही हो, तो सफलता का प्रतिशत आसमान छू सकता है।