चेन्नई: क्रिकेट के इतिहास में कुछ तारीखें ऐसी होती हैं जिन्हें कैलेंडर से कभी मिटाया नहीं जा सकता। 21 मई 1997 की वो दोपहर भी कुछ ऐसी ही थी, जिसने वनडे क्रिकेट खेलने और देखने का नजरिया हमेशा के लिए बदल दिया। चेन्नई का एमए चिदंबरम स्टेडियम (चेपक) खचाखच भरा हुआ था, उमस इतनी थी कि खिलाड़ियों का दम फूल रहा था। पेप्सी इंडिपेंडेंस कप के इस बेहद अहम मुकाबले में पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी भारत और पाक आमने-सामने थे। इसी मैच में इतिहास की वो अमर पारी देखने को मिली जिसे आज भी Saeed Anwar 194 against India के नाम से क्रिकेट के सुनहरे पन्नों में याद किया जाता है। बाएं हाथ के इस पाक सलामी बल्लेबाज ने उस दिन भारतीय गेंदबाजों की जो धुनाई की, उसकी गूंज सालों तक सुनाई देती रही।
चेन्नई की पिघला देने वाली गर्मी में टॉस जीतकर पाक ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था। अनवर जब क्रीज पर उतरे तो उनके इरादे बेहद साफ थे। उन्होंने भारतीय तेज आक्रमण और स्पिनरों को शुरुआत से ही बैकफुट पर धकेलना शुरू कर दिया। लेकिन जैसे-जैसे पारी आगे बढ़ी, चेन्नई की उमस ने अनवर की परीक्षा लेनी शुरू कर दी। पारी के 19वें ओवर तक आते-आते सईद अनवर भयंकर डिहाइड्रेशन और ऐंठन (क्रैम्प्स) से जूझ रहे थे। उनके लिए क्रीज पर खड़ा होना भी दूभर हो चुका था।
ऐसे नाजुक मौके पर पाक ने एक अनोखी रणनीति अपनाई। युवा ऑलराउंडर शाहिद अफरीदी को अनवर के लिए रनर के तौर पर मैदान पर भेजा गया। इसके बाद जो हुआ, उसने भारतीय टीम की मुश्किलें और बढ़ा दीं। अब अनवर को विकेटों के बीच दौड़ने की अपनी ऊर्जा नहीं गंवानी थी। वे एक ही जगह खड़े होकर सिर्फ बाउंड्री डील कर रहे थे। रनर मिलने के बाद अनवर का ध्यान केवल गेंद को सीमा रेखा के पार भेजने पर केंद्रित हो गया। Saeed Anwar 194 against India की इस ऐतिहासिक पारी की सबसे बड़ी ताकत यही थी कि उन्होंने बिना दौड़े ही चौके-छक्कों से भारतीय खेमे में खलबली मचा दी थी।
उस समय भारतीय गेंदबाजी आक्रमण में अनिल कुंबले, जवागल श्रीनाथ और वेंकटेश प्रसाद जैसे अनुभवी नाम शामिल थे। लेकिन उस दिन चेपक की पिच पर अनवर का बल्ला नहीं, बल्कि एक तलवार चल रही थी। अनवर ने केवल 146 गेंदों का सामना किया और 194 रनों की जादुई पारी खेल डाली। इस पारी के दौरान उन्होंने 22 कड़क चौके और 5 गगनचुंबी छक्के लगाए।
मैच का सबसे रोमांचक पल तब आया जब भारत के सबसे भरोसेमंद लेग स्पिनर अनिल कुंबले गेंदबाजी आक्रमण पर आए। अनवर ने कुंबले की लाइन-लेंथ को पूरी तरह बिगाड़ते हुए लगातार तीन गेंदों पर तीन शानदार छक्के जड़ दिए। पूरा स्टेडियम सन्नाटे में डूब गया था। कप्तान सचिन तेंदुलकर ने मैदान पर हर तरह की फील्डिंग सजाकर देख ली, लेकिन अनवर की टाइमिंग और प्लेसमेंट इतनी लाजवाब थी कि गेंद फील्डर्स को छकाते हुए सीधे बाउंड्री के बाहर गिर रही थी।
शायद ही कोई विश्वास कर पाए, लेकिन उस दिन पाक टीम का दूसरा सर्वोच्च स्कोर केवल 39 रन था, जो इंजमाम-उल-हक ने बनाया था। पाक ने निर्धारित 50 ओवरों में 5 विकेट पर 327 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। इसका सीधा मतलब यह था कि पूरी टीम के स्कोर का आधे से ज्यादा हिस्सा अकेले अनवर के बल्ले से निकला था। क्रिकेट समीक्षक मानते हैं कि वह मुकाबला भारत बनाम पाक नहीं, बल्कि पूरी तरह से Saeed Anwar 194 against India का एकतरफा शो बन गया था।
क्रिकेट के गलियारों में इस पारी का महत्व इसलिए भी सबसे ज्यादा है क्योंकि यह उस दौर में आई थी जब आज की तरह बड़े और भारी बल्ले नहीं हुआ करते थे। न ही टी-20 क्रिकेट का जन्म हुआ था और बाउंड्री की सीमाएं भी काफी बड़ी हुआ करती थीं। अनवर की इस 194 रनों की पारी ने सर विवियन रिचर्ड्स के 189 रनों के 13 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़कर इतिहास रचा था।
इसके बाद के सालों में सनथ जयसूर्या, सईद अनवर खुद और सनत जयसूर्या जैसे कई दिग्गजों ने कोशिश की, लेकिन कोई भी इस जादुई आंकड़े को पार नहीं कर सका। वनडे क्रिकेट इतिहास में Saeed Anwar 194 against India का यह रिकॉर्ड पूरे 13 सालों तक अटूट रहा। इस ऊंचे शिखर को आखिरकार साल 2010 में भारत के ही महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने तोड़ा, जब उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ग्वालियर में वनडे इतिहास का पहला दोहरा शतक (200 रन नाबाद) जड़ा।
इस विशाल स्कोर के जवाब में भारतीय टीम ने भी घुटने नहीं टेके। राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) ने शानदार 107 रनों की शतकीय पारी खेली, लेकिन भारत निर्धारित ओवरों में 292 रन ही बना सका और यह मुकाबला पाक ने 35 रनों से जीत लिया। हालांकि भारत यह मैच हार गया था, लेकिन चेन्नई के दर्शकों ने जो किया उसने दुनिया का दिल जीत लिया। जैसे ही सईद अनवर आउट होकर पवेलियन की तरफ लौटने लगे, पूरे चेपक स्टेडियम में मौजूद भारतीय फैंस ने खड़े होकर उनके लिए तालियां बजाईं। यह खेल भावना की एक ऐसी अद्भुत मिसाल थी जिसे भारत-पाक क्रिकेट इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। भारतीय खिलाड़ियों ने भी अनवर की इस बेमिसाल पारी के लिए मैदान पर ही उनकी पीठ थपथपाई थी।
आज के आधुनिक दौर में भले ही वनडे मैचों में दोहरे शतक और तिहरे शतक की बातें आम हो गई हों, लेकिन जो क्लास, टाइमिंग और विपरीत परिस्थितियों में लड़ने का जज्बा Saeed Anwar 194 against India की पारी में देखने को मिला था, उसकी तुलना किसी और पारी से नहीं की जा सकती। 21 मई की यह तारीख हमेशा क्रिकेट फैंस को एक ऐसे बवंडर की याद दिलाती रहेगी जिसने चेन्नई की धरती पर रनों का ऐसा सैलाब लाया था जिसे सूखने में पूरे 13 साल लग गए। खेल के इतिहास में Saeed Anwar 194 against India की यह क्लासिक पारी हमेशा अमर रहेगी।