Duke Ball : खेल की दुनिया अक्सर राजनीति और युद्ध से दूर मानी जाती है, लेकिन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है। नवाबों के शहर लखनऊ में जहाँ इकाना स्टेडियम की पिच पर क्रिकेट की हलचल तेज है, वहीं सात समंदर पार इंग्लैंड में आगामी क्रिकेट सीजन पर अनिश्चितता के काले बादल मंडरा रहे हैं। कारण कोई खराब मौसम नहीं, बल्कि मध्य-पूर्व (खाड़ी देशों) में जारी युद्ध है, जिसने पारंपरिक 'ड्यूक' गेंदों की सप्लाई चेन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष ने समुद्री और हवाई व्यापारिक मार्गों को असुरक्षित बना दिया है। दक्षिण एशिया से यूके तक जाने वाली शिपिंग खेप इस तनाव की वजह से फंसी हुई है। लखनऊ के स्थानीय क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के लॉजिस्टिक संकट का असर भविष्य में अन्य क्रिकेटिंग गियर (साज-सामान) पर भी पड़ सकता है।
इंग्लिश क्रिकेट सीजन की शुरुआत 3 अप्रैल से होनी है, जिसमें 18 फर्स्ट क्लास काउंटियों की भिड़ंत होगी। लेकिन आयोजकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उनके पास गेंदों का स्टॉक सामान्य के मुकाबले महज आधा रह गया है। ब्रिटिश क्रिकेट बॉल्स लिमिटेड के मालिक दिलीप जाजोदिया ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार, उपमहाद्वीप (भारत-पाकिस्तान क्षेत्र) की फैक्ट्रियों में गेंदें तैयार रखी हैं, लेकिन उन्हें इंग्लैंड तक पहुँचाना नामुमकिन सा हो गया है।
संकट के बीच जाजोदिया ने हल्के-फुल्के अंदाज में वैश्विक राजनीति पर भी चुटकी ली। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें इस युद्ध का पहले से आभास होता, तो वह शायद डोनाल्ड ट्रंप से पहले ही गुजारिश करते कि क्रिकेट सीजन शुरू होने तक किसी भी तरह के हमले न करें। हालांकि, यह मजाकिया लहजा उस गहरी चिंता को भी दर्शाता है जो क्रिकेट उद्योग इस समय महसूस कर रहा है। फिलहाल, सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB) इस कमी को पूरा करने के लिए किसी वैकल्पिक व्यवस्था या गेंदों के दूसरे ब्रांड की ओर रुख करेगा, या फिर सीजन को सीमित संसाधनों के साथ ही आगे बढ़ाया जाएगा।