नई दिल्लीः देश भर में वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों का दौर जारी है। इस बीच वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। इस मामले में अब अगली सुनवाई 15 मई को न्यायमूर्ति बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने होगी।
वक्फ कानून की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ के समक्ष दलील दी कि संसद द्वारा व्यापक विचार-विमर्श के बाद पारित इस कानून पर सरकार का पक्ष सुने बिना कोई रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। मेहता ने सुनवाई को अगले सप्ताह तक टालने का आग्रह किया, जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया। अब 15 मई को इस मामले में अगली सुनवाई होगी। इससे पूर्व केंद्र सरकार ने 17 अप्रैल को शीर्ष अदालत को आश्वासन दिया था कि वह 5 मई तक ‘उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ’ सहित वक्फ संपत्तियों को न तो गैर-अधिसूचित करेगा और न ही केंद्रीय वक्फ परिषद और बोर्डों में कोई नियुक्ति करेगा। केंद्र ने पीठ को यह आश्वासन देते हुए कहा कि संसद द्वारा ‘उचित विचार-विमर्श’ के साथ पारित कानून को सरकार की सुनवाई के बिना स्थगित नहीं किया जाना चाहिए।
सीजेआई संजीव खन्ना ने वक्फ संधोधन को लेकर कहा कि आदेश पारित करने से पहले इस मामले पर उचित सुनवाई होनी चाहिए। न्यायालय को हर किसी की बात सुननी होगी। सीजेआई संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ वक्फ मामले पर सुनवाई के लिए बैठी थी। इस दौरान सीजेआई ने कहा कि कुछ ऐसे पहलू हैं, जिनसे केंद्र सरकार को निपटना है, लेकिन उन्हें स्पष्टीकरण की आवश्यकता है। मैं अपने कार्यकाल के अंतरिम चरण में कोई निर्णय या आदेश सुरक्षित नहीं रखना चाहता हूं। इस मामले की सुनवाई जल्द ही करनी होगी और यह मेरे समक्ष नहीं होगा। सीजेआई ने आगे कहा कि हमने केंद्र सरकार के जवाबी हलफनामे पर बहुत गहराई से विचार नहीं किया है। हां, केंद्र ने वक्फ संपत्तियों के संबंध में कुछ बिंदु उठाए हैं और कुछ विवादित आंकड़े दिए हैं, जिन पर कुछ विचार करने की आवश्यकता होगी।
बता दें कि सीजेआई संजीव खन्ना 13 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं और इसी को देखते हुए उन्होंने कहा कि वे कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आदेश सुरक्षित नहीं रखना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने ये केस दूसरी पीठ के समक्ष रखा है। संजीव खन्ना के सेवानिवृत्त होने के एक दिन बाद न्यायमूर्ति गवई उनका स्थान लेंगे।
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