Delhi Riots Case : सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, शरजील-उमर को राहत नहीं, पांच आरोपियों को मिली आज़ादी

खबर सार :-
Delhi Riots Case : दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम और उमर खालिद को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा। कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज की, जबकि पांच अन्य आरोपियों को मिली राहत। जानें इस फैसले के प्रमुख बिंदु और अदालत के आदेश के बारे में।

Delhi Riots Case : सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, शरजील-उमर को राहत नहीं, पांच आरोपियों को मिली आज़ादी
खबर विस्तार : -

 Delhi Riots Case : दिल्ली दंगों से जुड़े विवादित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने शरजील इमाम (Sharjeel Imam) और उमर खालिद (Umar Khalid) की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिससे दोनों आरोपियों को फिलहाल जेल में रहना होगा। हालांकि, इस मामले में पांच अन्य आरोपियों को राहत देते हुए उनकी जमानत याचिकाएं मंजूर की गई हैं।

 Delhi Riots Case : शरजील और उमर पर क्या थे आरोप?

दिल्ली दंगों के दौरान नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी (NRC) के खिलाफ प्रदर्शन के बाद जो हिंसा भड़की, उसमें शरजील इमाम और उमर खालिद को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में नामित किया गया था। इन दोनों आरोपियों पर UAPA (Unlawful Activities Prevention Act)  और भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, इन दंगों में 53 लोगों की जान गई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। हिंसा के दौरान हुए आगजनी और तोड़फोड़ के आरोप भी इन पर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना कि शरजील और उमर की कथित भूमिका दिल्ली दंगों में गंभीर रही है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गवाहों की जांच पूरी होने के बाद, या अधिकतम एक साल के भीतर, दोनों आरोपी निचली अदालत से जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत से यह भी कहा है कि वह इस आदेश के प्रभाव से प्रभावित हुए बिना अपनी सुनवाई जारी रखे।

 Delhi Riots Case : पांच अन्य आरोपियों को मिली जमानत

वहीं, दिल्ली दंगों से जुड़े इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पांच अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं मंजूर की हैं। ये आरोपी हैं गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद। अदालत ने माना कि इन आरोपियों के निरंतर कारावास को जरूरी नहीं माना और इनकी जमानत याचिकाएं स्वीकार कर लीं। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 695 विभिन्न मामलों में जांच की थी, जिसमें दंगों, आगजनी और गैरकानूनी सभाओं के आरोप थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इन मामलों में 68 फीसदी आरोपियों को बरी किया गया, जबकि 16 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई गई। इस फैसले के बाद 1,738 लोग जमानत पर हैं, जबकि 108 लोग अब भी जेल में बंद हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय दोनों पक्षों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि यह दिल्ली दंगों से जुड़े आरोपों की गंभीरता को और बढ़ाता है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि जमानत पर निर्णय लेने से पहले गवाहों की जांच पूरी करना आवश्यक है।
 

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