Sonia Voter List Controversy: भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से पहले मतदाता सूची में कथित रूप से नाम दर्ज होने से जुड़े मामले में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की याचिका पर सुनवाई फिलहाल टल गई है। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में इस प्रकरण में दायर रिवीजन पिटीशन पर सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन सोनिया गांधी की ओर से विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगे जाने के बाद अदालत ने सुनवाई स्थगित कर दी। कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 फरवरी की तारीख तय की है।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान सोनिया गांधी की तरफ से अदालत को अवगत कराया गया कि रिवीजन पिटीशन पर तथ्यों और कानूनी बिंदुओं के साथ जवाब तैयार करने के लिए और समय की आवश्यकता है। बचाव पक्ष ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विस्तृत और तथ्यात्मक उत्तर दाखिल किया जाना जरूरी है। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए सुनवाई आगे के लिए टाल दी।
यह रिवीजन पिटीशन अधिवक्ता विकास त्रिपाठी द्वारा दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से पहले मतदाता सूची में कथित तौर पर अपना नाम शामिल कराया था। पिटीशन के अनुसार, सोनिया गांधी को 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता मिली थी, जबकि उनका नाम 1980 की नई दिल्ली की वोटर लिस्ट में दर्ज पाया गया।
याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है कि जब सोनिया गांधी 1980 में भारतीय नागरिक नहीं थीं, तब मतदाता सूची में उनका नाम किस आधार पर जोड़ा गया। पिटीशन में यह भी उल्लेख है कि वर्ष 1982 में उनका नाम वोटर लिस्ट से हटाया गया था, जो अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। याचिका के अनुसार, यदि नागरिकता 1983 में मिली, तो उससे पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए कौन-से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे।
रिवीजन पिटीशन में आशंका जताई गई है कि मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया हो सकता है। हालांकि, यह आरोप अभी न्यायिक जांच के दायरे में हैं और अदालत द्वारा तय की जाने वाली प्रक्रिया पर निर्भर करेंगे।
गौरतलब है कि 9 दिसंबर को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। यह नोटिस भी इसी रिवीजन पिटीशन के आधार पर जारी किया गया था। इससे पहले, मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सितंबर 2025 में दायर उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच की मांग की गई थी। उसी आदेश को चुनौती देते हुए वर्तमान रिवीजन पिटीशन दाखिल की गई है।
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