Satya Pal Malik: जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक समेत 5 लोगों के खिलाफ जम्मू-कश्मीर के किरू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (hydropower project) से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गुरुवार को चार्जशीट दाखिल (charge sheet filed) की है। यह मामला करीब 2200 करोड़ रुपये के सिविल वर्क कॉन्ट्रैक्ट में अनियमितताओं का है। सीबीआई ने इसी मामले के सिलसिले में 22 फरवरी 2024 को दिल्ली और जम्मू कश्मीर में 29 ठिकानों पर भी छापेमारी की गई थी।
दिलचस्प बात यह है कि इस ठेके के आवंटन में रिश्वतखोरी का मुद्दा खुद मलिक ने उठाया था, जब वह 23 अगस्त 2018 से 30 अक्टूबर 2019 तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे। सत्यपाल मलिक ने तब आरोप लगाया था कि उन्हें दो फाइलों को मंजूरी देने के लिए 300 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी, जिनमें से एक किरू जलविद्युत परियोजना से संबंधित थी, लेकिन उन्होंने इसे लेने से इनकार कर दिया। जिसके बाद अप्रैल 2022 में जम्मू-कश्मीर सरकार के कहने पर सीबीआई ने मामला दर्ज किया था। मलिक अगस्त 2018 से अक्टूबर 2019 तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे थे।
हालांकि सीबीआई की छापेमारी के बाद मलिक ने भ्रष्टाचार के सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा था, "सीबीआई ने मेरे घर पर छापा मारा, लेकिन जिन लोगों के खिलाफ मैंने भ्रष्टाचार की शिकायत की थी, उनकी जांच नहीं की गई। उन्हें मेरे पास सिर्फ 4-5 कुर्ता-पायजामा ही मिलेगा। मैं किसान का बेटा हूं, मैं डरूंगा नहीं।"
उधर चार्जशीट दाखिल होने के बाद पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर करते हुए कहा कि वह अस्पताल में भर्ती हैं और किसी से बात करने की स्थिति में नहीं हैं। अभी मेरी हालत बहुत खराब है। मैं 11 मई से राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती हूँ। मुझे संक्रमण के कारण भर्ती कराया गया था। अब हालत बहुत गंभीर है और पिछले तीन दिनों से मेरी किडनी डायलिसिस चल रही है। उन्होंने लिखा कि उनके पास शुभचिंतकों के फोन आ रहे हैं, लेकिन वह जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
बता दें कि सत्यपाल मलिक को 1 मई को यूरिन इन्फेक्शन से जुड़ी गंभीर जटिलताओं के बाद गंभीर हालत में दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है था। पेशाब में बहुत ज़्यादा दर्द और तकलीफ़ की शिकायत की थी। उनके एक करीबी ने बताया कि उनकी दोनों किडनी फेल हो गई है। उनकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।
गौरतलब है कि सीबीआई ने भ्रष्टाचार के मामले में 2 एफआईआर दर्ज की थीं। पहली एफआईआर करीब 60 करोड़ रुपये का ठेका जारी करने में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी है। यह रकम 2017-18 में जम्मू-कश्मीर कर्मचारी स्वास्थ्य देखभाल बीमा योजना का ठेका देने के लिए एक बीमा कंपनी से रिश्वत के तौर पर ली गई थी। दूसरी एफआईआर 2019 में किरू हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट (एचईपी) के सिविल वर्क के लिए 2,200 करोड़ रुपये का ठेका एक निजी फर्म को देने में भ्रष्टाचार से जुड़ी है। CBI इन दोनों मामलों की जांच कर रही है।
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