भारतीय तटरक्षक बल को मिला नया ‘समुद्र रक्षक’, सबसे बड़े स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ की ऐतिहासिक एंट्री

खबर सार :-
‘समुद्र प्रताप’ का तटरक्षक बल में शामिल होना भारत की समुद्री सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर रक्षा नीति का सशक्त प्रतीक है। यह पोत प्रदूषण नियंत्रण से लेकर सुरक्षा और बचाव अभियानों तक बहुआयामी भूमिका निभाएगा। स्वदेशी तकनीक, आधुनिक क्षमताएं और महिला अधिकारियों की भागीदारी इसे भारत के समुद्री भविष्य की मजबूत आधारशिला बनाती है।

भारतीय तटरक्षक बल को मिला नया ‘समुद्र रक्षक’, सबसे बड़े स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ की ऐतिहासिक एंट्री
खबर विस्तार : -

Indian Coast Guard, Samudra Pratap: भारतीय समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को भारतीय तटरक्षक बल के बेड़े में अब तक के सबसे बड़े स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को औपचारिक रूप से शामिल किया। यह पोत न सिर्फ समुद्री प्रदूषण से निपटने में सक्षम है, बल्कि सर्च एंड रेस्क्यू, तटीय गश्त और समुद्री सुरक्षा जैसे बहुआयामी अभियानों में भी अहम भूमिका निभाएगा।

एक प्लेटफॉर्म, कई क्षमताएं

‘समुद्र प्रताप’ को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह एक ही प्लेटफॉर्म पर कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल क्षमताओं को एकीकृत करता है। रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज के बदलते समुद्री परिदृश्य में लचीलापन और तत्परता सबसे बड़ी जरूरत है। यही आधुनिक सोच ‘समुद्र प्रताप’ की डिजाइन और क्षमताओं में झलकती है। यह पोत समुद्री तेल रिसाव, रासायनिक प्रदूषण और अन्य पर्यावरणीय आपदाओं के दौरान त्वरित कार्रवाई में सक्षम है। इसके साथ ही यह आपात स्थिति में फंसे जहाजों और नाविकों को बचाने के लिए सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन में भी पूरी दक्षता से कार्य कर सकता है।

स्वदेशी शक्ति का प्रतीक

‘समुद्र प्रताप’ का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा किया गया है। यह पोत 114.5 मीटर लंबा और लगभग 4,200 टन वजनी है। इसकी अधिकतम गति 22 नॉट्स से ज्यादा है, जो इसे लंबी दूरी और लंबे समय तक चलने वाले अभियानों के लिए उपयुक्त बनाती है। इस पोत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक और सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। रक्षा मंत्री ने इसे आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान की बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि इतने जटिल और आधुनिक प्लेटफॉर्म में इतनी अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग इस बात का प्रमाण है कि भारत का रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र अब परिपक्व हो चुका है।

तटरक्षक बल का अब तक का सबसे बड़ा पोत

राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘समुद्र प्रताप’ भारत की पहली स्वदेशी रूप से डिजाइन की गई प्रदूषण नियंत्रण वेसल है और यह तटरक्षक बल के इतिहास का सबसे बड़ा पोत भी है। लगभग 4,170 टन वजन और 115 मीटर लंबाई वाला यह पोत अपनी विशालता और तकनीकी मजबूती से समुद्री सुरक्षा को नया आयाम देता है।

समुद्री प्रदूषण से लड़ने में बड़ी ताकत

रक्षा मंत्री ने अपने भाषण में समुद्री प्रदूषण को एक गंभीर वैश्विक चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि बढ़ता प्रदूषण मछुआरों की आजीविका, तटीय समुदायों के भविष्य और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा को सीधे प्रभावित करता है। ऐसे में तटरक्षक बल द्वारा चलाए जा रहे तटीय स्वच्छता अभियान, प्रदूषण प्रतिक्रिया अभियान और बहु-एजेंसी समन्वय अत्यंत सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि स्पष्ट संकल्प और मजबूत समन्वय से बड़े से बड़े संकट का सामना किया जा सकता है, और ‘समुद्र प्रताप’ इस दिशा में एक मजबूत साधन साबित होगा।

देशवासियों का भरोसा, दुश्मनों के लिए चेतावनी

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय तटरक्षक बल ने देशवासियों के मन में गहरा भरोसा पैदा किया है। किसान, मछुआरे और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग निश्चिंत होकर अपना काम करते हैं, क्योंकि उन्हें विश्वास है कि समुद्री सुरक्षा तटरक्षक बल के मजबूत हाथों में है। उन्होंने सख्त शब्दों में कहा कि तटरक्षक बल ने दुश्मनों के भीतर भी एक तरह का “भरोसा” पैदा किया है—भरोसा इस बात का कि अगर किसी ने भारत की समुद्री सीमा की ओर आंख उठाने की कोशिश की, तो उसे कड़ा जवाब मिलेगा। इसी कारण आज भारत के तटीय इलाकों में दुश्मन दुस्साहस करने से पहले सौ बार सोचते हैं।

महिला अधिकारियों की सशक्त मौजूदगी

‘समुद्र प्रताप’ पर दो महिला अधिकारियों की नियुक्ति भी एक महत्वपूर्ण कदम है। रक्षा मंत्री ने इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि आज महिला अधिकारी पायलट, ऑब्जर्वर, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर, लॉजिस्टिक्स ऑफिसर और लॉ ऑफिसर जैसी अहम भूमिकाओं में सक्रिय हैं। इतना ही नहीं, उन्हें होवरक्राफ्ट ऑपरेशन और फ्रंटलाइन मिशनों के लिए भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह दर्शाता है कि आज की महिला अधिकारी केवल सहायक भूमिका तक सीमित नहीं, बल्कि अग्रिम मोर्चे पर योद्धा के रूप में देश सेवा कर रही हैं।

समुद्र, सुरक्षा और भविष्य

रक्षा मंत्री ने कहा कि समुद्र भारत की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और भविष्य का आधार है। एक सुरक्षित और स्वच्छ समुद्र ही सुरक्षित व्यापार, पर्यावरण और जीवन की गारंटी देता है। ‘समुद्र प्रताप’ जैसे प्लेटफॉर्म यह भरोसा दिलाते हैं कि भारत अपनी समुद्री जिम्मेदारियों को न सिर्फ समझता है, बल्कि उन्हें निभाने के लिए पूरी तरह तैयार भी है।

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