लखनऊ : नई जनगणना सिर्फ जातिगत आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें आर्थिक-सामाजिक स्थिति का आकलन भी किया जाएगा। साथ ही घर में खाए जाने वाले अनाज, पीने के पानी के स्रोत और घर में इस्तेमाल किए जा रहे ईंधन के विषय में भी पूछा जाएगा। वहीं, ऐसा पहली बार होगा जब एसिड अटैक पीड़ितों व विस्थापित लोगों को भी गणना में शामिल किया जाएगा।
दरअसल, वर्ष 2027 में होने वाली नई जनगणना में जातिगत आंकड़ों को लेकर ही बहस छिड़ी हुई है। हालांकि, हकीकत इससे परे है। इस जनगणना में देश के आर्थिक-सामाजिक विकास का पैमाना भी शामिल है। हाउस और हाउस लिस्टिंग सर्वे में इसके लिए कुछ प्रश्न शामिल किए गए हैं। इसमें जनगणना कर्मियों द्वारा घर-घर जाकर यह पूछा जाएगा कि गेहूं, चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा में से कौन सा अनाज अधिक खा रहे हैं।
साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि कितने लोग बोतल बंद अथवा पैकेज्ड वॉटर भी अधिक उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन से सम्बंधित सवाल भी किए जाएंगे। खाना बनाने के लिए कौन से ईंधन का इस्तेमाल किया जा रहा है। सोलर को भी पहली बार जोड़ा गया है। इसके अलावा किन घरों में फ्री डिश, डीटीएच या अन्य केबल कनेक्शन का इस्तेमाल किया जा रहा है, इसकी भी गणना की जाएगी।
नई जनगणना में पहली बार एसिड अटैक पीड़ितों की अलग से गणना की जाएगी। साथ ही क्रोनिक न्यूरोलॉजिकल डिजीज, ब्लड डिसऑर्डर से प्रभावित लोगों की भी अलग से गणना की जाएगी। इसी प्रकार से विस्थापितों की जनगणना और विस्थापित होने के कारणों में पहली बार प्राकृतिक आपदा को भी जोड़ा गया है। नए सवाल इसलिए महत्वपूर्ण हैं कि यह जनगणना कोरोना महामारी के बाद हो रही है। महामारी के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापित होने की आशंका जताई गई थी।
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