Terror Plot: गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया। अहमदाबाद के पास गांधीनगर और पालनपुर से गिरफ्तार किए गए तीन आईएसआईएस से जुड़े आतंकियों ने पूछताछ में खुलासा किया है कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के लखनऊ कार्यालय और दिल्ली के आजादपुर बाजार में आतंकी हमला करने की योजना बना रहे थे। इस घटना का खुलासा होने के बाद से ही सुरक्षा एजेंसिया और अधिक अलर्ट हो गई हैं। वहीं, एटीएस की टीम आतंकियों से पूछताछ कर अन्य जानकारियां हासिल करने में जुट गयी है।
एटीएस ने बताया कि गिरफ्तार आतंकियों की पहचान आजाद सुलेमान शेख, मोहम्मद सुहैल और अहमद मोहिउद्दीन सैयद के रूप में हुई है। जांच में सामने आया है कि तीनों सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में आए थे और “बदला लेना है”, “कुछ बड़ा करना है”, जैसी बातें करते हुए कई लोगों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे थे। सूत्रों के अनुसार, आजाद शेख और मोहम्मद सुहैल ने पहले अहमदाबाद के संवेदनशील इलाकों और भीड़भाड़ वाले स्थानों की रेकी की थी। इसके बाद उन्होंने लखनऊ स्थित आरएसएस कार्यालय और दिल्ली के आजादपुर बाजार को निशाना बनाया। दोनों ही स्थानों की टोह लेकर उन्होंने हमले की रणनीति तैयार की थी। जांच में यह भी सामने आया कि इन आतंकियों ने राजस्थान के हनुमानगढ़ से हथियार जुटाए थे, जिन्हें बाद में गांधीनगर के एक कब्रिस्तान में छिपाया गया। इसी बीच, हैदराबाद निवासी मोहिउद्दीन उन हथियारों को लेने पहुंचने ही वाला था कि एटीएस ने कार्रवाई करते हुए उसे धर दबोचा। तलाशी के दौरान उसके पास से चार विदेशी पिस्तौल, 30 कारतूस और 40 लीटर अरंडी का तेल बरामद किया गया।
अहमद मोहिउद्दीन सैयद के मोबाइल फोन की जांच में उसके दो अन्य साथियों के संपर्कों और नेटवर्क की जानकारी मिली, जिसके बाद एटीएस ने बाकी दोनों आतंकियों को भी गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार, यह समूह गुजरात, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में बड़े आतंकी हमलों की योजना बना रहा था।
गुजरात एटीएस के डीआईजी सुनील जोशी ने बताया कि अहमद मोहिउद्दीन सैयद एक उच्च शिक्षित व्यक्ति है, जिसने चीन से एमबीबीएस की पढ़ाई की है। वह आईएसआईएस-खुरासान प्रांत के आतंकी अबू खादिम के संपर्क में था। अबू खादिम ने उसे भारत विरोधी गतिविधियों के लिए धन जुटाने, नए सदस्यों की भर्ती और संगठन का नेटवर्क बढ़ाने का जिम्मा सौंपा था। जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि मोहिउद्दीन साइनाइड से एक जहरीला पदार्थ तैयार करने की कोशिश कर रहा था, जिसे किसी बड़े हमले में इस्तेमाल किया जा सकता था। एटीएस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि हथियारों की आपूर्ति किन चैनलों से हुई और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य स्लीपर सेल देश के किन हिस्सों में सक्रिय हैं। यह मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि समय रहते की गई कार्रवाई ने देश में संभावित आतंकी हमले को टाल दिया।
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